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Ashadhi Ekadashi: आषाढी एकादशी 2025 का ‘रहस्य' उजागर, पारण की ये भूल आपको कर सकती है कमज़ोर, जानें सही समय और आहार

Ashadhi Ekadashi: हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ (या आषाढ़, क्योंकि कुछ क्षेत्रों में महीने के नामकरण में भिन्नता होती है) माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली आषाढी

Malvika
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2025-07-06
Ashadhi Ekadashi: आषाढी एकादशी 2025 का ‘रहस्य' उजागर, पारण की ये भूल आपको कर सकती है कमज़ोर, जानें सही समय और आहार
Ashadhi Ekadashi: आषाढी एकादशी 2025 का ‘रहस्य' उजागर, पारण की ये भूल आपको कर सकती है कमज़ोर, जानें सही समय और आहार

Ashadhi Ekadashi: हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ (या आषाढ़, क्योंकि कुछ क्षेत्रों में महीने के नामकरण में भिन्नता होती है) माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली आषाढी एकादशी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह ‘देवशयनी एकादशी’ के नाम से भी विख्यात है और इसे चातुर्मास की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस पवित्र दिन पर, भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस वर्ष, 6 जुलाई 2025 को मनाई जा रही आषाढी एकादशी लाखों श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है, खासकर महाराष्ट्र में, जहाँ वारकरी संप्रदाय के लाखों भक्त अपने इष्ट देव, श्री विट्ठल के दर्शन के लिए पंढरपुर की ओर तीर्थयात्रा करते हैं। इस शुभ अवसर पर मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है, और घरों में भक्ति और श्रद्धा का माहौल होता है।

आषाढी एकादशी का महत्व और देवशयनी एकादशी:
आषाढी एकादशी को ‘देवशयनी एकादशी’ भी कहा जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने की निद्रा में चले जाते हैं, जो कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी) तक रहती है। इस दौरान, जिसे चातुर्मास कहा जाता है, शुभ कार्यों की शुरुआत नहीं की जाती। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत जीवन में शुद्धता और आध्यात्मिकता लाने का एक माध्यम है, और इसे रखने वाले भक्त भगवान विष्णु की कृपा के पात्र बनते हैं।

पंढरपूर की पावन तीर्थयात्रा (वारी):
आषाढी एकादशी का नाम आते ही महाराष्ट्र की प्रसिद्ध ‘पंढरपूरची वारी’ का स्मरण होता है। लाखों की संख्या में भक्त, जिन्हें ‘वारकरी’ कहा जाता है, ‘ज्ञानोबा माऊली, तुकाराम’ का जयघोष करते हुए, अपने इष्ट देव विट्ठल के दर्शन के लिए पैदल यात्रा करते हैं। यह यात्रा भक्ति, सेवा और समर्पण का अनूठा संगम है, जो दशकों से चली आ रही है। आषाढी एकादशी पर पंढरपूर में भक्तों का अपार जनसैलाब उमड़ता है, जो इस एकादशी को और भी विशेष बना देता है।

आषाढी एकादशी का व्रत कब और कैसे खोलें (पारण):
एकादशी का व्रत निर्जल या फलाहार रखकर किया जाता है। इस वर्ष 6 जुलाई 2025 को व्रत रखने के बाद, इसका पारण (व्रत खोलना) अगले दिन, 7 जुलाई 2025, सोमवार को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 29 मिनट से सुबह 8 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। यह वह समय है जब भक्त स्नान आदि से निवृत होकर, भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के बाद अपना उपवास तोड़ सकते हैं। किसी भी व्रत का पारण शुभ मुहूर्त में करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह व्रत के पुण्य को बढ़ाता है।

व्रत पारण के समय क्या खाएं? (उपवास के बाद आहार):
अक्सर यह प्रश्न उठता है कि एकादशी का व्रत तोड़ने के बाद सुबह सबसे पहले क्या सेवन करना चाहिए। हड़बड़ी में चाय-बिस्किट खाकर सीधे दोपहर के भोजन पर आना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है, क्योंकि इससे शरीर पर अचानक भार पड़ सकता है।
व्रत खोलने के लिए सबसे अच्छा समय सुबह का होता है, जब आप आसानी से पौष्टिक आहार ले सकते हैं। आप अपने दिन की शुरुआत फलों, जैसे केले या संतरे, या ताज़े फलों के जूस से कर सकते हैं। रात भर पानी में भिगोए हुए मेवे (जैसे बादाम, किशमिश, अखरोट) खाना भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके साथ ही, अपने आहार में सामान्य खाद्य पदार्थ जैसे आलू, चावल, गेहूं, ज्वारी आदि शामिल कर सकते हैं।

परहेज और पौष्टिक भोजन:
व्रत खोलने के बाद, खासकर अगले 1-2 दिनों तक, किसी भी तरह के तीखे, मसालेदार या तले हुए भोजन से परहेज करना चाहिए। ऐसे खाद्य पदार्थ पेट पर अधिक दबाव डालते हैं और पाचन क्रिया को बाधित कर सकते हैं। इसके बजाय, हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। आप अपने आहार में रवा उपमा, हलवा (शिरा), चावल की खीर, या दलिया उपमा जैसे हल्के और पौष्टिक व्यंजन शामिल कर सकते हैं। सूप या ज्वारी की भाकरी भी एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

मिठाई का सेवन और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प:
जब आप एकादशी का उपवास तोड़ रहे हों, तो कुछ मीठे का सेवन करना आम बात है। ऐसे में आप चावल की खीर या सेवइयां (कस्टर्ड) जैसी चीजें बना सकते हैं। खीर में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होते हैं, जो उपवास के बाद की कमजोरी को दूर करने में मदद करते हैं। हालांकि, खीर बनाते समय चीनी का कम इस्तेमाल करें। चीनी की जगह गुड़ का प्रयोग करना स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर होता है, क्योंकि गुड़ के अपने अलग फायदे हैं और यह अधिक प्राकृतिक होता है। गुड़ की मिठास आपके शरीर को ऊर्जा देगी और वह सेहतमंद भी रहेगा। इस तरह, आप आषाढी एकादशी के व्रत का विधिवत पारण कर सकते हैं और भगवान विट्ठल का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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