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Flag Code of India: घर पर तिरंगा फहराने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, एक गलती पड़ सकती है भारी

Flag Code of India: हर साल 15 अगस्त को पूरा भारत गर्व और देशभक्ति के جذبے से सराबोर हो जाता है. यह वह दिन है जब हम अपनी स्वतंत्रता का जश्न मनाते हैं. इस राष्ट्र

Chetan
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2025-08-07
Flag Code of India: घर पर तिरंगा फहराने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, एक गलती पड़ सकती है भारी
Flag Code of India: घर पर तिरंगा फहराने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, एक गलती पड़ सकती है भारी

Flag Code of India: हर साल 15 अगस्त को पूरा भारत गर्व और देशभक्ति के جذبے से सराबोर हो जाता है. यह वह दिन है जब हम अपनी स्वतंत्रता का जश्न मनाते हैं. इस राष्ट्रीय उत्सव का सबसे महत्वपूर्ण और मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय ध्वज (National Flag), यानी हमारे प्यारे तिरंगे का ध्वजारोहण (Flag Hoisting) है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘ध्वजारोहण’ का सही अर्थ क्या है और यह ‘झंडा फहराने’ से कैसे अलग है? आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर इससे जुड़े हर महत्वपूर्ण नियम को जानें.

क्या है ध्वजारोहण (Hoisting) और झंडा फहराने (Unfurling) में अंतर?

यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब अक्सर लोगों को पता नहीं होता. दोनों क्रियाओं में एक गहरा प्रतीकात्मक अंतर है.

  • ध्वजारोहण (Hoisting) – 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस:
    परंपरा के अनुसार, भारत के प्रधानमंत्री दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर ध्वजारोहण करते हैं, जबकि राज्यों की राजधानियों में मुख्यमंत्री यह सम्मान पूरा करते हैं. स्वतंत्रता दिवस पर, राष्ट्रीय ध्वज को flagpole (ध्वजस्तंभ) के नीचे से रस्सी के सहारे खींचकर ऊपर ले जाया जाता है और फिर फहराया जाता है. यह ऊपर की ओर की गति 1947 में औपनिवेशिक शासन पर भारत की विजय और एक नए, स्वतंत्र राष्ट्र के उदय का प्रतीक है. इसे ‘ध्वजारोहण’ कहते हैं.
  • झंडा फहराना/खोलना (Unfurling) – 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस:
    इसके विपरीत, गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर राष्ट्रपति द्वारा ध्वज को फहराया जाता है. इस प्रक्रिया में, तिरंगा पहले से ही ध्वजस्तंभ के शीर्ष पर बंधा होता है और इसे केवल खोलकर नीचे की ओर फहराया जाता है. यह उस दिन का प्रतीक है जब 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ और भारत एक संपूर्ण गणराज्य बना. उस दिन देश का अपना संविधान पहले से ही स्थापित था.

क्या आप अपने घर पर तिरंगा फहरा सकते हैं?

जी हाँ, बिलकुल! ‘भारत का ध्वज संहिता’ (Flag Code of India) के पैराग्राफ 2.2 के अनुसार, कोई भी भारतीय नागरिक, निजी संगठन या शैक्षणिक संस्थान अपने घर या कार्यालय में पूरे सम्मान के साथ तिरंगे को फहरा या प्रदर्शित कर सकता है.

पहले, तिरंगे को केवल दिन के समय (सूर्योदय से सूर्यास्त तक) फहराने की अनुमति थी. लेकिन, 20 जुलाई 2022 को हुए एक महत्वपूर्ण संशोधन के बाद, अब तिरंगे को दिन और रात, दोनों समय फहराया जा सकता है, बशर्ते कि उसे पूरे सम्मान और उचित प्रकाश व्यवस्था के साथ प्रदर्शित किया जाए.

तिरंगा फहराते समय क्या बातें हमेशा याद रखें?

  1. केसरिया रंग सबसे ऊपर: जब भी तिरंगा फहराया जाए, तो हमेशा केसरिया रंग की पट्टी सबसे ऊपर होनी चाहिए.
  2. सही आकार: झंडा हमेशा आयताकार (rectangular) होना चाहिए, जिसकी लंबाई और ऊंचाई का अनुपात 3:2 हो.
  3. कपड़े की शुद्धता: झंडा कपास, पॉलिएस्टर, ऊन, रेशम या खादी (हाथ से या मशीन से बना) का ही होना चाहिए.

तिरंगे का अपमान न हो, भूलकर भी न करें ये गलतियाँ

  • कभी भी क्षतिग्रस्त, गंदा या फटा हुआ झंडा न फहराएं.
  • तिरंगे को कभी भी जमीन, फर्श या पानी को छूने न दें. यह उसका अपमान माना जाता है.
  • झंडे को कभी भी उल्टा (केसरिया रंग नीचे) प्रदर्शित न करें.
  • तिरंगे का उपयोग सजावट, पहनने वाले कपड़ों या किसी एक्सेसरी के रूप में न करें.
  • झंडे को तकिये, नैपकिन या अंडरगारमेंट्स पर नहीं लगाना चाहिए.
  • इसे किसी वक्ता के मंच या मेज को ढकने के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
  • एक ही ध्वजस्तंभ पर राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर या बगल में कोई अन्य झंडा न लगाएं.
  • झंडे या ध्वजस्तंभ पर फूल, माला या कोई प्रतीक चिन्ह न रखें.

ये सभी नियम भारत की ध्वज संहिता, 2002 (भाग II) में स्पष्ट रूप से उल्लिखित हैं.

क्या है भारत की ध्वज संहिता (Flag Code of India)?

भारत की ध्वज संहिता, 2002, एक व्यापक गाइडलाइन है जो 26 जनवरी 2002 को लागू हुई. यह राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन और सम्मान से संबंधित सभी नियमों, प्रथाओं और कानूनों को एक साथ लाती है.

इसे तीन भागों में बांटा गया है:

  • भाग I: ध्वज का सामान्य विवरण.
  • भाग II: नागरिकों, स्कूलों और निजी संगठनों के लिए नियम.
  • भाग III: सरकार और आधिकारिक निकायों के लिए नियम.

दिसंबर 2021 में, कोड को संशोधित किया गया था ताकि मशीन से बने पॉलिएस्टर और अन्य सामग्रियों से बने झंडों के उपयोग की भी अनुमति दी जा सके. इससे पहले, केवल हाथ से बुनी गई खादी को ही अनुमति थी.


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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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