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Gorakhpur Shamli Expressway: उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा 700 किमी का गोरखपुर-शामली ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे

Gorakhpur Shamli Expressway: उत्तर प्रदेश, जो पहले से ही भारत में सबसे ज़्यादा एक्सप्रेसवे होने का गौरव रखता है, अब एक और मील का पत्थर स्थापित करने की तैयारी मे

Priyanshi
Priyanshi
2025-08-11
Gorakhpur Shamli Expressway: उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा 700 किमी का गोरखपुर-शामली ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे
Gorakhpur Shamli Expressway: उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा 700 किमी का गोरखपुर-शामली ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे

Gorakhpur Shamli Expressway: उत्तर प्रदेश, जो पहले से ही भारत में सबसे ज़्यादा एक्सप्रेसवे होने का गौरव रखता है, अब एक और मील का पत्थर स्थापित करने की तैयारी में है. प्रदेश सरकार एक नए और अब तक के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे के निर्माण की योजना बना रही है, जो लगभग 700 किलोमीटर लंबा होगा. यह विशाल परियोजना पूरी तरह से एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित की जाएगी, जिसका अर्थ है कि इसका निर्माण नई भूमि पर किया जाएगा. यह एक्सप्रेसवे 6 लेन का होगा, जो भविष्य में विस्तार की संभावनाओं को भी खुला रखेगा. इस नए एक्सप्रेसवे के बनने से राज्य का मौजूदा सबसे लंबा एक्सप्रेसवे, 570 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे, पीछे छूट जाएगा. यह महामार्ग प्रदेश के 22 जिलों को जोड़ेगा, जिससे न केवल लाखों लोगों को फायदा होगा, बल्कि किसानों की भूमि के मूल्य में भी वृद्धि होने की उम्मीद है.

पूरब से पश्चिम का नया गलियारा: गोरखपुर से शामली तक का सफर होगा आसान

यह प्रस्तावित 700 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश को सीधे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ेगा, जो गोरखपुर से शुरू होकर शामली तक जाएगा. यह प्रदेश का पूरब से पश्चिम को जोड़ने वाला दूसरा बड़ा एक्सप्रेसवे होगा. गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे (Gorakhpur-Shamli Expressway) के निर्माण से पूर्वी उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों जैसे मसूरी, देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश तक की यात्रा अत्यंत सुगम हो जाएगी. वर्तमान में इन स्थानों तक पहुंचने में 12 घंटे से भी अधिक का समय लगता है, लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह दूरी महज़ 6 घंटे में पूरी की जा सकेगी, जिससे समय और ईंधन दोनों की भारी बचत होगी.

37 तहसीलों की बदलेगी तस्वीर, ज़मीनों के दाम आसमान पर

गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 22 जिलों और 37 तहसीलों से होकर गुज़रेगा, जिससे इन क्षेत्रों में विकास की एक नई लहर आएगी. एक्सप्रेसवे के निर्माण के साथ ही इन जिलों की ज़मीनों की कीमतों में उछाल आना तय है. यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह से ग्रीनफील्ड तकनीक पर आधारित होगा, जिसका एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसकी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा. इस नए एक्सप्रेसवे से न सिर्फ़ यात्रा का समय घटेगा, बल्कि गोरखपुर से शामली के बीच की दूरी भी लगभग 200 किलोमीटर कम हो जाएगी.

पिछड़े जिलों के लिए वरदान साबित होगा यह एक्सप्रेसवे

यह नया एक्सप्रेसवे प्रदेश के कई ऐसे जिलों से होकर गुज़रेगा जो अब तक विकास की मुख्यधारा से कुछ हद तक कटे हुए थे. इसमें गोरखपुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थ नगर, बलरामपुर, बहराइच, सीतापुर, लखनऊ, हरदोई, शाहजहांपुर, बदायूं, रामपुर, मुरादाबाद, बरेली, संभल, बिजनौर, अमरोहा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली जैसे 22 जिले शामिल हैं. इन सभी जिलों में एक्सप्रेसवे के निर्माण से न केवल ज़मीनों के दाम बढ़ेंगे, बल्कि रोज़गार के अनगिनत नए अवसर भी पैदा होंगे. इसके तैयार हो जाने पर गोरखपुर से हरिद्वार का सफर महज़ 8 घंटे में पूरा किया जा सकेगा, जो एक बड़ी उपलब्धि होगी.

कितनी होगी लागत और क्या है तैयारी?

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने में जुटा है. इस एक्सप्रेसवे का मुख्य उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों को उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों से जोड़कर एक नया आर्थिक गलियारा बनाना है. अनुमान है कि इस विशाल परियोजना पर लगभग 35 हज़ार करोड़ रुपये की लागत आएगी. इस एक्सप्रेसवे के लिए सर्वेक्षण का कार्य भी पूरा किया जा चुका है. इसके बनने से 22 जिलों में औद्योगिक गतिविधियों में भी तेज़ी आने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक नई गति मिलेगी. यह एक्सप्रेसवे न केवल एक सड़क होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश की प्रगति का एक नया राजमार्ग साबित होगा.

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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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