Meerut Sealing News: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर का दिल कहे जाने वाले शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट में इस वक्त एक ऐसी खामोशी पसरी है, जिसमें डर और नाराजगी साफ़ महसूस की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेश के बाद, आवास विकास परिषद ने मेरठ के शास्त्री नगर में 44 ऐसी आलीशान इमारतों को सील करने का नोटिस जारी कर दिया है, जो आवासीय नियमों के विरुद्ध कमर्शियल गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रही थीं।
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अस्पताल, स्कूल और खुशियां (बैंकट हॉल) सब होंगे बंद!
यह सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारतों को सील करने की कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे हजारों लोगों की भावनाएं और भविष्य जुड़ा है। प्रशासन द्वारा चिह्नित की गई इन 44 इमारतों में:
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6 बड़े निजी अस्पताल और नर्सिंग होम (जहाँ मरीज जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं)
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6 प्रमुख स्कूल (जहाँ बच्चों का भविष्य गढ़ा जा रहा है)
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4 बैंकट हॉल (जहाँ शादियों की शहनाइयां गूंजनी थीं)
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28 अन्य व्यावसायिक परिसर
अदालत ने सख्त लहजे में कहा है कि मानवीय संवेदनाओं का ख्याल रखते हुए अस्पतालों के मरीजों को सुरक्षित शिफ्ट किया जाए और स्कूलों में पढ़ रहे मासूम बच्चों का दाखिला दूसरी जगह कराया जाए। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह इतना आसान है?
1400 दुकानें और हजारों परिवार: रडार पर है पूरा इलाका
कार्रवाई का दायरा सिर्फ इन 44 इमारतों तक सीमित नहीं है। शास्त्री नगर के सेक्टर 1 से लेकर 13 तक कुल 1400 से ज्यादा ऐसी दुकानों को चिह्नित किया गया है, जो नियमों की धज्जियां उड़ाकर बनाई गई हैं। कोर्ट की सख्ती का आलम यह है कि कई व्यापारियों ने बुलडोजर के डर से खुद ही अपना सामान समेटना और अवैध निर्माण को तोड़ना शुरू कर दिया है।
व्यापारियों का दर्द छलक पड़ा है। उनका कहना है कि उन्होंने ‘लैंड यूज चेंज’ (Land Use Change) के लिए विभाग को मोटी रकम जमा की थी, फिर भी आज उन्हें अपराधी की तरह देखा जा रहा है।
सड़क पर उतरा जनसैलाब: विधायक अतुल प्रधान ने दिया साथ
इस कार्रवाई के विरोध में पूरा शास्त्री नगर बाजार सड़कों पर उतर आया है। व्यापारियों ने प्रदर्शन के दौरान अपनी छाती पीट-पीटकर प्रशासन के प्रति गुस्सा और अपना दुख व्यक्त किया। व्यापारियों का कहना है कि वे सालों से ईमानदारी से GST और टैक्स भर रहे हैं, फिर आज उनका कारोबार क्यों उजाड़ा जा रहा है?
इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला है। समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान मौके पर पहुंचे और व्यापारियों के कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए। उन्होंने इसे व्यापारियों के साथ अन्याय बताया और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
9 अप्रैल: फैसले की वो घड़ी जिस पर टिकी हैं सबकी नजरें
फिलहाल प्रशासन, पुलिस और आवास विकास परिषद की संयुक्त टीमें सीलिंग की तैयारी पूरी कर चुकी हैं। लेकिन व्यापारियों के लिए उम्मीद की आखिरी किरण 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई है। क्या कोर्ट से कोई राहत मिलेगी? या फिर मेरठ का यह ऐतिहासिक बाजार हमेशा के लिए बदल जाएगा? मेरठ की जनता और व्यापारी अब सिर्फ दुआ कर रहे हैं कि उनकी सालों की मेहनत मिट्टी में न मिले।
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