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Neal Katyal: कौन है वो भारतीय शेर जिसने अमेरिका में हिला दी ट्रंप की कुर्सी?

Neal Katyal: अमेरिका से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो अपनी सख्

Malvika
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2026-02-21
Neal Katyal: कौन है वो भारतीय शेर जिसने अमेरिका में हिला दी ट्रंप की कुर्सी?
Neal Katyal: कौन है वो भारतीय शेर जिसने अमेरिका में हिला दी ट्रंप की कुर्सी?

Neal Katyal: अमेरिका से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो अपनी सख्त नीतियों और टैरिफ (Tariffs) के फैसलों के लिए जाने जाते हैं, उन्हें वहां की सुप्रीम कोर्ट ने एक तगड़ा झटका दिया है। लेकिन इस पूरी कहानी में जो नाम सबसे ज्यादा चमक रहा है, वह है नील कात्याल (Neal Katyal)

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क्या है पूरा मामला?

डोनाल्ड ट्रंप ने इमरजेंसी कानून का हवाला देते हुए भारी-भरकम टैरिफ लगाने का फैसला किया था। उनके इस कदम को आर्थिक और कूटनीतिक रूप से एक बड़ा दांव माना जा रहा था। लेकिन भारतीय मूल के दिग्गज वकील नील कात्याल ने इसे चुनौती दी। कात्याल ने अदालत में दलील दी कि अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास व्यापार को नियंत्रित करने की शक्ति है, और राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का इस्तेमाल “मनमाने ढंग से” नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने कात्याल की दलीलों को सही माना और ट्रंप के टैरिफ कानून को खारिज कर दिया।

कौन हैं नील कात्याल? भारतीय जड़ों से शिकागो तक का सफर

नील कात्याल आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उनका जन्म अमेरिका के शिकागो में हुआ था, लेकिन उनके माता-पिता भारतीय अप्रवासी (Immigrants) थे। नील के पिता एक इंजीनियर हैं और मां एक डॉक्टर। एक साधारण भारतीय परिवार से निकलकर अमेरिका के सबसे ताकतवर कानूनी पदों तक पहुंचने का उनका सफर प्रेरणादायक है।

उन्होंने दुनिया के बेहतरीन संस्थानों, डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से अपनी शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जज स्टीफन ब्रेयर के साथ काम करके कानून की बारीकियों को समझा।

ओबामा के खास और ट्रंप के ‘दुश्मन’?

नील कात्याल का कद अमेरिकी राजनीति में तब और बढ़ा जब पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें 2010 में कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल (Acting Solicitor General) नियुक्त किया। वह संघीय सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखते थे।

दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब कात्याल ने ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोला हो। साल 2017 में, जब ट्रंप ने विवादित ‘ट्रैवल बैन’ लगाया था, तब भी नील कात्याल ही थे जिन्होंने इसे अदालत में चुनौती दी थी। वह ‘Impeach: The Case Against Donald Trump’ नाम की मशहूर किताब भी लिख चुके हैं।

एक ऐसा करियर जिसने बनाया रिकॉर्ड

नील कात्याल ने अपने करियर में 50 से अधिक मामलों की पैरवी सुप्रीम कोर्ट में की है। 1965 के वोटिंग राइट्स एक्ट की रक्षा करना हो या जॉर्ज फ्लॉयड मर्डर केस में न्याय दिलाना, कात्याल हमेशा मानवाधिकारों और संविधान की रक्षा के लिए खड़े रहे हैं।

उनकी काबिलियत के कायल पूरी दुनिया के वकील हैं। उन्हें अमेरिकी न्याय विभाग का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘एडमंड रैंडॉल्फ अवॉर्ड’ मिल चुका है। साथ ही, फोर्ब्स ने उन्हें 2024 और 2025 में अमेरिका के टॉप 200 वकीलों की लिस्ट में शामिल किया है।

ट्रंप के टैरिफ पर कोर्ट का यह फैसला न केवल एक कानूनी जीत है, बल्कि यह दर्शाता है कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह राष्ट्रपति ही क्यों न हो, संविधान से ऊपर नहीं है। नील कात्याल की यह जीत भारतवंशियों के लिए गर्व की बात है और दिखाती है कि कैसे एक भारतीय मूल का व्यक्ति दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति की नीतियों को बदलने की ताकत रखता है।


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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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