Income Tax Bill: भारत के टैक्स सिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। मंगलवार, 12 अगस्त 2025 को संसद ने एक नए आयकर विधेयक को पारित कर दिया, जो छह दशक पुराने, जटिल और उलझे हुए आयकर अधिनियम, 1961 (Income Tax Act, 1961) की जगह लेगा। यह नया कानून 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने राज्यसभा में नए आयकर विधेयक, 2025 को पेश करते हुए स्पष्ट किया कि इस कानून से टैक्स की दरों में कोई नया बदलाव नहीं किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य केवल भाषा को सरल बनाना है, जो जटिल आयकर कानूनों को समझने के लिए बेहद आवश्यक था।
क्यों बदला गया 65 साल पुराना कानून? 5 बड़े बदलाव
यह बदलाव सिर्फ सतही नहीं है, बल्कि यह टैक्स प्रशासन के प्रति एक नए और सरल दृष्टिकोण को दर्शाता है। आइए जानते हैं इस नए कानून की 5 सबसे बड़ी और खास बातें जो हर टैक्सपेयर को जाननी चाहिए:
1. कोई नया टैक्स नहीं, बोझ नहीं बढ़ेगा:
वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्पष्ट निर्देशों का हवाला देते हुए कहा, “कोविड हो या न हो, लोगों पर टैक्स का बोझ नहीं बढ़ना चाहिए। हमने कोई नया टैक्स नहीं बढ़ाया है।” यह आम आदमी के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर है कि इस बदलाव से उनकी जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
2. भाषा हुई बेहद आसान (आधी से भी कम):
1961 के पुराने कानून की सबसे बड़ी समस्या उसकी जटिल और पुरातन भाषा थी। नए बिल में इस समस्या को जड़ से खत्म कर दिया गया है।
- सेक्शन घटे: पुराने कानून में 819 सेक्शन थे, जिन्हें अब घटाकर 536 कर दिया गया है।
- चैप्टर हुए कम: 47 चैप्टर की जगह अब केवल 23 चैप्टर होंगे।
- शब्दों में भारी कमी: पुराने कानून के 5.12 लाख शब्दों को घटाकर नए बिल में 2.6 लाख शब्द कर दिए गए हैं।
3. पहली बार टेबल और फॉर्मूले का इस्तेमाल:
कानून को समझने में स्पष्टता लाने के लिए, इतिहास में पहली बार, नए आयकर बिल में 39 नई टेबल और 40 नए फॉर्मूले पेश किए गए हैं। ये टेबल और फॉर्मूले 1961 के कानून के घने और उलझे हुए टेक्स्ट की जगह लेंगे, जिससे आम करदाता और पेशेवर दोनों के लिए गणना और नियमों को समझना आसान हो जाएगा।
4. रिकॉर्ड समय में हुआ तैयार:
इस विशाल और ऐतिहासिक बिल को महज 6 महीने के रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि आयकर विभाग के समर्पित अधिकारियों की एक टीम ने अथक परिश्रम करते हुए लगभग 75,000 मानव-घंटे (person-hours) लगाकर इसे अंतिम रूप दिया है।
5. विपक्ष की गैरमौजूदगी में पास हुआ बिल:
एक तरफ जहां सरकार इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष इस महत्वपूर्ण बहस के दौरान सदन में मौजूद नहीं था। वित्त मंत्री ने इस पर आश्चर्य और निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “मैं हैरान हूं कि विपक्ष इसमें हिस्सा नहीं लेना चाहता। विपक्ष अक्सर कहता है कि आप चर्चा नहीं करना चाहते, हम चर्चा चाहते हैं। हमने लोकसभा में 16 घंटे और यहां (राज्यसभा में) 16 घंटे की चर्चा के लिए सहमति दी थी… आज वे कहां हैं?” बता दें कि विपक्ष बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर चर्चा की मांग को लेकर राज्यसभा से वॉकआउट कर गया था।
आम टैक्सपेयर के लिए इसका क्या मतलब है?
यह नया करदाता-अनुकूल आयकर अधिनियम 2025, देश की वित्तीय प्रणाली के लिए एक मील का पत्थर है।
- समझने में आसानी: अब कानून को पढ़ना, समझना और लागू करना आसान होगा।
- सिस्टम होगा रीबूट: चूंकि नया कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, इसलिए आयकर विभाग के कंप्यूटर सिस्टम को नए कानून को संचालित करने के लिए पूरी तरह से रीबूट और अपग्रेड करने की आवश्यकता होगी।
- जल्द जारी होंगे FAQs: वित्त मंत्रालय जल्द ही नए कानून पर अधिक जानकारी के लिए अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) और एक सूचना ज्ञापन जारी करेगा।
इसके साथ ही, राज्यसभा ने कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 को भी ध्वनि मत से पारित कर दिया, जिसमें आयकर खोज मामलों के संबंध में ब्लॉक असेसमेंट की योजना में बदलाव और सऊदी अरब के सार्वजनिक निवेश कोष को कुछ प्रत्यक्ष कर लाभ प्रदान करने का प्रावधान है।
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