Disrespect to Indian flag: हर साल 15 अगस्त का दिन हर भारतीय के लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि गर्व, सम्मान और देशभक्ति की भावनाओं का सैलाब होता है। इस साल भारत अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस दिन देशभर में एक उत्सव और उमंग का माहौल होता है। स्कूलों, दफ्तरों, कॉलोनियों से लेकर हर गली-मोहल्ले तक, हवा में देशभक्ति के गीत गूंजते हैं और हर तरफ हमारा प्यारा तिरंगा शान से लहराता दिखता है।
जैसे ही स्वतंत्रता दिवस नजदीक आता है, बाजारों की रौनक देखने लायक होती है। दुकानों पर तिरंगे के तीन रंगों – केसरिया, सफेद और हरे – से सजी मिठाइयां, केक, गुब्बारे, कपड़े और सजावट का सामान बिकने लगता है। लोग इन चीजों को खरीदकर तरह-तरह से देश के प्रति अपना प्यार और सम्मान जताते हैं। लेकिन इसी जश्न के बीच एक सवाल अक्सर हमारे मन में कौंधता है: क्या तिरंगे के रंग वाली मिठाई या केक खाना राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है? यह एक गंभीर विषय है, और इस पर कानून क्या कहता है, यह जानना हम सभी के लिए बेहद जरूरी है।
क्या तिरंगे जैसे रंग की मिठाई खाना गलत है? जानिए क्या है सच्चाई
सबसे पहले यह समझना होगा कि तिरंगे के तीन रंग (केसरिया, सफेद, हरा) निश्चित रूप से हमारे राष्ट्रीय ध्वज के प्रतीक हैं, लेकिन इन रंगों का इस्तेमाल किसी मिठाई, केक या किसी अन्य खाद्य पदार्थ में करने से वह वस्तु अपने आप में राष्ट्रीय ध्वज नहीं बन जाती है।
कानून के अनुसार, अपमान तब माना जाता है जब आप वास्तविक तिरंगे (जिसमें अशोक चक्र भी शामिल है) का निरादर करते हैं। इसलिए, अगर कोई मिठाई या केक इन तीन रंगों से बना है, लेकिन उसमें अशोक चक्र या तिरंगे का पूरा डिजाइन नहीं है, तो उसे कानूनी तौर पर तिरंगे का अपमान नहीं माना जाता है।
यह विवाद कोई नया नहीं है। साल 2013 में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान तिरंगे की डिजाइन वाला एक केक काटा गया था। इस पर बड़ा विवाद हुआ और मामला अदालत की दहलीज तक जा पहुंचा था। इस पर लंबी सुनवाई के बाद, मार्च 2021 में मद्रास हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि तिरंगे की डिजाइन वाले केक को काटना या खाना, देशद्रोह या राष्ट्रीय ध्वज का अपमान नहीं है। इसे देशभक्ति की भावना को नुकसान पहुंचाना नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है, लेकिन सिर्फ रंगों के उपयोग से ही कोई चीज तिरंगा नहीं बन जाती। जश्न मनाने का यह तरीका देशभक्ति की अभिव्यक्ति है, अपमान नहीं।
तिरंगे से जुड़े महत्वपूर्ण नियम, जिनका पालन करना अनिवार्य है
एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते, हमें भारतीय ध्वज संहिता, 2002 (Flag Code of India) में दिए गए तिरंगे से जुड़े कुछ ज़रूरी नियम भी पता होने चाहिए:
- सम्मानजनक स्थान: तिरंगे को हमेशा सम्मानजनक तरीके से फहराना और रखना चाहिए। इसे किसी भी हाल में जमीन पर नहीं छूना चाहिए।
- कहाँ फहरा सकते हैं: शैक्षिक संस्थानों, घरों या ऑफिस में तिरंगा सम्मानपूर्वक फहराया जा सकता है।
- कटे-फटे तिरंगे का क्या करें: अगर तिरंगा फट जाए, मैला हो जाए या किसी भी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाए, तो उसे सही तरीके से गोपनीयता में दफनाया या जलाया जाना चाहिए।
- क्या करना अपराध है: तिरंगे को फाड़ना, कुचलना, जलाना या कूड़ेदान में फेंकना एक गंभीर अपराध है।
- कुछ भी लिखना मना: तिरंगे पर कुछ भी लिखना, छापना या किसी भी तरह का निशान बनाना सख्त मना है।
- व्यक्तिगत इस्तेमाल पर रोक: तिरंगे का इस्तेमाल कपड़े, वर्दी या किसी अन्य व्यक्तिगत वस्तु के रूप में नहीं किया जा सकता।
- सर्वोच्च स्थान: तिरंगे को किसी और झंडे के नीचे या उसके साथ बराबरी पर नहीं फहराया जा सकता है।
तिरंगे का अपमान करने पर क्या है सजा का प्रावधान?
अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर और सार्वजनिक रूप से तिरंगे का अपमान करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय झंडा संहिता, 2002 और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इस अपराध में दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
संक्षेप में, तिरंगे रंग की मिठाई खाकर जश्न मनाना आपकी देशभक्ति की भावना का प्रतीक हो सकता है, लेकिन असली सम्मान तिरंगे के नियमों का पालन करने और देश के गौरव को बनाए रखने में है। आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर अपनी देशभक्ति को सही मायनों में समझें और गर्व से तिरंगे को सम्मान दें।
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