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Fatehpur UP news: फतेहपुर में ‘मंदिर-मकबरा' विवाद पर बवाल, बैरिकेडिंग तोड़कर तोड़फोड़ और भगवा झंडा फहराने के बाद तनाव

Fatehpur UP news: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सोमवार को उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब एक प्राचीन मकबरे को मंदिर मानकर पूजा-अर्चना करने पहुंचे हिंद

Malvika
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2025-08-12
Fatehpur UP news: फतेहपुर में ‘मंदिर-मकबरा' विवाद पर बवाल, बैरिकेडिंग तोड़कर तोड़फोड़ और भगवा झंडा फहराने के बाद तनाव
Fatehpur UP news: फतेहपुर में ‘मंदिर-मकबरा' विवाद पर बवाल, बैरिकेडिंग तोड़कर तोड़फोड़ और भगवा झंडा फहराने के बाद तनाव

Fatehpur UP news: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सोमवार को उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब एक प्राचीन मकबरे को मंदिर मानकर पूजा-अर्चना करने पहुंचे हिंदू संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता सुरक्षा बैरिकेडिंग तोड़ते हुए परिसर के अंदर घुस गए। आरोप है कि भीड़ ने मकबरे के अंदर बनी मजारों पर तोड़फोड़ की और मकबरे के गुंबद पर भगवा झंडा फहरा दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव फैल गया है। हालांकि, प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए रातभर में क्षतिग्रस्त मजारों और दरवाजे की मरम्मत करवा दी है और इलाके को एक किले में तब्दील कर दिया गया है।

क्या है विवाद की जड़ और कैसे हुई घटना?

विवाद की शुरुआत सोमवार सुबह हुई, जब हिंदू महासभा के प्रांत उपाध्यक्ष मनोज त्रिवेदी, भाजपा के जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल और अन्य हिंदूवादी संगठनों के लगभग 300 कार्यकर्ता अबू नगर स्थित विवादित मकबरे की ओर कूच कर गए। इससे पहले, भाजपा नेताओं ने प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपकर जन्माष्टमी के अवसर पर इस स्थल, जिसे वे ‘ठाकुरद्वारा मंदिर’ कहते हैं, में साफ-सफाई और पूजा करने की अनुमति मांगी थी। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह स्थल ऐतिहासिक रूप से ठाकुर विराजमान का मंदिर था, लेकिन बाद में मुस्लिम पक्ष ने साजिश के तहत सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर इसे मकबरे के रूप में दर्ज करवा दिया।

प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इलाके में भारी बैरिकेडिंग लगाकर भीड़ को रोकने की कोशिश की, लेकिन मौके पर पुलिस बल की संख्या कम होने के कारण आक्रोशित भीड़ ने बैरिकेडिंग और घेराबंदी को तोड़ दिया। परिसर के अंदर घुसते ही भीड़ ने जोरदार धार्मिक नारे लगाए, वहां मौजूद दो मजारों को लाठी-डंडों से क्षतिग्रस्त कर दिया और मकबरे के ऊपरी हिस्से पर एक बड़ा भगवा झंडा लगा दिया। एक पुरानी मजार में भी तोड़फोड़ कर उस पर झंडा फहराया गया।

रातों-रात छावनी में बदला इलाका

तोड़फोड़ की घटना के तुरंत बाद, प्रशासन हरकत में आया और रातभर में पूरे परिसर की मरम्मत करवाई। सुरक्षा के लिहाज से एक अभेद्य त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया है:

  • मकबरे के चारों ओर बने चबूतरे पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
  • बाहर दोहरी बैरिकेडिंग लगाकर पुलिस और पीएसी के जवानों को मुस्तैद किया गया है।
  • ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से इलाके की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।

इसके अलावा, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, कौशांबी और प्रतापगढ़ जैसे पड़ोसी जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर तैनात किया गया है। डीजीपी के आदेश पर एडीजी जोन प्रयागराज, संजीव गुप्ता और आईजी रेंज प्रयागराज, अजय मिश्रा भी मौके पर पहुंच चुके हैं।

BJP नेताओं समेत 150 पर FIR

इस मामले में थाना कोतवाली नगर के सब इंस्पेक्टर विनीत कुमार उपाध्याय की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया है। 10 लोगों को नामजद करते हुए और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ दंगा भड़काने, धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

नामजद आरोपियों में शामिल हैं:

  • भाजपा जिला महामंत्री पुष्पराज पटेल
  • भाजपा युवा मोर्चा जिला महामंत्री प्रसून तिवारी
  • बजरंग दल जिला सह संयोजक धर्मेंद्र सिंह
  • सभासद विनय तिवारी
  • अभिषेक शुक्ला, आशीष त्रिवेदी, पप्पू सिंह चौहान, ऋतिक पाल, अजय सिंह उर्फ रिंकू लोहारी, और देवनाथ धाकड़े।

एसपी फतेहपुर अनूप सिंह ने कहा, “अभी मामले की जांच जारी है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं।”

राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज

इस मुद्दे को कानपुर छावनी से विधायक मोहम्मद हसन ‘रूमी’ ने विधानसभा में नियम 56 के तहत उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि नवाब अब्दुल समद का मकबरा सरकारी रिकॉर्ड (गाटा संख्या 753) में एक राष्ट्रीय संपत्ति है, लेकिन हिंदू संगठन जानबूझकर इसे मंदिर बताकर तनाव फैला रहे हैं। उन्होंने सम्भल की शाही जामा मस्जिद विवाद का हवाला देते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए।

वहीं, भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने इस घटना को ‘सनातन धर्मियों का जनाक्रोश’ करार दिया। उनका कहना है, “हम सिर्फ अपने ठाकुरद्वारा में पूजा करने गए थे। कुछ साल पहले तक हमारी हिंदू बस्ती के लोग यहां पूजा करते थे, लेकिन मुस्लिम पक्ष ने दस्तावेजों में हेरफेर करवा दिया। प्रशासन ने हमें हमारे धार्मिक अधिकार से रोका।”

दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे

  • हिंदू पक्ष: उनका दावा है कि यह स्थल ठाकुर विराजमान का प्राचीन मंदिर था, जहां नियमित पूजा होती थी, जिसे बाद में दस्तावेजों में बदलकर मकबरा कर दिया गया।
  • मुस्लिम पक्ष: उनका कहना है कि यह नवाब अब्दुल समद का मकबरा है, जो एक राष्ट्रीय संपत्ति है। मंदिर का दावा पूरी तरह से निराधार और ऐतिहासिक रूप से गलत है।

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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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