Gorakhpur Development : उत्तर प्रदेश का गोरखपुर अब सिर्फ एक ऐतिहासिक शहर ही नहीं, बल्कि भविष्य के एक अत्याधुनिक और सुनियोजित महानगर के रूप में अपनी नई पहचान गढ़ने को तैयार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद में, गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) ने एक ऐसी महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव रखी है जो पूरे पूर्वांचल के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। लगभग 6,000 एकड़ के विशाल भूभाग पर ‘नया गोरखपुर’ बसाने की यह योजना अब धरातल पर उतरने लगी है, जिससे लाखों लोगों के लिए विकास और समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे।
यह विशाल टाउनशिप, जो शहर की बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है, गोरखपुर के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी। इस परियोजना के लिए जीडीए जोनल प्लान तैयार करने की प्रक्रिया में है और भूमि अधिग्रहण का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
25 गांवों की ज़मीन पर आकार लेगा सपनों का शहर
इस भव्य परियोजना को साकार करने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण 25 चयनित गांवों के राजस्व ग्रामों से भूमि का अधिग्रहण कर रहा है। इन गांवों में गोपालपुर, देवीपुर, रामपुर, बिशनपुर, ठाकुरपुर, बैजनाथपुर, परमेश्वरपुर, सोनबरसा, और मनीराम जैसे कई गांव शामिल हैं। प्राधिकरण किसानों के साथ आपसी समझौते के माध्यम से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को प्राथमिकता दे रहा है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विकास की इस यात्रा में वे भी बराबर के भागीदार बनें। जहाँ आवश्यक हो, वहाँ अनिवार्य अधिग्रहण का भी प्रावधान रखा गया है।
प्रथम चरण की शुरुआत और ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल
परियोजना का पहला चरण मनीराम और बालापार गांवों से शुरू हो चुका है, जहाँ किसानों के साथ समझौते के आधार पर ज़मीन की खरीद प्रक्रिया जारी है। इस पूरी प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। ड्रोन तकनीक की मदद से अधिग्रहित भूमि का सटीक और विस्तृत प्लान तैयार किया जा रहा है, जिससे योजना को सटीकता और पारदर्शिता के साथ लागू किया जा सके। जैसे-जैसे भूमि बैंक का आकार बढ़ेगा, ज़ोनल प्लान का भी उसी अनुपात में विस्तार किया जाएगा।
विशेषज्ञों की देखरेख में बनेगा ज़ोनल प्लान
‘नया गोरखपुर’ का ज़ोनल प्लान बनाने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसमें समाज के हर वर्ग और विशेषज्ञता का ध्यान रखा गया है। इस कमेटी में दो समाजशास्त्री, दो अर्थशास्त्री, दो ग्राम प्रधान और एक तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे। ज़ोनल प्लान तैयार करने वाली एजेंसी अपनी विस्तृत प्रस्तुति इस कमेटी के समक्ष रखेगी। कमेटी की स्वीकृति के बाद ही प्लान को अंतिम मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 60 दिनों का समय लगने का अनुमान है। इस दौरान प्राप्त होने वाली किसी भी आपत्ति का उचित समाधान किया जाएगा और फिर मुआवज़े का वितरण किया जाएगा।
3,000 करोड़ का बजट और विकास की तेज़ रफ़्तार
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) के उपाध्यक्ष, आनंद वर्धन के अनुसार, ‘नया गोरखपुर’ बसाने के लिए 6,000 एकड़ भूमि के अधिग्रहण पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। योजना के पहले चरण में मनीराम और बालापार गांवों में भूमि अधिग्रहण का काम तेज़ी से चल रहा है, और ड्रोन की मदद से इसका ज़ोनल प्लान तैयार किया जा रहा है। शासन ने भूमि अधिग्रहण के लिए 3 हजार करोड़ के बजट को मंजूरी देते हुए 400 करोड़ रुपये की पहली किश्त भी जारी कर दी है।
यह योजना जल्द ही अपना अंतिम रूप ले लेगी, जिसके बाद इसे शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। यह कदम न केवल गोरखपुर के शहरीकरण को एक नई दिशा देगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक विकास की एक नई लहर भी लाएगा। ‘नया गोरखपुर’ सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक बेहतर कल का वादा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए अनगिनत अवसर लेकर आएगा।
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