Independence Day songs : संगीत में वो ताकत होती है जो सीधे दिलों को छू जाती है, और जब यही संगीत देशभक्ति के सुरों में ढल जाता है, तो यह हर हिंदुस्तानी के रगों में जुनून बनकर दौड़ने लगता है। स्वतंत्रता दिवस का जश्न हो या गणतंत्र दिवस का पर्व, कुछ गीत ऐसे हैं जो दशकों से हमारी राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बने हुए हैं। ये सिर्फ गाने नहीं, बल्कि वो भावनाएं हैं जो हमें हमारी जड़ों, हमारे बलिदानों और हमारे देश की मिट्टी की महक से जोड़ती हैं।
पेश हैं ऐसे ही कुछ अमर देशभक्ति गीत और उनके पूरे बोल, जो आज भी हर भारतीय की आँखों में सम्मान और दिल में गर्व भर देते हैं।
1. मेरा रंग दे बसंती चोला
शहीद-ए-आजम भगत सिंह और उनके साथियों के बलिदान और देश के लिए मर मिटने के जज्बे को समर्पित यह गीत क्रांति का तराना है। ‘बसंती चोला’ सिर्फ एक रंग नहीं, बल्कि त्याग और कुर्बानी का प्रतीक है।
मेरा रंग दे बसंती चोला,
मेरा रंग दे बसंती चोला..
मेरा रंग दे..
मेरा रंग दे बसंती चोला माये रंग दे,
मेरा रंग दे बसंती चोला माये रंग दे।
मेरा रंग दे बसंती चोला रंग दे, रंग दे..
रंग दे बसंती चोला माये रंग दे।
निकले हैं वीर जियाले, यूं अपना सीना ताने,
हंस-हंस के जान लुटाने, आजाद सवेरा लाने।
मर के कैसे जीते हैं, इस दुनिया को बतलाने,
तेरे लाल चलें हैं माये, अब तेरी लाज बचाने।
आजादी का शोला बन के खून रगों में डोला..
मेरा रंग दे बसंती चोला माये रंग दे..
दिन आज तो बड़ा सुहाना, मौसम भी बड़ा सुनहरा,
हम सर पे बांध के आए, बलिदानों का ये सेहरा।
बेताब हमारे दिल में इक मस्ती सी छाई है,
ऐ देश अलविदा तुझको कहने की घड़ी आई है।
महकेंगे तेरी फिजा में हम बन के हवा का झोंका,
किस्मत वालों को मिलता ऐसे मरने का मौका।
निकली है बारात सजा है इंकलाब का डोला..
मेरा रंग दे बसंती चोला माये रंग दे..
2. मेरे देश की धरती सोना उगले
फिल्म ‘उपकार’ का यह गीत भारत की कृषि प्रधान संस्कृति और धरती माँ के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह गीत उस मिट्टी का गुणगान करता है जो हमें जीवन देती है और जो वीरों को जन्म देती है।
मेरे देश की धरती.. सोना उगले, उगले हीरे मोती,
मेरे देश की धरती।
बैलों के गले में जब घुंघरू, जीवन का राग सुनाते हैं,
गम कोसों दूर हो जाता है, खुशियों के कंवल मुसकाते हैं।
सुन के राहत की आवाजें, यूं लगे कहीं शहनाई बजे,
आते ही मस्त बहारों के, दुल्हन की तरह हर खेत सजे।
मेरे देश की धरती सोना उगले..
जब चलते हैं इस धरती पे हल, ममता अंगड़ाइयां लेती है,
क्यों ना पूजे इस माटी को, जो जीवन का सुख देती है।
इस धरती पे जिसने जन्म लिया, उसने ही पाया प्यार तेरा,
यहां अपना पराया कोइ नहीं, है सब पे मां, उपकार तेरा।
मेरे देश की धरती सोना उगले..
ये बाग है गौतम नानक का, खिलते हैं अमन के फूल यहां,
गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक, ऐसे हैं चमन के फूल यहां।
रंग हरा हरी सिंह नलवे से, रंग लाल है लाल बहादूर से,
रंग बना बसन्ती भगत सिंह, रंग अमन का वीर जवाहर से।
मेरे देश की धरती सोना उगले..
