Nestle India share price: भारत की सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में से एक, नेस्ले इंडिया लिमिटेड (Nestle India Ltd.), के शेयरों में आज भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। कंपनी द्वारा अपनी जून तिमाही के नतीजे जारी करने के बाद, स्टॉक 4% से अधिक की गिरावट के साथ खुल गया और कारोबार के दौरान 5.1% तक लुढ़क गया, जिससे निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई। यह गिरावट कंपनी के निराशाजनक मुनाफे और घटते मार्जिन के कारण आई है।
नतीजों का विश्लेषण: कमाई बढ़ी, पर मुनाफे पर भारी दबाव
नेस्ले इंडिया के जून तिमाही (Q1FY26) के नतीजे उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, खासकर लाभप्रदता के मोर्चे पर, जिसने बाजार के सेंटिमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया।
- शुद्ध लाभ (Net Profit): इस तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा ₹646.5 करोड़ रहा, जो कि ₹732 करोड़ के बाजार के अनुमान (CNBC-TV18 पोल) से काफी कम है। साल-दर-साल आधार पर देखें तो, पिछले साल की तुलना में मुनाफे में 13.5% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
- राजस्व (Revenue): हालांकि, राजस्व के मोर्चे पर कंपनी ने राहत की सांस ली है। इस तिमाही में आय 6% बढ़कर ₹5,096 करोड़ हो गई, जो ₹5,080 करोड़ की उम्मीदों के लगभग अनुरूप थी।
- एबिटा (EBITDA): ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई (EBITDA) पिछले साल के स्तर पर ₹1,100 करोड़ पर सपाट रही, जो ₹1,135 करोड़ के अनुमान से थोड़ा कम है।
- मार्जिन में भारी गिरावट: निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता का कारण कंपनी का घटता हुआ मार्जिन है। एबिटा मार्जिन पिछले साल के 22.9% से घटकर 21.6% रह गया। यह 22.3% के बाजार के अनुमान से भी कम है।
कंपनी ने बताई गिरावट की असली वजह
नेस्ले इंडिया के प्रबंधन ने मुनाफे और मार्जिन में आई इस गिरावट के पीछे कई कारणों का हवाला दिया है:
- बढ़ी हुई वित्तीय लागत: कंपनी ने बताया कि परिचालन में नकदी प्रवाह की अस्थायी जरूरतों को पूरा करने के लिए कमर्शियल बैंकों से उधार लिया गया, जिसके परिणामस्वरूप तिमाही के दौरान ब्याज का खर्च (Finance Costs) बढ़ गया।
- महंगाई का असर: प्रबंधन ने कहा कि तिमाही के प्रदर्शन पर कमोडिटी पोर्टफोलियो (कच्चे माल) में बढ़ी हुई कीमतों का भी असर पड़ा है।
- परिचालन लागत में वृद्धि: इसके अलावा, कंपनी द्वारा हाल ही में की गई विस्तार गतिविधियों के कारण परिचालन लागत (Operating Costs) में भी वृद्धि हुई है।
क्या कुछ अच्छा भी है? आगे की राह
इस निराशाजनक प्रदर्शन के बीच, प्रबंधन ने कुछ सकारात्मक संकेत भी दिए हैं जो भविष्य के लिए उम्मीद जगाते हैं:
- कच्चे माल की कीमतें स्थिर: प्रबंधन ने कहा, “हालांकि, हमने खाद्य तेल और कोको की कीमतों में स्थिरता, कॉफी में गिरावट का रुख और दूध की कीमत में मामूली वृद्धि के साथ स्थिरता देखी है।”
- शहरी मांग में वृद्धि: प्रबंधन ने यह भी उल्लेख किया कि हाल की तिमाहियों में मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे शहरी बाजारों में वृद्धि हुई है।
- मानसून से उम्मीद: प्रबंधन के अनुसार, मानसून की शुरुआत के साथ दूध की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे लागत का दबाव कम हो सकता है।
- कैटेगरी का प्रदर्शन:
- कन्फेक्शनरी श्रेणी (चॉकलेट, टॉफी) में उच्च दोहरे अंकों में वृद्धि देखी गई।
- तैयार व्यंजन और कुकिंग एड्स श्रेणी वॉल्यूम वृद्धि पर वापस लौट आई।
- दुग्ध उत्पाद और पोषण श्रेणी का प्रदर्शन मिलाजुला रहा।
अब आगे क्या?
कंपनी के लिए अगला बड़ा ट्रिगर 1 अगस्त, 2025 को होगा, जब मनीष तिवारी अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (CMD) के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। बाजार अब यह देखेगा कि नया नेतृत्व मार्जिन के दबाव और बढ़ती लागत की इन चुनौतियों से कैसे निपटता है।
नतीजों की घोषणा के बाद नेस्ले इंडिया के शेयरों में 5.1% तक की गिरावट आई, और अब यह ₹2,326 पर कारोबार कर रहा है।
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