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Digital Arrest Scam 2026: मोदी सरकार ने WhatsApp को दिया ‘डेथ वॉरंट', अब हैकर्स के उड़ेंगे होश

Digital Arrest Scam 2026: आज के दौर में जहाँ तकनीक हमारे जीवन को आसान बना रही है, वहीं साइबर अपराधी इसे मासूम लोगों को लूटने का हथियार बना रहे हैं। पिछले कुछ सम

Malvika
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2026-03-21
Digital Arrest Scam 2026: मोदी सरकार ने WhatsApp को दिया ‘डेथ वॉरंट', अब हैकर्स के उड़ेंगे होश
Digital Arrest Scam 2026: मोदी सरकार ने WhatsApp को दिया ‘डेथ वॉरंट', अब हैकर्स के उड़ेंगे होश

Digital Arrest Scam 2026: आज के दौर में जहाँ तकनीक हमारे जीवन को आसान बना रही है, वहीं साइबर अपराधी इसे मासूम लोगों को लूटने का हथियार बना रहे हैं। पिछले कुछ समय से ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) शब्द ने देशभर में खौफ पैदा कर रखा है। मासूम नागरिकों को पुलिस या कानून अधिकारी बनकर डराने और उनसे लाखों रुपये ठगने वाले इन अपराधियों के खिलाफ अब भारत सरकार ने ‘आर-पार’ की जंग छेड़ दी है।

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ताजा रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप (WhatsApp) को एक सख्त आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत अब उन सभी डिवाइस की ID (Identity) को ब्लॉक कर दिया जाएगा, जिनका इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट जैसे घिनौने अपराधों के लिए किया जा रहा है।

क्या है सरकार का मास्टरप्लान?

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय अंतर-विभागीय समिति (IDC) ने व्हाट्सएप के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की है। इस बैठक में व्हाट्सएप को डिजिटल अरेस्ट के खतरे से निपटने के लिए कई कड़े सुरक्षा उपाय लागू करने को कहा गया है।

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  1. डिवाइस आईडी होगी ब्लॉक: अब तक स्कैमर्स सिम कार्ड बदलकर बच निकलते थे, लेकिन अब सरकार सीधे उनके मोबाइल या कंप्यूटर की ‘डिवाइस आईडी’ को ही ब्लॉक करने का आदेश दे रही है। इसका मतलब है कि एक बार ब्लॉक होने के बाद अपराधी उस फोन से दोबारा किसी को व्हाट्सएप कॉल या मैसेज नहीं कर पाएगा।

  2. स्काइप (Skype) जैसे सेफ्टी फीचर्स: व्हाट्सएप अब स्काइप जैसे सुरक्षा फीचर्स पर विचार कर रहा है, जिससे संदिग्ध कॉल्स की पहचान और भी आसान हो जाएगी।

  3. 180 दिन तक डेटा रहेगा सुरक्षित: IT Rules 2021 के तहत अब डिलीट किए गए अकाउंट्स का डेटा भी कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखा जाएगा। इससे जांच एजेंसियों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि अपराधी ने किसे कॉल किया था और उसका लोकेशन क्या था।

  4. खतरनाक ऐप्स पर पाबंदी: सरकार उन फर्जी और खतरनाक APK फाइल्स की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करने की योजना बना रही है, जिन्हें अक्सर ठगी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

आखिर क्या होती है डिवाइस आईडी?

बहुत से लोग यह नहीं जानते कि Device ID क्या है। आसान शब्दों में कहें तो यह आपके गैजेट का ‘आधार नंबर’ है। हर मोबाइल या लैपटॉप की एक यूनिक पहचान होती है, जिसे बदला नहीं जा सकता। इसमें IMEI नंबर (मोबाइल नेटवर्क के लिए), MAC एड्रेस (Wi-Fi के लिए) और सीरियल नंबर शामिल होते हैं। जब सरकार डिवाइस आईडी ब्लॉक करेगी, तो वह फोन हमेशा के लिए बेकार हो जाएगा।

डिजिटल अरेस्ट: खौफ का वो खेल, जिसमें आप फंस सकते हैं!

डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक बड़ा स्कैम है। इसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई (CBI) या नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताकर आपको व्हाट्सएप वीडियो कॉल करते हैं।

  • वे वर्दी में हो सकते हैं या उनके पीछे का बैकग्राउंड बिल्कुल असली पुलिस स्टेशन जैसा दिखता है।

  • वे आपको डराते हैं कि आपके नाम से कोई ड्रग्स का पार्सल पकड़ा गया है या आपके किसी रिश्तेदार को गिरफ्तार किया गया है।

  • वे आपको ‘डिजिटली’ तब तक कैमरे के सामने रहने को मजबूर करते हैं जब तक कि आप उनके खाते में पैसे ट्रांसफर न कर दें।

स्कैम से बचने के लिए क्या करें?

सरकार और साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह है कि:

  • कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस व्हाट्सएप पर कभी भी किसी को ‘अरेस्ट’ नहीं करती।

  • अगर कोई संदिग्ध कॉल आए, तो तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

  • अनजान नंबर से आए वीडियो कॉल को न उठाएं।

भारत सरकार का यह कदम डिजिटल इंडिया की सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। व्हाट्सएप को दिए गए इन आदेशों से न केवल स्कैमर्स की पहचान आसान होगी, बल्कि आम जनता का भरोसा भी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ेगा। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें…


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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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