3. हर करम अपना करेंगे (ऐ वतन तेरे लिए)
फिल्म ‘कर्मा’ का यह गाना देश के लिए सब कुछ न्योछावर कर देने के वादे और संकल्प को दर्शाता है। यह गीत बताता है कि देश ही हमारा कर्म है और देश ही हमारा धर्म।
मेरा कर्मा तू, मेरा धर्मा तू,
तेरा सब कुछ मैं, मेरा सब कुछ तू।
हर करम अपना करेंगे, ऐ वतन तेरे लिए,
दिल दिया है, जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए।
तू मेरा कर्मा, तू मेरा धर्मा, तू मेरा अभिमान है,
ऐ वतन महबूब मेरे, तुझपे दिल कुर्बान है।
हम जिएंगे और मरेंगे, ऐ वतन तेरे लिए,
दिल दिया है, जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, हमवतन, हमनाम हैं,
जो करे इनको जुदा मजहब नहीं इल्जाम है।
हम जिएंगे और मरेंगे, ऐ वतन तेरे लिए,
दिल दिया है, जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए।
तेरी गलियों में चलाकर नफरतों की गोलियां,
लूटते हैं कुछ लुटेरे दुल्हनों की डोलियां।
लुट रहे हैं आप वो अपने घरों को लूट कर,
खेलते हैं बेखबर अपने लहू से होलियां।
हम जिएंगे और मरेंगे, ऐ वतन तेरे लिए..
4. संदेशे आते हैं
फिल्म ‘बॉर्डर’ का यह गीत सीमा पर तैनात एक सैनिक के दिल की आवाज है। यह गाना परिवार से दूर, देश की रक्षा में लगे जवान की भावनाओं, उसके अकेलेपन और घर की यादों को इतनी शिद्दत से बयां करता है कि हर सुनने वाले की आंखें नम हो जाती हैं।
संदेसे आते हैं, हमें तड़पाते हैं,
जो चिट्ठी आती है, वो पूछे जाती है,
के घर कब आओगे, लिखो कब आओगे,
के तुम बिन ये घर सूना सूना है।
किसी दिलवाली ने, किसी मतवाली ने,
हमें खत लिखा है, ये हमसे पूछा है।
किसी की सांसों ने, किसी की धड़कन ने,
किसी की चूड़ी ने, किसी के कंगन ने।
तरसती बाहों ने और पूछा है तरसी निगाहों ने,
के घर कब आओगे..
मोहब्बत वालों ने, हमारे यारों ने,
हमें ये लिखा है कि हमसे पूछा है।
हमारे गांवों ने, आम की छांवों ने,
पुराने पीपल ने, बरसते बादल ने।
लचकते झूलों ने, दहकते फूलों ने,
चटकती कलियों ने और पूछा है गांव की गलियों ने,
के घर कब आओगे..
कभी एक ममता की, प्यार की गंगा की,
जो चिट्ठी आती है, साथ वो लाती है,
मेरे दिन बचपन के, खेल वो आंगन के।
वो साया आंचल का, वो टीका काजल का।
वो लोरी रातों में, वो नरमी हाथों में,
बिगड़ना ऊपर से, मोहब्बत अंदर से, करे वो देवी मां,
यही हर खत में पूछे मेरी मां,
के घर कब आओगे..
ऐ गुजरने वाली हवा बता,
मेरा इतना काम करेगी क्या,
मेरे गांव जा, मेरे दोस्तों को सलाम दे।
मेरे गांव में है जो वो गली, जहां रहती है मेरी दिलरुबा,
उसे मेरे प्यार का जाम दे।
वहीं थोड़ी दूर है घर मेरा, मेरे घर में है मेरी बूढ़ी मां,
मेरी मां के पैरों को छू के तू उसे उसके बेटे का नाम दे।
मैं वापस आऊंगा, फिर अपने गांव में, उसी की छांव में..
किया जो वादा था वो निभाऊंगा, मैं एक दिन आऊंगा।
5. ऐ मेरे वतन के लोगों
लता मंगेशकर की आवाज में यह गीत नहीं, बल्कि एक प्रार्थना है। 1962 के युद्ध के शहीदों की याद में लिखा गया यह गीत जब पहली बार गाया गया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू की आंखों में भी आंसू आ गए थे। यह गीत आज भी हर भारतीय को देश के लिए प्राण गंवाने वाले वीरों की याद दिलाता है।
ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा,
ये शुभ दिन है हम सब का, लहरा लो तिरंगा प्यारा।
पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने हैं प्राण गवाए,
कुछ याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के घर ना आए।
ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी,
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी।
जब देश में थी दीवाली, वो खेल रहे थे होली,
जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली।
संगीन पे धर कर माथा, सो गए अमर बलिदानी,
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी।
जब घायल हुआ हिमालय, खतरे में पड़ी आजादी,
जब तक थी सांस लड़े वो, फिर अपनी जान बिछा दी।
जो खून गिरा पर्वत पर, वो खून था हिन्दुस्तानी,
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी।
कोई सिख कोई जाट मराठा, कोई गुरखा कोई मद्रासी,
सरहद पर मरने वाला, हर वीर था भारतवासी।
थे धन्य जवान वो अपने, थी धन्य वो उनकी जवानी,
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी।
जब अंत समय आया तो, कह गए के अब मरते हैं,
खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफर करते हैं।
क्या लोग थे वो दीवाने, क्या लोग थे वो अभिमानी,
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी।
जय हिंद, जय हिंद की सेना..
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