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क्या E20 पेट्रोल सचमुच बिगाड़ रहा है आपकी गाड़ी का इंजन? ARAI की इस सीक्रेट रिपोर्ट ने सरकार के दावों पर उठाए सवाल

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की एक अप्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि ई-20 (E20 – 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) ईंधन का उपयोग पुरा

Malvika
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2026-07-07
क्या E20 पेट्रोल सचमुच बिगाड़ रहा है आपकी गाड़ी का इंजन? ARAI की इस सीक्रेट रिपोर्ट ने सरकार के दावों पर उठाए सवाल
क्या E20 पेट्रोल सचमुच बिगाड़ रहा है आपकी गाड़ी का इंजन? ARAI की इस सीक्रेट रिपोर्ट ने सरकार के दावों पर उठाए सवाल

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की एक अप्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि ई-20 (E20 – 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) ईंधन का उपयोग पुराने वाहनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, ई-10 (E-10) अनुकूल पुराने वाहनों में ई-20 पेट्रोल डालने से उनके फ्यूल सिस्टम में लगे रबर के पुर्जों जैसे पाइप (होसेस), गैसकेट, सील और ओ-रिंग्स का क्षरण हो सकता है। सरकार द्वारा देश में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को तेजी से बढ़ावा देने के बीच सामने आया यह अध्ययन 2023 से पहले बनी गाड़ियों के मालिकों की चिंताओं को सही ठहराता है।

ARAI की रिपोर्ट में रबर के पुर्जों के खराब होने का खुलासा

सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने भी पूर्व में इस बात की ओर इशारा किया था कि ई-20 ईंधन के कारण पुराने वाहनों के रबर पुर्जे खराब हो सकते हैं और उन्हें समय से पहले बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, अप्रकाशित एआरएआई अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि ई-20 ईंधन का परीक्षण किए गए वाहनों के धात्विक (मेटल) पुर्जों या गाड़ी के समग्र ढांचे पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।

यह अध्ययन भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की सड़कों पर दौड़ने वाले लगभग 80 प्रतिशत से अधिक वाहन ई-20 ईंधन के अनुकूल नहीं हैं। वर्ष 2023 से पहले निर्मित अधिकांश गाड़ियां मुख्य रूप से ई-10 या उससे कम एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए ही डिजाइन की गई थीं। देश में अप्रैल 2025 से सभी नए वाहनों के लिए ई-20 सामग्री और ईंधन दोनों के अनुकूल होना अनिवार्य किया गया है।

इंजन टिकाऊपन (ड्यूरेबिलिटी) टेस्ट के मिश्रित नतीजे

मार्च 2022 में शुरू हुए इस अध्ययन के तहत विभिन्न वाहन निर्माताओं द्वारा इंजन की टिकाऊपन क्षमता का परीक्षण किया गया। चार पहिया वाहनों (फोर-व्हीलर्स) के मामले में दो मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) ने इसका मूल्यांकन किया। परीक्षण के दौरान एक बीएस-IV (BS-IV) इंजन ने ई-20 ईंधन के साथ 400 घंटे के परीक्षण के बाद स्वीकार्य प्रदर्शन किया। हालांकि, एक बीएस-VI (BS-VI) टर्बोचार्ज्ड इंजन में 265 घंटे के बाद ही तकनीकी समस्याएं देखी गईं।

इसके अलावा, संचयी रूप से 809 घंटे तक किए गए इंजन परीक्षणों के दौरान एक वाहन के एग्जॉस्ट वाल्व (Exhaust Valve) में थर्मल-मैकेनिकल विफलता दर्ज की गई। कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि इस विफलता के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं, क्योंकि मानक टिकाऊपन परीक्षण आमतौर पर 2,000 घंटे तक चलते हैं। दोपहिया वाहनों (टू-व्हीलर्स) के लिए तीन निर्माताओं द्वारा किए गए परीक्षणों में कोई बड़ी समस्या नहीं पाई गई और उनका प्रदर्शन संतोषजनक रहा। बीएस-IV दोपहिया वाहनों को छोड़कर अधिकांश मामलों में गाड़ी के स्टार्ट होने और चलने की क्षमता को बेहतर पाया गया।

माइलेज में गिरावट और प्रदूषण पर क्या रहा असर?

अध्ययन में पाया गया कि ई-10 पेट्रोल की तुलना में ई-20 पेट्रोल का उपयोग करने पर वाहनों की ईंधन खपत में लगभग 2% से 6% तक की मामूली बढ़ोतरी देखी गई, जो कि विभिन्न वाहनों के हिसाब से अलग-अलग थी। इसका सीधा मतलब यह है कि ई-20 पेट्रोल से चलने पर वाहनों के माइलेज में गिरावट आती है।

प्रदूषण के स्तर की बात करें तो वाहनों के टेलपाइप उत्सर्जन और वाष्पीकरण उत्सर्जन कानूनी सीमाओं के भीतर ही रहे। हालांकि, ई-20 ईंधन के साथ कुछ दूरी तय करने के बाद कुछ चुनिंदा वाहनों में प्रदूषण उत्सर्जन में थोड़ी वृद्धि दर्ज की गई।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और एथेनॉल पर नीति आयोग की राय

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नेतृत्व में सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग के आर्थिक लाभों को बढ़ावा दे रही है, लेकिन उपभोक्ता इसकी तकनीकी खामियों को लेकर चिंतित हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने नीति आयोग की 2021 की एक रिपोर्ट का हवाला दिया था, जिसमें ई-20 ईंधन से माइलेज में गिरावट की बात स्वीकार की गई थी और पुराने वाहनों के लिए ई-10 पेट्रोल की उपलब्धता बनाए रखने की सिफारिश की गई थी।

इसी मुद्दे को लेकर हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी आयोजित किए गए थे। प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और ‘टीम भारत’ के सदस्यों ने आरोप लगाया कि एथेनॉल के कारण गाड़ियों के फ्यूल फिल्टर और पूरी पाइपलाइन चोक (जाम) हो रही है। सरकार ने हाल ही में मई में एआरएआई को एक अन्य अध्ययन का काम सौंपा है, जिसके तहत मौजूदा ई-10 और ई-20 वाहनों पर ई-25 (25% एथेनॉल) के प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

FAQ:
Q1: ई-20 ईंधन से पुराने वाहनों के किन पुर्जों को नुकसान पहुंच सकता है?
A1: ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के अप्रकाशित अध्ययन के अनुसार, ई-20 ईंधन से पुराने ई-10 अनुकूल वाहनों के ईंधन सिस्टम में लगे रबर के पुर्जे जैसे पाइप (होसेस), गैसकेट, सील और ओ-रिंग्स खराब हो सकते हैं और उन्हें बदलने की नौबत आ सकती है।

Q2: क्या ई-20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज पर भी कोई असर पड़ता है?
A2: हाँ, अध्ययन में पाया गया है कि ई-10 पेट्रोल की तुलना में ई-20 पेट्रोल का उपयोग करने से वाहनों की ईंधन खपत (माइलेज) में लगभग 2% से 6% तक की गिरावट आ सकती है।

Q3: भारतीय सड़कों पर दौड़ने वाले कितने प्रतिशत वाहन ई-20 ईंधन के अनुकूल नहीं हैं?
A3: एक अनुमान के अनुसार, भारतीय सड़कों पर दौड़ने वाले 80 प्रतिशत से अधिक वाहन ई-20 अनुकूल नहीं हैं। ये ज्यादातर अप्रैल 2023 से पहले निर्मित वाहन हैं जो ई-10 या उससे कम एथेनॉल मिश्रण के लिए बनाए गए थे।

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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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