Next CM of Bihar: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक ही सवाल हर जुबान पर है—“नीतीश कुमार के बाद अब बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?” मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भविष्य और उनके उत्तराधिकारी को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह बस नामों की चर्चा हो रही है। लेकिन इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से एक ऐसा बयान आया है जिसने पूरी तस्वीर को एक नई दिशा दे दी है।
10 तारीख: बिहार के भविष्य का फैसला!
बीजेपी के फायरब्रांड नेता और सांसद मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) ने हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान एक ऐसी तारीख का जिक्र किया है, जिसने सस्पेंस को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि बीजेपी अगला मुख्यमंत्री किसे देख रही है, तो मनोज तिवारी ने सधे हुए अंदाज में कहा, “10 तारीख (10 अप्रैल, 2026) को सब पता चल जाएगा।”
सांसद ने साफ किया कि बीजेपी एक लोकतांत्रिक पार्टी है और यहाँ निर्णय एक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। हालांकि उन्होंने किसी खास नाम पर मुहर नहीं लगाई, लेकिन ’10 तारीख’ का जिक्र करके उन्होंने यह साफ कर दिया है कि पर्दे के पीछे बहुत कुछ पक रहा है और जल्द ही बिहार को एक नया चेहरा मिल सकता है।
नीतीश कुमार: ‘बड़े भाई’ और बिहार के शिल्पकार
मनोज तिवारी के बयान में एक तरफ जहाँ भविष्य की रणनीति दिखी, वहीं दूसरी तरफ नीतीश कुमार के प्रति सम्मान भी छलका। उन्होंने नीतीश कुमार को ‘बड़ा भाई’ बताते हुए कहा कि बिहार की वर्तमान छवि और परिस्थिति को बदलने का श्रेय उन्हें ही जाता है। तिवारी ने कहा, “नीतीश जी हमारे नेता थे और रहेंगे। उम्र का तकाजा हर किसी के साथ होता है और उन्होंने एक सही समय पर एक परिपक्व निर्णय लिया है।” उनके इस बयान से संकेत मिलते हैं कि गठबंधन में नीतीश कुमार की भूमिका भविष्य में भी मार्गदर्शक के रूप में बनी रह सकती है।
निशांत कुमार और परिवारवाद की जंग
बिहार की राजनीति में इन दिनों निशांत कुमार (Nishant Kumar), जो नीतीश कुमार के बेटे हैं, के सक्रिय राजनीति में आने की चर्चा भी जोरों पर है। विपक्ष खासकर आरजेडी (RJD) इसे ‘परिवारवाद’ का नाम दे रही है। इस पर पलटवार करते हुए मनोज तिवारी ने आरजेडी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद परिवारवाद के सबसे बड़े उदाहरण हैं, उनका नीतीश कुमार पर आरोप लगाना हास्यास्पद है। तिवारी के अनुसार, नीतीश कुमार ने हमेशा व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर उठकर काम किया है और उन पर ऐसे आरोप लगाना खुद से झूठ बोलने जैसा है।
क्या वाकई 10 तारीख को साफ होगी तस्वीर?
बिहार की राजनीति कभी भी सीधी लकीर पर नहीं चलती। मनोज तिवारी की बताई गई ’10 तारीख’ अब मील का पत्थर बन गई है। क्या बीजेपी अपना मुख्यमंत्री लाएगी? क्या नीतीश कुमार किसी नए नाम का प्रस्ताव रखेंगे? या फिर बिहार की सत्ता में कोई ऐसा चेहरा उभरेगा जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी?
फिलहाल, बिहार की जनता और राजनीतिक पंडित दोनों की नजरें 10 तारीख के कैलेंडर पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि #BiharPolitics का यह नया अध्याय राज्य की विकास गाथा में क्या नया जोड़ता है।
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