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CJI Surya Kant : CJI ने रातों-रात बदली सुनवाई की लिस्ट, जानें क्या आपके लिए भी खुला रास्ता?

CJI Surya Kant : भारत की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court of India) से एक ऐसी खबर आई है, जिसे सुनकर हर आम भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा और जो लोग सालों से

Chetan
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2026-01-01
CJI Surya Kant : CJI ने रातों-रात बदली सुनवाई की लिस्ट, जानें क्या आपके लिए भी खुला रास्ता?
CJI Surya Kant : CJI ने रातों-रात बदली सुनवाई की लिस्ट, जानें क्या आपके लिए भी खुला रास्ता?

CJI Surya Kant : भारत की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court of India) से एक ऐसी खबर आई है, जिसे सुनकर हर आम भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा और जो लोग सालों से इंसाफ की आस में कोर्ट की सीढ़ियां घिस रहे थे, उन्हें सुकून मिलेगा। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की पूरी प्रक्रिया को ही बदल दिया है।

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अब देश की सबसे बड़ी अदालत में फाइलें सिर्फ तारीखों के हिसाब से नहीं, बल्कि इंसान की जरूरतों के हिसाब से खोली जाएंगी। CJI सूर्यकांत ने एक नई ‘प्रायोरिटी लिस्ट’ तैयार की है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि समाज का सबसे कमजोर वर्ग अब न्याय के लिए बरसों इंतजार नहीं करेगा।

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CJI सूर्यकांत का ‘मानवीय चेहरा’: ये 4 श्रेणियां होंगी सबसे ऊपर

अक्सर देखा जाता है कि सोमवार और शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में लगभग 800 से ज्यादा नए मामले दर्ज होते हैं। इस भारी भीड़ में अक्सर गरीबों और मजबूरों के मामले कहीं नीचे दब जाते थे। इसी दर्द को समझते हुए मुख्य न्यायाधीश ने 4 खास श्रेणियां बनाई हैं, जिन्हें सुनवाई में प्राथमिकता (Priority) दी जाएगी:

  1. दिव्यांग और एसिड हमले के पीड़ित: जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं या जिन्होंने एसिड अटैक का दंश झेला है, उनके मामले अब कोर्ट की टॉप लिस्ट में होंगे।

  2. 80 साल से अधिक के बुजुर्ग: उम्र के आखिरी पड़ाव पर खड़े वरिष्ठ नागरिकों को अब अदालती चक्करों से जल्द मुक्ति मिलेगी।

  3. BPL (गरीबी रेखा के नीचे) लोग: जिनके पास लड़ने के लिए साधन नहीं हैं, कोर्ट खुद चलकर उनके पास आएगा।

  4. मुफ्त कानूनी सहायता लेने वाले: वे लोग जो गरीबी के कारण वकील नहीं कर सकते और सरकारी सहायता से कोर्ट पहुंचे हैं।

वकीलों के लिए नया निर्देश: सबूत देना होगा अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी नई याचिका को दायर करते समय वकीलों और याचिकाकर्ताओं को यह बताना होगा कि उनका मामला किस श्रेणी में आता है। साथ ही, इसके समर्थन में एक सरकारी प्रमाण पत्र (जैसे बीपीएल कार्ड या दिव्यांग प्रमाण पत्र) जमा करना अनिवार्य होगा। इससे कोर्ट को अपनी लिस्ट तैयार करने में आसानी होगी और असली हकदार को पहले न्याय मिल सकेगा।

आँकड़े जो दुनिया को चौंका रहे हैं: भारत vs अमेरिका vs ब्रिटेन

जब हम न्याय की बात करते हैं, तो अक्सर विदेशों की मिसाल दी जाती है। लेकिन साल 2025 के आँकड़े बताते हैं कि भारतीय जजों ने वह कर दिखाया है जो अमेरिका और ब्रिटेन की सोच से भी परे है।

  • भारत का जलवा: 2025 में सुप्रीम कोर्ट में कुल 75,280 मामले दर्ज हुए। इनमें से कोर्ट ने 65,403 मामलों (87%) का सफलतापूर्वक निपटारा किया। इसमें 42,793 दीवानी और 22,610 आपराधिक मामले शामिल हैं।

  • अमेरिका की सच्चाई: दुनिया का सबसे ताकतवर देश होने के बावजूद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट साल भर में केवल 70-80 मामलों को ही सुनवाई के लिए स्वीकार करता है।

  • ब्रिटेन की हालत: ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में साल भर में केवल 200 के करीब मामले आए और उन्होंने महज 50 मामलों में फैसला सुनाया।

वहीं, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 1,400 से अधिक लंबे और विस्तृत फैसले सुनाकर यह साबित कर दिया कि भारतीय न्यायपालिका दुनिया की सबसे मेहनती न्यायपालिकाओं में से एक है।

एक नई सुबह की शुरुआत

CJI सूर्यकांत की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि कानून अंधा हो सकता है, लेकिन न्याय करने वाला दिल पत्थर का नहीं होता। 16 बेंचों के साथ सोमवार और शुक्रवार को होने वाली सुनवाई अब उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनेगी जो अब तक भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाते थे। यह कदम भारत में ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका न्याय’ के सपने को सच करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।


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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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