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Manikarnika Ghat: माँ पार्वती का वो ‘श्राप' जिसने मणिकर्णिका को बनाया धरती का सबसे रहस्यमयी घाट

Manikarnika Ghat: दुनिया में शायद ही कोई ऐसा स्थान हो जहाँ मृत्यु को ‘मंगल’ (शुभ) माना जाता हो, लेकिन भारत की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी (काशी) में

Chetan
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2026-02-16
Manikarnika Ghat: माँ पार्वती का वो ‘श्राप' जिसने मणिकर्णिका को बनाया धरती का सबसे रहस्यमयी घाट
Manikarnika Ghat: माँ पार्वती का वो ‘श्राप' जिसने मणिकर्णिका को बनाया धरती का सबसे रहस्यमयी घाट

Manikarnika Ghat: दुनिया में शायद ही कोई ऐसा स्थान हो जहाँ मृत्यु को ‘मंगल’ (शुभ) माना जाता हो, लेकिन भारत की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी (काशी) में एक ऐसी जगह है जहाँ चौबीसों घंटे चिताओं का धुंआ आसमान को छूता है। यह है मणिकर्णिका घाट, जिसे दुनिया ‘महाश्मशान’ के नाम से भी जानती है। मान्यता है कि यहाँ आने वाला व्यक्ति राख होकर भी ‘अमर’ हो जाता है क्योंकि उसे स्वयं भगवान शिव का सान्निध्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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मणिकर्णिका घाट: जहाँ मनोकामना नहीं, मुक्ति मांगते हैं लोग

हिंदू धर्म में काशी का महत्व किसी परिचय का मोहताज नहीं है। लेकिन मणिकर्णिका घाट का दर्शन मात्र ही जीवन के प्रति आपके दृष्टिकोण को बदल सकता है। अक्सर लोग मंदिरों में अपनी इच्छाएं पूरी करने जाते हैं, लेकिन मणिकर्णिका एक ऐसा स्थान है जहाँ लोग इच्छाओं का अंत करने यानी ‘मोक्ष’ की तलाश में आते हैं।

धर्मग्रंथों और काशी खंड में कहा गया है कि मणिकर्णिका पर होने वाला दाह संस्कार आत्मा को चौरासी लाख योनियों के बंधन से मुक्त कर देता है।

मरणं मंगलं यत्र विभूतिश्च विभूषणम्…
अर्थात जहाँ मरना भी कल्याणकारी है और चिता की भस्म (विभूति) जहाँ आभूषण है, वैसी दिव्य नगरी काशी की तुलना भला किससे की जा सकती है? यहाँ के बारे में प्रचलित है कि स्वयं महादेव मरने वाले के कान में ‘तारक मंत्र’ देते हैं, जिससे उसे सीधा स्वर्ग नहीं, बल्कि परम मुक्ति मिलती है।

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कभी नहीं बुझती ‘अखंड अग्नि’: माँ पार्वती के श्राप का रहस्य?

मणिकर्णिका घाट की सबसे विस्मयकारी विशेषता इसकी ‘अखंड अग्नि’ है। सदियों से यहाँ की ज्वाला एक पल के लिए भी शांत नहीं हुई है। पौरााणिक कथाओं के अनुसार, जब देवी सती के विग्रह को लेकर शिव भ्रमण कर रहे थे, तब इस स्थान पर उनके कान की मणि (कर्णिका) गिर गई थी, जिस कारण इसका नाम ‘मणिकर्णिका’ पड़ा।

वहीं, एक अन्य रहस्यमयी मान्यता यह भी है कि इस घाट को माँ पार्वती का एक ‘श्राप’ लगा हुआ है। कहा जाता है कि इस श्राप के कारण ही यहाँ की आग कभी ठंडी नहीं होगी और यहाँ निरंतर देह-दाह चलता रहेगा। वैज्ञानिक नजरिए से भले ही इसे चक्रव्यूह माना जाए, लेकिन भक्तों के लिए यह जीवन के नश्वर होने का साक्षात प्रमाण है।

विवादों के घेरे में मणिकर्णिका: विकास या विनाश? (Manikarnika Ghat Demolition Controversy)

इन दिनों अपनी दिव्यता के साथ-साथ मणिकर्णिका घाट एक भारी सियासी विवाद और जन-आक्रोश का केंद्र बना हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार की काशी कायाकल्प योजना के तहत घाटों का सौंदर्यीकरण और नवीनीकरण किया जा रहा है।

विवाद की जड़: सोशल मीडिया पर हाल ही में कुछ दिल दहला देने वाले वीडियो वायरल हुए। इन वीडियो में दावा किया जा रहा है कि पुनर्विकास (Renovation) के नाम पर मणिकर्णिका घाट की प्राचीन मूर्तियों और नक्काशीदार कलाकृतियों को तोड़कर मलबे में फेंक दिया गया है।

  • सरकार का पक्ष: स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन का कहना है कि वायरल वीडियो भ्रामक या ‘AI जनरेटेड’ (फेक) हो सकते हैं। सौंदर्यीकरण का उद्देश्य भक्तों को सुविधाएं देना और संकरी गलियों को खुला करना है।

  • भक्तों की चिंता: धार्मिक विशेषज्ञों और पुराने काशीवासियों का तर्क है कि आधुनिकता के चक्कर में मणिकर्णिका की उस प्राचीनता और ‘ऊर्जा’ के साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए जो इसकी पहचान है। वर्तमान में इसकी सघन जांच जारी है, लेकिन इस विवाद ने पूरे देश का ध्यान बनारस की ओर खींच लिया है।

मोक्ष का आखिरी ठिकाना आज भी डटा है

चाहे राजनीति हो या नवीनीकरण, मणिकर्णिका की आत्मा उसके उस रहस्य में बसी है जो तर्क से परे है। गंगा के तट पर जलती हुई वे लकड़ियाँ और मंत्रों का जाप एक ऐसी शांति प्रदान करता है जिसे शब्दों में पिरोना नामुमकिन है। यह वह स्थान है जो अमीर और गरीब के बीच का अंतर मिटा देता है; यहाँ आकर हर कोई राख है, और हर राख में शिव हैं।

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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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