Uttar Pradesh

मुख्यमंत्री ने ‘प्रारम्भिक उत्तर भारत और इसके सिक्के’ पुस्तक का विमोचन किया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर ‘प्रारम्भिक उत्तर भारत और इसके सिक्के’ पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्र

Priyanshi
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2026-01-09
मुख्यमंत्री ने ‘प्रारम्भिक उत्तर भारत और इसके सिक्के’ पुस्तक का विमोचन किया
मुख्यमंत्री ने ‘प्रारम्भिक उत्तर भारत और इसके सिक्के’ पुस्तक का विमोचन किया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर ‘प्रारम्भिक उत्तर भारत और इसके सिक्के’ पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह पुस्तक कोई सामान्य पुस्तक नहीं, बल्कि दुनिया की आंखों को खोलने का एक दस्तावेज है। इस दृष्टि से पुस्तक विमोचन का यह कार्यक्रम अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत ने हमेशा तथ्य एवं प्रमाण के साथ अपनी बात को सामने रखा है। जबकि पाश्चात्य विचारकों को 2,000 वर्ष पुरानी किसी बात की जानकारी नहीं है। इस पुस्तक ने ढाई हजार वर्ष की विरासत को हमारे सामने रखा है। इससे वर्तमान पीढ़ी को यत्र तत्र बिखरे हुए सिक्कों को समझने की प्रेरणा प्राप्त होगी। हिंदुजा फाउण्डेशन ने 34,000 से अधिक सिक्के भारत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को वर्तमान पीढ़ी के सामने एक बेहतरीन प्रमाण के साथ प्रस्तुत किया है।


मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हिंदुजा फाउण्डेशन द्वारा यहां प्रदर्शनी में रखे गए यह तांबे, चांदी व मिश्रित धातु से बने सिक्के वर्तमान पीढ़ी को 25,000 वर्ष पुरानी विरासत का प्रमाण हैं और हमारी दुर्लभ धरोहर हैं। यह सिक्के उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों से सम्बन्धित हैं, जो अयोध्या, काशी, मथुरा, कौशांबी सहित षोडश महाजनपदों और मौर्य काल, गुप्त काल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक परिस्थितियों को प्रतिबिम्बित करते हैं। साथ ही, उस समय की मापक पद्धति को जानने का भी एक बड़ा अवसर प्रदान करते हैं। मनु ने सर्वप्रथम माप व तौल का एहसास दुनिया को कराया था। सिक्कों के मापन भी उसी रूप में बनाए गए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि महाभारत में उल्लेख है कि ‘दुर्लभं भारते जन्म मानुष्यं तत्र दुर्लभम्’ अर्थात भारत में जन्म लेना दुर्लभ है और उसमें भी मनुष्य के रूप में जन्म लेना और भी दुर्लभ है। जबकि पश्चिमी विद्वान इस बात का दुष्प्रचार करते रहे हैं कि भारत एक इकाई नहीं है। वर्ष 1947 में इस दुष्प्रचार का भुक्तभोगी भारत बना। जब भारत के दो अभिन्न हिस्से उससे अलग कर दिए गए। उस समय भारत को कमजोर करने के लिए अनेक साजिशें रची गई, लेकिन भारत ने इनका जोरदार प्रतिकार किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत कब एक नहीं रहा है। भारतीय मनीषा ने कहा कि ‘उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्, वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः’। यह श्लोक वृहत्तर भारत को व्यक्त करता है कि समुद्र के उत्तर में और हिमालय के दक्षिण में जो देश है, उसे भारत कहते हैं तथा उसकी संतानों को भारती कहते हैं। इस भारतवर्ष में वर्तमान भारत के साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश शामिल हैं। हजारों वर्षों की इस विरासत को लोगों ने विस्मृत कर दिया।


मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज भी पश्चिम के लोग यह मानते हैं की दुनिया को लोकतंत्र उन्होंने दिया जबकि हमारे यहां भारतवर्ष में वैशाली गणराज्य अपने आप में लोकतंत्र की आधारशिला रखने वाले प्रारम्भिक गणराज्यों में से एक था। इसीलिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जी-20 समिट के दौरान इस बात को पूरी मजबूती के साथ कहा था कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जननी भी है। यदि किसी को लोकतंत्र के बारे में जानना है, तो उसे भारत से सीखना होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह सिक्के भारत की सनातन परम्परा को व्यक्त करते हैं, जिसने जियो और जीनो दो पर विश्वास किया। दुनिया की ऐसी कौन सी जाति, मत, मजहब, सम्प्रदाय है जिसको उसकी विपत्ति के समय हम भारतीयों ने शरण देकर फलने-फूलने और आगे बढ़ने का अवसर न दिया हो। ‘अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्’ की घोषणा दुनिया में केवल भारत ही कर सकता है, दूसरा कोई देश नहीं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मौर्यकाल भारत का स्वर्ण युग था। उस कालखंड में दुनिया की इकोनॉमी में भारत का हिस्सा 46 प्रतिशत था और यह 15वीं सदी तक यह हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी। उसके बाद के कालखंड में भारत की धरोहर को लूट गया। आजादी के समय दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी मात्र डेढ़ से दो प्रतिशत रह गयी थी। आज हम सभी प्रधानमंत्री जी के आभारी हैं, जिनके प्रयासों से भारत को दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में सफलता प्राप्त हुई है। इकोनामी तब ग्रोथ करती है, जब उसे सुरक्षा व विकास अनुकूल वातावरण प्राप्त होता है। इसके लिए सरकार व समाज दोनों का भी समान दायित्व बनता है। सभी लोग जब मिलकर प्रयास करते हैं तो उसे प्रकार की स्थितियां पैदा होती हैं। आज हम उस दिशा में आगे बढ़े हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति हर भारतवासी कर सके इसके लिए प्रधानमंत्री जी ने देश के सामने विजन 2047 रखा है। विजन 2047 का उद्देश्य पंचप्रण व 11 संकल्पों के साथ हर भारतवासी को जोड़ना है। पंचप्रण में पहला प्रण विरासत पर गौरव की अनुभूति करना है। 500 वर्षों के बाद अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर तथा काशी में श्री काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण प्रधानमंत्री जी के इस विजन का परिणाम हैं।


मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत की वैदिककालीन, रामायण व महाभारत कालीन ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ी हुई धरोहरों को संरक्षित करना, उनका संवर्धन करना और उसको आगे बढ़ाने की प्रक्रिया इसी का हिस्सा है। यह कार्य ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार कर रहे हैं। उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम तक पूरे भारत को एकता के सूत्र में बांधकर विश्व मानवता के लिए फिर से भारत के संदेश को दुनिया में पहुंचाना, भारत का उद्देश्य है। इसके लिए हमें उस प्रकार के वातावरण के साथ अपने आप को जोड़ना होगा।


पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में विगत 09 वर्षों में प्रदेश में कानून व्यवस्था, विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, त्वरित निर्णय ने उत्तर प्रदेश के विषय में देश और दुनिया में लोगों की सोच बदलने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि यह सिक्के हमारी परम्परा, विरासत व धरोहरों का सम्मान करने के साथ ही, हमारी संस्कृति को जीवन करने का प्रमाण है। यह सिक्के भारत ने जो अपनी अक्षुण्ण स्वर्ण गाथा लिखी है, उनको कनेक्ट करने का माध्यम भी हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने हिंदुजा फाउण्डेशन द्वारा संग्रहीत सिक्कों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
कार्यक्रम को ‘प्रारम्भिक उत्तर भारत और इसके सिक्के’ पुस्तक के लेखक श्री देवेन्द्र हाण्डा तथा हिंदुजा ग्रुप (इण्डिया) के चेयरमैन श्री अशोक पी0 हिंदुजा ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर हिंदुजा ग्रुप (यूरोप) के चेयरमैन श्री प्रकाश पी0 हिंदुजा, हिंदुजा फाउण्डेशन के पदाधिकारी व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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