Hathras new city: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले को एक नई पहचान देने के लिए एक विशाल और महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है। यीडा, हाथरस में लगभग 950 एकड़ के विशाल भू-भाग पर एक अत्याधुनिक नया शहर विकसित करने जा रहा है, जिसके लिए मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। इस मेगा प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य हाथरस क्षेत्र में आवासीय, औद्योगिक, वाणिज्यिक गतिविधियों और पर्यटन को एक साथ बढ़ावा देकर एक एकीकृत विकास मॉडल प्रस्तुत करना है। यीडा ने अलीगढ़ के टप्पल और हाथरस क्षेत्र (Tappal and Hathras area) को मिलाकर यह मास्टर प्लान बनाया है, जिसे सुनियोजित तरीके से दो चरणों में पूरा किया जाएगा।
मास्टर प्लान से तय होगी विकास की दिशा
यीडा (YEIDA) ने हाथरस के लिए मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया को गति दे दी है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए जल्द ही एक विशेषज्ञ एजेंसी का चयन किया जाएगा, जो हाथरस की भौगोलिक स्थिति, भूमि की उपलब्धता, और भविष्य की संभावनाओं का गहन सर्वेक्षण करेगी। यीडा के सीईओ, श्री अरुणवीर सिंह के अनुसार, जैसे ही यह विस्तृत मास्टर प्लान (master plan) तैयार होकर अंतिम रूप ले लेगा, प्राधिकरण वहां भूमि अधिग्रहण (land acquisition) की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाएगा।
यह जानना महत्वपूर्ण है कि यीडa क्षेत्र में कुल छह जनपद आते हैं, जिनमें हाथरस के 358 गांव भी शामिल हैं। प्राधिकरण के रीजनल मास्टर प्लान को हाल ही में शासन से मंजूरी मिली थी, जिसके बाद यीडा ने विशेष रूप से हाथरस के लिए एक अलग मास्टर प्लान तैयार करने का निर्णय लिया है। इससे पहले प्राधिकरण मथुरा, अलीगढ़ और आगरा के लिए सफलतापूर्वक मास्टर प्लान तैयार कर चुका है।
औद्योगिक और आवासीय टाउनशिप का होगा विकास
यीडा की योजना केवल हाथरस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के समग्र विकास पर केंद्रित है। अलीगढ़ में एक विशाल लॉजिस्टिक पार्क (logistic park) और एक आधुनिक अर्बन सेंटर (urban centre) बनाने की योजना है, जबकि मथुरा में एक भव्य हैरिटेज सिटी (heritage city) बसाई जाएगी। इसी कड़ी में, जनपद हाथरस की सदर, सादाबाद और सासनी तहसीलों के चयनित गांवों में भूमि अधिग्रहण के लिए धारा 80 और 143 की अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है। इन गांवों की भूमि पर एक विश्व स्तरीय औद्योगिक और आवासीय टाउनशिप (industrial and residential township) विकसित की जाएगी, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और लोगों को बेहतर जीवन स्तर मिलेगा।
जनसुनवाई के बाद 65 गांवों को किया गया था बाहर
प्रारंभ में, इस विकास योजना में हाथरस के 422 गांव शामिल थे। हालांकि, 2022 में, 65 गांवों के निवासियों ने तत्कालीन जिलाधिकारी अर्चना वर्मा से मुलाकात कर अपनी चिंता व्यक्त की थी। ग्रामीणों का कहना था कि इस योजना में शामिल होने से उनके गांवों का पारंपरिक विकास और सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो सकता है। उनकी चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए और जनभावना का सम्मान करते हुए, जिलाधिकारी (DM) ने इन 65 गांवों को योजना की सूची से हटाने का निर्देश दिया था। इस निर्णय के बाद, अब इस विकास योजना में कुल 358 गांव शामिल हैं, जहां भविष्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी। यह कदम दर्शाता है कि प्राधिकरण विकास के साथ-साथ स्थानीय निवासियों की सहमति को भी प्राथमिकता दे रहा है।
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