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RBI: रेपो रेट 5.5% पर स्थिर, जानिए आपकी EMI और अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा

RBI: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ाने की ताजा धमकी के बाद रुपये पर बने दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 

Malvika
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2025-08-06
RBI: रेपो रेट 5.5% पर स्थिर, जानिए आपकी EMI और अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा
RBI: रेपो रेट 5.5% पर स्थिर, जानिए आपकी EMI और अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा

RBI: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ाने की ताजा धमकी के बाद रुपये पर बने दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अपनी रेपो रेट को 5.5% पर अपरिवर्तित रखा है। कल ट्रंप की धमकी के बाद डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे कमजोर हो गया था, जिसके चलते बाजार में अनिश्चितता का माहौल था।

इस फैसले की घोषणा आज सुबह मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद की गई। यह समिति हर दो महीने में केंद्रीय बैंक की वित्तीय रणनीति तैयार करने के लिए बैठक करती है। आपको बता दें कि जून में, आरबीआई ने नरम पड़ती महंगाई को देखते हुए प्रमुख ब्याज दर में 50 बेसिस पॉइंट्स (0.50%) की कटौती की थी।

बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “समिति ने न्यूट्रल रुख बनाए रखने का फैसला किया है, क्योंकि टैरिफ को लेकर अनिश्चितता अभी भी विकसित हो रही है और पिछली मौद्रिक नीति के लाभ धीरे-धीरे ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं (यानी मॉनेटरी पॉलिसी ट्रांसमिशन जारी है)।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि MPC आगे आने वाले आंकड़ों पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी।

श्री मल्होत्रा ​​ने कहा, “लगातार टैरिफ घोषणाओं और व्यापार वार्ताओं के बीच बाहरी मांग की संभावनाएं अनिश्चित बनी हुई हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से चले आ रहे भू-राजनीतिक तनाव से पैदा होने वाली प्रतिकूल परिस्थितियां भारत की जीडीपी ग्रोथ के लिए जोखिम पैदा करती हैं।

जीडीपी ग्रोथ का दमदार आउटलुक (GDP Growth Outlook)

वैश्विक चिंताओं के बावजूद, चालू वित्त वर्ष के लिए वास्तविक जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.5% रखा गया है, जो एक निरंतर विकास के दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह रूस के साथ व्यापार को लेकर ट्रंप द्वारा भारत पर किए गए “मृत अर्थव्यवस्था” (‘dead economy’) वाले तंज का भी एक करारा जवाब है। केंद्रीय बैंक ने विकास को समर्थन देने के लिए निर्णायक और दूरंदेशी उपाय किए हैं। इस ग्रोथ का तिमाही अनुमान इस प्रकार है:

  • पहली तिमाही (Q1): 6.5%
  • दूसरी तिमाही (Q2): 6.7%
  • तीसरी तिमाही (Q3): 6.6%
  • चौथी तिमाही (Q4): 6.3%

श्री मल्होत्रा ने भू-राजनीतिक चुनौतियों पर आरबीआई का दृष्टिकोण भी साझा किया। उन्होंने कहा कि हालांकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं कुछ हद तक कम हुई हैं, लेकिन वैश्विक व्यापार की चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि मध्यम अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की संभावनाएं उज्ज्वल हैं, लेकिन दुनिया भर के नीति निर्माताओं को धीमी वृद्धि और घटती महंगाई का सामना करना पड़ रहा है।

नियंत्रित लेकिन मध्यम रूप से ऊंची महंगाई (Moderately High Inflation)

अस्थिर खाद्य कीमतों के कारण हेडलाइन महंगाई दर अभी कम है, लेकिन आरबीआई ने अनुमान लगाया है कि यह आखिरी तिमाही से बढ़ सकती है। श्री मल्होत्रा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का दृष्टिकोण जून की अपेक्षा से अधिक अनुकूल हो गया है। उन्होंने अनुमान जताया कि जनवरी-मार्च तिमाही में खुदरा महंगाई 4% से ऊपर जा सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि जून में सोने की कीमतों में वृद्धि के कारण कोर मुद्रास्फीति (Core Inflation) में थोड़ी वृद्धि हुई और वर्ष के दौरान इसके 4% से थोड़ा ऊपर बने रहने की संभावना है।

विशेषज्ञों की राय: घर खरीदारों और कर्जदारों के लिए क्या हैं मायने?

विशेषज्ञों का कहना है कि MPC का यह निर्णय एक जटिल वैश्विक परिदृश्य में आरबीआई के सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाता है।

स्क्वायर यार्ड्स (Square Yards) के सह-संस्थापक अमित प्रकाश सिंह ने कहा, “कर्जदारों के लिए, इसका सीधा मतलब स्थिरता की अवधि है, जिसमें लोन की EMI और ब्याज दरें अनुमान के मुताबिक बनी रहेंगी। यह बैंकिंग प्रणाली को पिछली दर कटौती के लाभों को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर भी प्रदान करता है।”

कोलियर्स इंडिया (Colliers India) के राष्ट्रीय निदेशक विमल नादर के अनुसार, मौद्रिक नीति में स्थिरता घर खरीदारों और रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए अच्छा संकेत है, विशेष रूप से किफायती और मध्यम-आय वाले सेगमेंट में। इससे रियल एस्टेट बाजार में एक सकारात्मक माहौल बनने की उम्मीद है।

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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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