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Akhilesh Yadav: अखिलेश यादव ने BJP पर लगाया ‘लोकतंत्र की हत्या' का आरोप, क्या सच में खतरे में है पिछड़ों और दलितों का अधिकार?

Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग के

Malvika
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2026-02-17
Akhilesh Yadav: अखिलेश यादव ने BJP पर लगाया ‘लोकतंत्र की हत्या' का आरोप, क्या सच में खतरे में है पिछड़ों और दलितों का अधिकार?
Akhilesh Yadav: अखिलेश यादव ने BJP पर लगाया ‘लोकतंत्र की हत्या' का आरोप, क्या सच में खतरे में है पिछड़ों और दलितों का अधिकार?

Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। अखिलेश का आरोप है कि यूपी में एक ऐसा ‘साइलेंट ऑपरेशन’ चल रहा है, जिसका मकसद पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों (PDA) को वोट देने के अधिकार से वंचित करना है। अखिलेश यादव ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “वोट छिना तो सब छिन जाएगा। हमारे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वाले अपने हक के लिए कयामत तक लड़ेंगे।

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क्या है ‘फॉर्म-7’ का वो पेच, जिससे मचा है बवाल?
अखिलेश यादव के आरोपों के केंद्र में है ‘फॉर्म-7’। दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) का काम चल रहा है। अखिलेश का दावा है कि भाजपा ने करीब 1.28 लाख अज्ञात फॉर्म-7 जमा किए हैं। तकनीकी रूप से फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम कटवाने के लिए किया जाता है।

सपा प्रमुख का आरोप है कि इन फॉर्मों के जरिए जानबूझकर उन जातियों को निशाना बनाया जा रहा है जो समाजवादी पार्टी की पारंपरिक समर्थक मानी जाती हैं। उन्होंने उन जातियों की पूरी लिस्ट भी गिनाई—जिसमें कुर्मी, मौर्य, पाल, यादव, पासी, निषाद और अंसारी जैसी जातियां शामिल हैं। अखिलेश के मुताबिक, यह कोई प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि लोकतंत्र को कमजोर करने वाला एक गहरा ‘षड्यंत्र’ है।

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अजीबोगरीब तर्क और प्रशासन पर सवाल
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अयोध्या का उदाहरण देते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वहां ‘छह बच्चे होने’ जैसे बेतुके तर्क देकर मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की तुलना ‘बंद कबूतरी आंख’ से करते हुए उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

सपा प्रमुख ने कन्नौज के जिलाधिकारी (DM) को भी निशाने पर लिया। उनका कहना है कि शिकायतों के पहाड़ के बावजूद प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। उनकी मांग स्पष्ट है—किस बूथ पर किसने फॉर्म भरा है, उसका डेटा सार्वजनिक किया जाए। अखिलेश ने चेतावनी दी कि अगर धांधली करने वाले एक भी जिलाधिकारी पर गाज गिर जाए, तो पूरी व्यवस्था सुधर जाएगी।

PDA प्रहरियों को ‘अलर्ट’ रहने का आदेश
अखिलेश यादव ने सिर्फ आरोप ही नहीं लगाए, बल्कि अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं, जिन्हें वे ‘PDA प्रहरी’ कहते हैं, उन्हें युद्ध स्तर पर काम करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को सपा विधायक चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपेंगे और विधानसभा के आगामी सत्र में भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा जाएगा।

आरक्षण और जातिगत जनगणना पर घेराबंदी
इस दौरान अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार को आरक्षण और जातिगत जनगणना के मुद्दे पर भी घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार हार के डर से पंचायत चुनावों को टाल रही है और जनगणना से भाग रही है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने ‘दबदबा’ शीर्षक वाला एक वीडियो गाना भी दिखाया, जिसमें हथियारों के प्रदर्शन के जरिए सत्ता के अहंकार पर कटाक्ष किया गया था।

2027 की जंग की ये सिर्फ शुरुआत है?
अखिलेश यादव का यह आक्रामक रुख साफ संकेत देता है कि वे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने वोट बैंक को सुरक्षित करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि भाजपा अगर साम-दाम-दंड-भेद का इस्तेमाल करेगी, तो समाजवादी पार्टी भी सड़कों पर और सदन में ईंट का जवाब पत्थर से देगी। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग अखिलेश यादव की इन शिकायतों पर क्या सफाई देता है और क्या यूपी की राजनीति में यह ‘वोट काटने’ का मुद्दा एक बड़ा जन-आंदोलन बनेगा।


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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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