Tech

"हमारी कंपनियों को छुआ तो भरेंगे टैक्स!" ट्रम्प का दुनिया को अल्टीमेटम, गूगल-एप्पल पर टैक्स लगाने वालों की खैर नहीं

अमेरिकी राजनीति में व्यापार और अर्थव्यवस्था को लेकर एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी के संभावित राष्ट्रपति पद के उम्मी

Aman Rathore
Aman Rathore
2026-06-27
"हमारी कंपनियों को छुआ तो भरेंगे टैक्स!" ट्रम्प का दुनिया को अल्टीमेटम, गूगल-एप्पल पर टैक्स लगाने वालों की खैर नहीं
"हमारी कंपनियों को छुआ तो भरेंगे टैक्स!" ट्रम्प का दुनिया को अल्टीमेटम, गूगल-एप्पल पर टैक्स लगाने वालों की खैर नहीं

अमेरिकी राजनीति में व्यापार और अर्थव्यवस्था को लेकर एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी के संभावित राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने उन विदेशी देशों पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की खुली चेतावनी दी है, जो गूगल (Google), एप्पल (Apple), मेटा (Meta) और अमेज़न (Amazon) जैसी दिग्गज अमेरिकी तकनीकी कंपनियों पर विशेष टैक्स लगाते हैं। ट्रम्प ने इस तरह के ‘डिजिटल सेवा कर’ (Digital Services Taxes – DST) को अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ एक अनुचित व्यापार बाधा करार दिया है।

डेट्रॉइट की चुनावी सभा में ट्रम्प ने क्या कहा?

डेट्रॉइट में आयोजित एक चुनावी अभियान के दौरान अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मुद्दे पर अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कई विदेशी सरकारें अपनी कंपनियों को बचाने के लिए हमारी बेहद सफल तकनीकी कंपनियों को निशाना बना रही हैं।

ट्रम्प ने सीधा संदेश देते हुए कहा, “यदि वे हमारी टेक कंपनियों पर टैक्स लगाएंगे, तो हम उनके उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाएंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी कंपनियों के हितों की रक्षा करना उनकी प्राथमिकता है और वे किसी भी विदेशी सरकार को अमेरिकी तकनीकी दिग्गजों पर मनमाने ढंग से टैक्स वसूलने की अनुमति नहीं देंगे।

क्या है डिजिटल सर्विसेज टैक्स (DST) का पूरा विवाद?

हाल के वर्षों में फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन जैसे कई यूरोपीय देशों ने डिजिटल सर्विसेज टैक्स (DST) की शुरुआत की है या ऐसा करने का प्रस्ताव रखा है। इन देशों का तर्क है कि गूगल, फेसबुक और अमेज़न जैसी अमेरिकी टेक कंपनियां उनके देश में लाखों उपभोक्ताओं और बड़े यूजर बेस के जरिए भारी राजस्व (Revenues) अर्जित करती हैं, लेकिन वे टैक्स का भुगतान स्थानीय स्तर पर करने के बजाय आयरलैंड जैसे कम टैक्स वाले देशों (Low-tax jurisdictions) में करती हैं।

इन देशों का मानना है कि टेक दिग्गजों को उसी देश में टैक्स देना चाहिए जहां वे राजस्व उत्पन्न करते हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी तकनीकी फर्मों का तर्क है कि ये डिजिटल सेवा कर पूरी तरह से भेदभावपूर्ण हैं क्योंकि इन्हें विशेष रूप से केवल बड़ी अमेरिकी कंपनियों को लक्षित करने के लिए डिजाइन किया गया है।

वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका और ओईसीडी की वार्ता

विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रम्प की इस एकतरफा टैरिफ लगाने की धमकी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक व्यापार युद्ध (Trade War) छिड़ सकता है। यदि अमेरिका यूरोपीय देशों से आने वाले उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाता है, तो इसके जवाब में वे देश भी अमेरिकी सामानों पर टैक्स बढ़ा सकते हैं। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) प्रभावित होगी और अंततः उत्पादों की कीमतें बढ़ने से आम उपभोक्ताओं पर ही वित्तीय बोझ पड़ेगा।

इस विवाद को सुलझाने के लिए आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के तत्वावधान में वैश्विक स्तर पर बातचीत चल रही है। ओईसीडी का उद्देश्य एक ऐसा ‘वैश्विक कॉर्पोरेट न्यूनतम कर’ (Global Corporate Minimum Tax) और एकीकृत ढांचा तैयार करना है जो विभिन्न देशों द्वारा लगाए जा रहे इन एकतरफा डिजिटल करों का स्थान ले सके। हालांकि, इस वैश्विक संधि पर आम सहमति बनाने की प्रक्रिया बेहद धीमी रही है, जिसके कारण ट्रम्प जैसे नेताओं को कड़ा रुख अपनाने का मौका मिल रहा है।

Enjoying this post?

Subscribe to Bolbindas to get deep dives like this delivered directly to your inbox .

Aman Rathore

Aman Rathore

Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

More from Bolbindas

No other posts found.