New Pamban Bridge: तमिलनाडु में समुद्र की लहरों पर शान से खड़ा हो रहा नया पंबन रेलवे ब्रिज आजकल चर्चा में है, लेकिन एक चिंताजनक सवाल के साथ – क्या इसके विशाल खंभों को बनने से पहले ही जंग खाने लगी है? पुल के कई पिलरों पर दिख रहे भूरे निशान देखकर हर किसी के मन में यही सवाल उठ रहा है। क्या इंजीनियरिंग का यह नायाब नमूना शुरुआत में ही कमजोर पड़ रहा है?
रेलवे ने खोला राज़ – यह जंग नहीं, सुरक्षा कवच है!
इस वायरल चिंता को दूर करने के लिए, हमने इस भव्य पुल का निर्माण कर रही रेलवे की कंपनी रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) से संपर्क साधा। RVNL अधिकारियों ने पूरी तरह आश्वस्त करते हुए बताया कि पिलरों पर जो जंग जैसा दिख रहा है, वह असली पिलरों पर नहीं, बल्कि उन मेटल के कवर (शटरिंग) पर है, जिनका इस्तेमाल कंक्रीट के पिलर को आकार देने और ढालने के लिए किया गया था। ये कवर अस्थायी हैं और इन्हें हटा दिया जाएगा या ये खुद ही समय के साथ निकल जाएँगे। यह पुल की सुरक्षा के लिए एक प्रक्रिया का हिस्सा है और इससे पुल की मजबूती या उम्र पर कोई खतरा नहीं है।
सिर्फ पुल नहीं, इंजीनियरिंग का जादू है नया पंबन ब्रिज!
यह सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग का जीता-जागता प्रमाण है:
-
एशिया का पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज: यह 2.08 किलोमीटर लंबा पुल सिर्फ ट्रेनों को ही नहीं दौड़ाएगा, बल्कि बड़े जहाजों को रास्ता भी देगा! इसका 72.5 मीटर लंबा बीच का हिस्सा किसी जादुई लिफ्ट की तरह 17 मीटर ऊपर उठ जाता है, जिससे नीचे से समुद्री जहाज आसानी से गुजर सकें।
-
रफ्तार और मजबूती: इसे 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार झेलने के लिए डिजाइन किया गया है! हालांकि, एक मोड़ के कारण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल 75 KMPH की मंजूरी दी गई है।
-
तूफान और भूकंप में भी अडिग: यह पुल जोन-5 स्तर का भूकंप झेल सकता है और 58 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाओं में भी इस पर ट्रेनें चल सकेंगी।
-
100 साल से ज्यादा उम्र: खास तरह के पेंट और मजबूत निर्माण तकनीक के कारण इस पुल की उम्र 100 साल से भी ज्यादा आंकी गई है। अकेले पेंट ही इसे 40 सालों तक समुद्री वातावरण से बचाएगा।
-
हवा से पानी बनाने वाला कंट्रोल रूम: पुल के बीच बने कंट्रोल रूम में एक अनोखी तकनीक लगी है, जो हवा की नमी (ह्यूमिडिटी) से पीने का पानी बनाती है! इससे रोज़ाना 250 लीटर तक पीने का पानी तैयार किया जा सकता है।
पुराना पुल भी कम नहीं था!
नए पुल की तारीफों के बीच, विशेषज्ञ 1914 में बने पुराने पंबन ब्रिज को भी सलाम करते हैं। नए पुल के इंजीनियर भी मानते हैं कि 111 साल पहले, बिना आधुनिक तकनीक के उस पुल को बनाना किसी चमत्कार से कम नहीं था। पुराना पुल भी जंग लगने के कारण ही रिटायर हुआ, लेकिन उसका निचला ढांचा (फाउंडेशन) आज भी बेहद मजबूत है, जिसमें शायद ही लोहा इस्तेमाल हुआ हो। पुराने पुल ने 108 साल तक देश की सेवा की।
Enjoying this post?
Subscribe to Bolbindas to get deep dives like this delivered directly to your inbox .