8th Pay Commission: देश के 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए जल्द ही बड़ी खुशखबरी आ सकती है। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन को लेकर लंबे समय से चल रहे इंतजार पर सरकार ने अहम जानकारी दी है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनरों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सरकार को इस मामले में विभिन्न हितधारकों से महत्वपूर्ण इनपुट (सुझाव) प्राप्त हुए हैं और ‘उचित समय’ पर इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कब?
मंत्री पंकज चौधरी ने यह भी भरोसा दिलाया कि आठवां वेतन आयोग अपनी सिफारिशें निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही प्रस्तुत करेगा, जिसकी विस्तृत जानकारी सही समय आने पर साझा की जाएगी। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने इसी साल 16 जनवरी को आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी। हालांकि, इस घोषणा को अब छह महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक नए वेतन आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों के मन में संशय बना हुआ है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 31 दिसंबर, 2025 को सातवें वेतन आयोग का दस साल का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और नए वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2026 से लागू होनी हैं।
क्यों बढ़ने लगी है कर्मचारियों और पेंशनर्स की टेंशन?
आमतौर पर, सरकार हर 10 साल में अपने कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन की समीक्षा करने और उसे मौजूदा महंगाई और जरूरतों के हिसाब से संशोधित करने के लिए एक वेतन आयोग का गठन करती है। केंद्र सरकार द्वारा 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के गठन की घोषणा हुए छह महीने से भी ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
याद दिला दें कि सातवां वेतन आयोग 1 जनवरी, 2016 से प्रभावी हुआ था, जिसके लागू होने के बाद लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़ा सुधार देखने को मिला था। अब उसी 10 साल के चक्र के अनुसार, 8वें वेतन आयोग के गठन और उसकी प्रक्रिया को 2024-25 के दौरान ही पूरा हो जाना चाहिए, ताकि इसे समय पर लागू किया जा सके। इस देरी के कारण ही लाभार्थियों के बीच बेचैनी का माहौल है।
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