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India Canada relations: सरे के गुरुद्वारे में लगा ‘खालिस्तान दूतावास' का साइन, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

India Canada relations: भारत और कनाडा के बीच नाजुक दौर से गुजर रहे रिश्तों में एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर

Chetan
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2025-08-06
India Canada relations: सरे के गुरुद्वारे में लगा ‘खालिस्तान दूतावास' का साइन, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति
India Canada relations: सरे के गुरुद्वारे में लगा ‘खालिस्तान दूतावास' का साइन, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

India Canada relations: भारत और कनाडा के बीच नाजुक दौर से गुजर रहे रिश्तों में एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर में स्थित गुरु नानक सिख गुरुद्वारा के परिसर में एक बेहद आपत्तिजनक साइनबोर्ड लगाया गया है, जिसने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। इस हफ्ते सोमवार को जब इस साइन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तो यह मामला पूरी दुनिया के सामने आया।

इस विवादित साइनबोर्ड पर न केवल ‘खालिस्तान दूतावास’ लिखा था, बल्कि इस पर हिंसक अलगाववादी आंदोलन को जन्म देने वाले जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर भी थी। भिंडरावाले 1984 में स्वर्ण मंदिर, अमृतसर पर भारतीय सैनिकों की कार्रवाई, ऑपरेशन ब्लूस्टार, के दौरान मारा गया था। इस साइन पर गुरुद्वारे के पूर्व प्रमुख हरदीप सिंह निज्जर की तस्वीर भी है, जिसकी 18 जून, 2023 को सरे में ही हत्या कर दी गई थी। निज्जर की हत्या के बाद ही भारत और कनाडा के संबंधों में भारी गिरावट आई थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कनाडाई संसद में बयान दिया था कि निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की संलिप्तता के “विश्वसनीय आरोप” हैं।

इस ताजा घटनाक्रम पर, ओटावा में स्थित भारतीय उच्चायोग ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक बयान में कहा, “भारत ने कनाडाई अधिकारियों से बार-बार आग्रह किया है कि वे उनकी धरती से काम कर रहे भारत-विरोधी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करें, जो भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा हैं।”

एक जानकार व्यक्ति ने उल्लेख किया कि जहाँ एक तरफ कनाडा के प्रधानमंत्री की सरकार और भारत के बीच संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के प्रयास हो रहे हैं, वहीं यह भी माना जा रहा है कि अलगाववादी समूह जानबूझकर ऐसी भड़काऊ हरकतों को बढ़ा सकते हैं ताकि दोनों देशों के बीच संभावित सुलह को कमजोर किया जा सके।

स्थानीय भारतीय समुदाय ने भी की कड़ी आलोचना

इस साइनबोर्ड ने स्थानीय समुदाय के भीतर भी भारी आलोचना को जन्म दिया है। सरे स्थित रेडियो इंडिया के सीईओ, मनिंदर सिंह गिल ने ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी को लिखे एक पत्र में इस बात पर प्रकाश डाला कि यह देखना “चौंकाने वाला है कि जिस सामुदायिक केंद्र को प्रांतीय सरकार के अनुदान से बनाया गया था, उसे ‘खालिस्तान दूतावास’ में बदल दिया गया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “प्रांतीय सरकार को गुरुद्वारा समिति या सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाले किसी भी अन्य संगठन से जवाबदेही की मांग करनी चाहिए। सार्वजनिक धन सभी का है, और सार्वजनिक धन से बनाए गए सार्वजनिक स्थान सभी का स्वागत करने वाले होने चाहिए। उग्रवाद के प्रचार को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।” उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री कार्यालय को भी इस संबंध में पत्र लिखा है।

नेशनल अलायंस ऑफ इंडो-कैनेडियंस (NAIC) ने कहा कि वह “इंडो-कैनेडियन समुदाय को चोट पहुँचाने वाले फ्रिंज तत्वों द्वारा की गई ऐसी लापरवाह हरकतों की निंदा करता है और इस पर चिंतित है।”

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और कनाडा आपसी संबंधों को सुधारने की प्रक्रिया में फिर से जुट गए हैं और कुछ ही हफ्तों के भीतर एक-दूसरे की राजधानियों में उच्चायुक्तों की नियुक्ति करके बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं।

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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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