JDU expels 12 leaders: बिहार विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों और गहमागहमी के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। पार्टी ने ‘घर के भेदियों’ को पहचानने के बाद उन पर सीधा प्रहार किया है। अनुशासनहीनता और चुनाव के दौरान एनडीए (NDA) प्रत्याशियों के खिलाफ काम करने (भितरघात) के गंभीर आरोपों में 12 बड़े नेताओं को पार्टी से दूध में से मक्खी की तरह बाहर निकाल दिया गया है।
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गद्दारी की सजा: अपनों ने ही पीठ में घोंपा खंजर?
चुनाव के दौरान अक्सर देखा जाता है कि कुछ नेता टिकट न मिलने या आपसी रंजिश के कारण अपनी ही पार्टी के उम्मीदवारों को हराने की कोशिश करते हैं। जेडीयू के भीतर भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। पार्टी नेतृत्व को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी पर्दे के पीछे से विपक्षी खेमे की मदद कर रहे हैं। इस ‘भितरघात’ को नीतीश कुमार ने बेहद गंभीरता से लिया और साफ कर दिया कि पार्टी में अनुशासन से समझौता किसी भी कीमत पर नहीं होगा।
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किन-किन दिग्गजों पर गिरी गाज? यहाँ है पूरी लिस्ट
निष्कासित किए गए नेताओं की सूची में केवल जमीनी कार्यकर्ता नहीं, बल्कि पूर्व विधायक और जिला स्तर के कद्दावर चेहरे भी शामिल हैं। इन सभी को 6 साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है। निष्कासित प्रमुख नामों में शामिल हैं:
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अशोक सिंह: पूर्व विधायक, औरंगाबाद (पार्टी का बड़ा चेहरा माने जाते थे)
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संजीव कुमार सिंह: औरंगाबाद के वरिष्ठ नेता
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प्रमोद सदा: सहरसा के प्रभावी नेता
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संजय कुशवाहा और कमला कुशवाहा: सिवान (क्षेत्रीय समीकरणों में अहम भूमिका)
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गोपाल शर्मा उर्फ शशिभूषण कुमार: जहानाबाद के पूर्व जिलाध्यक्ष
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जमीलउर रहमान: कोच प्रखंड अध्यक्ष, गया
इसके अलावा महेंद्र सिंह, गुलाम मुर्तजा अंसारी, अमित कुमार पम्मू और दरभंगा के अवधेश लाल देव जैसे नाम भी इस ‘हिट लिस्ट’ में शामिल हैं।
कैसे हुई गद्दारों की पहचान? 3 सदस्यीय कमेटी का गुप्त मिशन
यह कार्रवाई हवा-हवाई नहीं थी। जेडीयू ने इसके लिए एक 3 सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया था। इस कमेटी ने ग्राउंड जीरो पर जाकर कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया, कॉल रिकॉर्ड्स और चुनावी गतिविधियों का विश्लेषण किया। जब समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा को सौंपी, तो उन 12 नेताओं की भूमिका संदिग्ध और पार्टी विरोधी पाई गई। रिपोर्ट मिलते ही उमेश कुशवाहा ने बिना देर किए निष्कासन पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए।
भविष्य के लिए कड़ा संदेश: अनुशासन ही सर्वोपरि
जेडीयू की इस कार्रवाई का मकसद केवल इन 12 नेताओं को सजा देना नहीं है, बल्कि पार्टी के बाकी कार्यकर्ताओं और नेताओं को एक ‘चेतावनी’ देना भी है। नीतीश कुमार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 2026 के इस दौर में अगर कोई गठबंधन धर्म (NDA) का पालन नहीं करेगा या पार्टी की जड़ों को खोखला करने की कोशिश करेगा, तो उसका राजनीतिक करियर जेडीयू में खत्म समझा जाएगा।
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