Delhi-NCR new expressway: केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में यातायात को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 30 किलोमीटर लंबे एक नए एक्सप्रेसवे के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना दिल्ली-नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे को भविष्य में बनने वाले जेवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से सीधे जोड़ेगी। इस नए एक्सप्रेसवे के बनने से दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच यात्रा न केवल आसान और तेज होगी, बल्कि जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचना भी बेहद सुविधाजनक हो जाएगा, जिससे लाखों यात्रियों को फायदा मिलेगा।
नितिन गडकरी ने दी मंजूरी, यमुना के किनारे होगा निर्माण
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। यह नया एक्सप्रेसवे यमुना नदी के किनारे बनाया जाएगा और यह मौजूदा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के समानांतर चलेगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पुरानी यमुना-पुश्ता रोड को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ना है, जिससे एक वैकल्पिक और तेज मार्ग तैयार हो सके। स्थानीय सांसद डॉ. महेश शर्मा ने इस परियोजना का प्रस्ताव रखा था, जिस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने आश्वासन दिया है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस पर पूरी गंभीरता से काम करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए फंड की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
दिल्ली-एनसीआर के विकास पर सरकार का बड़ा दांव
नितिन गडकरी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि केंद्र सरकार दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के ढांचागत विकास को लेकर कितनी गंभीर है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में 1.2 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें से 60,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं, जबकि भविष्य में 40,000 से 50,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करने की योजना है। यह निवेश इस क्षेत्र को विश्व स्तरीय परिवहन सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर 5 लाख वाहनों का दबाव
वर्तमान में, 25 किलोमीटर लंबा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे हर दिन लगभग 5 लाख वाहनों का भारी दबाव झेल रहा है। विशेष रूप से सुबह और शाम के पीक आवर्स के दौरान, इस एक्सप्रेसवे पर भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिलता है, जिससे यात्रियों का कीमती समय और ईंधन बर्बाद होता है। इसी समस्या को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण ने मार्च 2025 में रिवरसाइड एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी थी और इसे बनाने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) को सौंपी गई थी। इस परियोजना की लागत नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण द्वारा संयुक्त रूप से वहन की जानी थी।
हालांकि, अब नोएडा प्राधिकरण की इच्छा है कि इस एक्सप्रेसवे का निर्माण NHAI द्वारा किया जाए, ताकि यह परियोजना बेहतर गुणवत्ता के साथ और समय पर पूरी हो सके। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अब केवल NHAI की औपचारिक सहमति का इंतजार है।
सांसद डॉ. महेश शर्मा के अनुसार, यह नया एक्सप्रेसवे एक रणनीतिक बाईपास के रूप में काम करेगा। इसके बन जाने से दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट जाने वाले यात्री बिना किसी ट्रैफिक जाम में फंसे सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। यह न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के निवासियों के लिए जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगा।
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