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Donald Trump Board of Peace: वॉशिंगटन में ट्रंप का वो ‘गुप्त' दांव, जिसमें भारत की एंट्री ने दुनिया को चौंकाया

Donald Trump Board of Peace: वॉशिंगटन डीसी से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों और थिंक-टैंक के बीच खलबली मचा दी है। अमेरिका की राजधानी में गु

Chetan
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2026-02-20
Donald Trump Board of Peace: वॉशिंगटन में ट्रंप का वो ‘गुप्त' दांव, जिसमें भारत की एंट्री ने दुनिया को चौंकाया
Donald Trump Board of Peace: वॉशिंगटन में ट्रंप का वो ‘गुप्त' दांव, जिसमें भारत की एंट्री ने दुनिया को चौंकाया

Donald Trump Board of Peace: वॉशिंगटन डीसी से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों और थिंक-टैंक के बीच खलबली मचा दी है। अमेरिका की राजधानी में गुरुवार (19 फरवरी) को एक ऐसी बैठक हुई, जिसे संयुक्त राष्ट्र (UN) के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी महात्वाकांक्षी योजना ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) की पहली बैठक आयोजित की, और सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि भारत भी इस बैठक की मेज पर मौजूद था।Most Responsible Countries : भारत ने अमेरिका-चीन को बुरी तरह पछाड़ा, जानें कौन है दुनिया का सबसे ‘ईमानदार’ देश?

क्या संयुक्त राष्ट्र (UN) की जगह लेगा ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’?

पिछले महीने दावोस में आयोजित ‘विश्व आर्थिक मंच’ में डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसी घोषणा की थी, जिसने हड़कंप मचा दिया था। उन्होंने एक ऐसी वैश्विक संस्था की रूपरेखा पेश की जो सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र (UN) को टक्कर दे सके। ट्रंप का मानना है कि मौजूदा वैश्विक संस्थाएं विफल हो चुकी हैं और अब ‘बोर्ड ऑफ पीस’ जैसी संस्थाओं की जरूरत है, जहाँ फैसले तेजी से लिए जा सकें।

शुरुआत में इसे केवल इजरायल और हमास के बीच गाजा युद्धविराम की निगरानी के लिए एक अस्थाई समाधान के रूप में देखा गया था, लेकिन अब ट्रंप की महत्वाकांक्षाएं इससे कहीं ज्यादा बड़ी हो गई हैं। वे इसे एक नए ‘वर्ल्ड ऑर्डर’ के रूप में देख रहे हैं।

भारत की ‘चुप्पी’ और फिर वॉशिंगटन में मौजूदगी

भारत के इस बोर्ड में शामिल होने को लेकर काफी सस्पेंस बना हुआ था। दावोस में जब इसकी लॉन्चिंग हुई थी, तब भारत ने इससे दूरी बनाए रखी थी। यहाँ तक कि विदेश मंत्रालय ने 12 फरवरी को भी यही कहा था कि “प्रस्ताव विचाराधीन है।” लेकिन गुरुवार को वॉशिंगटन स्थित यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में जब बैठक शुरू हुई, तो भारतीय दूतावास की चार्ज डी’ अफेयर्स नामग्या सी खम्पा वहां पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में मौजूद थीं।

भारत का यह कदम बहुत सोच-समझकर चली गई एक ‘कूटनीतिक चाल’ मानी जा रही है। भारत अभी पूर्ण सदस्य नहीं बना है, लेकिन ‘पर्यवेक्षक’ बनकर उसने यह साफ़ कर दिया है कि वह दुनिया की इस नई हलचल से अलग-थलग नहीं रहना चाहता।

बैठक में कौन-कौन हुआ शामिल?

इस हाई-प्रोफाइल बैठक में लगभग 50 देशों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बोर्ड में वर्तमान में 27 सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें अजरबैजान, पाकिस्तान, सऊदी अरब, इजराइल, जॉर्डन, तुर्किये और यूएई जैसे नाम प्रमुख हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देश पूर्ण सदस्य के तौर पर आए, वहीं भारत और यूरोपीय संघ ने ‘ऑब्जर्वर’ की भूमिका निभाना बेहतर समझा।

डॉलर की बारिश: गाजा के लिए 17 अरब डॉलर का फंड

बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी चिर-परिचित शैली में बड़े वित्तीय आंकड़े पेश किए। उन्होंने घोषणा की कि कजाकिस्तान, यूएई, कतर और कुवैत सहित 9 देशों ने गाजा के राहत पैकेज के लिए 7 अरब डॉलर देने का वादा किया है। इसके साथ ही, ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि अमेरिका खुद इस शांति बोर्ड के लिए 10 अरब डॉलर देगा। हालांकि, यह पैसा कहाँ और कैसे खर्च होगा, इसकी पूरी पारदर्शिता अभी भी रहस्य बनी हुई है।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

भारत हमेशा से पश्चिम एशिया (Middle East) में शांति का समर्थक रहा है। लेकिन ट्रंप के इस नए बोर्ड में शामिल होने के कुछ रणनीतिक जोखिम भी हैं। एक तरफ जहां यह अमेरिका के साथ रिश्तों को और मजबूती देता है, वहीं दूसरी तरफ यह संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं के साथ भारत के पुराने रिश्तों पर सवाल भी खड़ा कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत फिलहाल “वेट एंड वॉच” (रुको और देखो) की नीति अपना रहा है। डोनाल्ड ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ भविष्य में क्या रूप लेगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन भारत की मौजूदगी ने यह तय कर दिया है कि नई वैश्विक व्यवस्था में भारत एक ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहने वाला है।


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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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