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Mani Shankar Aiyar: केरल में कांग्रेस खुद ही खुद की हार की कहानी लिख रही है?

Mani Shankar Aiyar: भारतीय राजनीति में मणिशंकर अय्यर एक ऐसा नाम हैं, जो जब भी बोलते हैं, अपनी ही पार्टी के लिए कोई न कोई मुसीबत खड़ी कर देते हैं। इस बार अय्यर ने

Malvika
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2026-02-16
Mani Shankar Aiyar: केरल में कांग्रेस खुद ही खुद की हार की कहानी लिख रही है?
Mani Shankar Aiyar: केरल में कांग्रेस खुद ही खुद की हार की कहानी लिख रही है?

Mani Shankar Aiyar: भारतीय राजनीति में मणिशंकर अय्यर एक ऐसा नाम हैं, जो जब भी बोलते हैं, अपनी ही पार्टी के लिए कोई न कोई मुसीबत खड़ी कर देते हैं। इस बार अय्यर ने अपनी बेबाकी की सीमाएं तोड़ते हुए कांग्रेस के कद्दावर नेताओं और पार्टी की भविष्य की योजनाओं पर वो तीखा हमला बोला है, जिसकी गूँज दिल्ली से लेकर केरल तक सुनाई दे रही है। एक ताजा इंटरव्यू में अय्यर ने राहुल गांधी की टीम के महत्वपूर्ण चेहरों पर जो टिप्पणियां की हैं, उसने न केवल विपक्ष को मसाला दे दिया है, बल्कि खुद कांग्रेस के भीतर एक ‘भूकंप’ ला दिया है।

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“पवन खेड़ा सिर्फ एक कठपुतली हैं”—अय्यर का पहला प्रहार

अय्यर का सबसे कड़ा हमला कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा (Pawan Khera) पर रहा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से खेड़ा को एक ‘कठपुतली’ (Puppet) करार दिया। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि वे खेड़ा को पार्टी का आधिकारिक प्रवक्ता मानते ही नहीं हैं। अय्यर ने आरोप लगाया कि पिछले दो सालों से पवन खेड़ा उन पर निशाना साध रहे हैं और यह सब किसी के इशारे पर हो रहा है। कांग्रेस जैसे लोकतांत्रिक संगठन में जब एक वरिष्ठ नेता प्रवक्ता को ‘कठपुतली’ कहे, तो यह स्पष्ट करता है कि पार्टी के भीतर का अनुशासन किस स्तर पर पहुँच चुका है।

शशि थरूर की ‘स्वार्थी’ महत्वाकांक्षा पर निशाना

इतना ही नहीं, तिरुवनंतपुरम से सांसद और दिग्गज नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) भी अय्यर के वार से नहीं बच सके। अय्यर ने थरूर को ‘एंटी-पाकिस्तान’ (Anti-Pakistan) बताया। उन्होंने यह दावा कर सबको चौंका दिया कि शशि थरूर ‘अगले विदेश मंत्री’ (Future Foreign Minister) बनने की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा रखते हैं। अय्यर के अनुसार, थरूर का हर कदम उनके इसी स्वार्थ से प्रेरित होता है, जो कांग्रेस की विचारधारा और सामूहिक प्रयासों के लिए एक चुनौती बन चुका है।

जयराम रमेश और केरल चुनाव: “सब डरे हुए हैं”

पार्टी के संचार प्रमुख जयराम रमेश (Jairam Ramesh) पर चुटकी लेते हुए अय्यर ने कहा कि उन्हें बस “अपनी नौकरी बचानी है।” इसके साथ ही उन्होंने आगामी केरल विधानसभा चुनाव (Kerala Election) पर बहुत डरावनी भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा, “केरल के कांग्रेस नेता कम्युनिस्टों (LDF) से जितनी नफरत करते हैं, उससे कहीं ज्यादा नफरत वे एक-दूसरे से करते हैं।” अय्यर का मानना है कि इस आपसी दरार के कारण पार्टी के लिए केरल में जीत पाना असंभव है।

विपक्षी मुख्यमंत्री के पैर छूने की तमन्ना!

हैरानी की बात तो यह रही कि जहाँ अय्यर अपनों पर आग उगल रहे थे, वहीं केरल के मुख्यमंत्री और माकपा (CPM) नेता पिनारायी विजयन (Pinarayi Vijayan) की तारीफों के पुल बाँध रहे थे। ‘विजन 2031’ के एक सेमिनार में उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा, “मुख्यमंत्री विजयन, मुझे आपके पैर छूने चाहिए। आपने कांग्रेस द्वारा छोड़े गए बैटन (पंचायती राज का सपना) को आगे बढ़ाया है।” इस बयान ने कांग्रेस के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया है, क्योंकि केरल में कांग्रेस और एलडीएफ (LDF) कट्टर राजनीतिक दुश्मन हैं।

कांग्रेस की सफाई: “मणिशंकर अब हमारे नहीं”

जब विवाद बढ़ा तो कांग्रेस ने तुरंत डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया (X) पर पलटवार करते हुए कहा कि मणिशंकर अय्यर का पिछले कई सालों से कांग्रेस के साथ कोई सक्रिय संबंध नहीं है। वे जो कुछ भी बोल रहे हैं, वह उनकी ‘व्यक्तिगत क्षमता’ में है। वहीं, जयराम रमेश ने दावा किया कि केरल की जनता पिनारायी विजयन की ‘भाजपा-साझा सरकार’ को हटाकर यूडीएफ (UDF) को वापस लाएगी।

अंतर्कलह का असली चेहरा?

मणिशंकर अय्यर की ये बेबाक टिप्पणियां क्या केवल एक व्यक्तिगत राय हैं, या फिर ये कांग्रेस के भीतर पनप रही गहरी असुरक्षा और दरार की निशानी हैं? केरल चुनाव से ठीक पहले अपनों को नीचा दिखाना और विरोधी मुख्यमंत्री की सराहना करना किसी ‘बगावत’ से कम नहीं लगता। अब देखना यह है कि क्या कांग्रेस इन ‘बागी’ स्वरों को दबा पाएगी या फिर अय्यर का यह दांव राहुल गांधी की 2026 की रणनीति को नुकसान पहुंचाएगा।

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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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