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Nitin Nabin: क्या सच में बनेगा ‘सोनार बांग्ला'? बंगाल की राजनीति में आया नया भूचाल

Nitin Nabin: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर धर्म और अधिकारों की लड़ाई तेज हो गई है। हाल ही में भाजपा नेता श्री नितिन नवीन ने कोलकाता में मां काली के दर्

Malvika
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2026-03-25
Nitin Nabin: क्या सच में बनेगा ‘सोनार बांग्ला'? बंगाल की राजनीति में आया नया भूचाल
Nitin Nabin: क्या सच में बनेगा ‘सोनार बांग्ला'? बंगाल की राजनीति में आया नया भूचाल

Nitin Nabin: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर धर्म और अधिकारों की लड़ाई तेज हो गई है। हाल ही में भाजपा नेता श्री नितिन नवीन ने कोलकाता में मां काली के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। लेकिन इस भक्ति भाव के बीच उन्होंने एक ऐसी कड़वी सच्चाई को उजागर किया, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। नितिन नवीन ने बंगाल की मौजूदा स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राज्य सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

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पूजा के लिए अदालत के चक्कर और नमाज के लिए ‘ग्रीन सिग्नल’?

मां काली के दरबार में मत्था टेकने के बाद मीडिया से बात करते हुए नितिन नवीन ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस बंगाल की धरती पर दुर्गा पूजा और काली पूजा का उत्सव पूरी दुनिया में मशहूर है, आज वहां की जनता को अपने इष्ट देव के पंडाल लगाने के लिए उच्च न्यायालय (High Court) के दरवाजे खटखटाने पड़ रहे हैं।

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उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “इस राज्य में पूजा पंडाल लगाने के लिए हमें कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है, कानूनी लड़ाइयां लड़नी पड़ती हैं, जबकि दूसरी ओर नमाज पढ़ने या धार्मिक आयोजनों के लिए बहुत ही आसानी से अनुमति मिल जाती है। यह दोहरा मापदंड और भेदभाव लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।”

बंगाल में ‘सोनार बांग्ला’ का संकल्प

नितिन नवीन ने केवल अपनी शिकायतें ही दर्ज नहीं कीं, बल्कि उन्होंने मां काली से पश्चिम बंगाल के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की। उन्होंने कहा कि उन्होंने मां के चरणों में प्रार्थना की है कि बंगाल को फिर से वही गौरव प्राप्त हो, जिसके लिए वह जाना जाता था। उनका लक्ष्य बंगाल को ‘सोनार बांग्ला’ और ‘विकसित बंगाल’ बनाना है।

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उन्होंने जोर देकर कहा कि बंगाल की संस्कृति और विरासत को बचाना हर भारतीय का कर्तव्य है। तुष्टीकरण की राजनीति ने बंगाल के विकास को रोक दिया है और समाज में दूरियां पैदा कर दी हैं। नितिन नवीन के अनुसार, ‘सोनार बांग्ला’ का सपना तभी साकार होगा जब राज्य में सभी को समान अधिकार मिलेंगे और विकास की मुख्यधारा से हर नागरिक जुड़ेगा।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

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नितिन नवीन के इस बयान ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। जहां भाजपा समर्थक इसे हिंदुओं के प्रति हो रहे भेदभाव के खिलाफ एक साहसी आवाज बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे चुनावी ध्रुवीकरण की कोशिश करार दे रहे हैं। हालांकि, आम जनता के बीच यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या वाकई बंगाल में धार्मिक आयोजनों के लिए अब अदालतों पर निर्भर रहना पड़ेगा? श्री नितिन नवीन का यह दौरा केवल धार्मिक नहीं था, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी था।

मां काली के दरबार से उन्होंने बंगाल की जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि उनके अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी। अब देखना यह है कि ‘विकसित बंगाल’ और ‘सोनार बांग्ला’ का यह संकल्प आने वाले समय में कितनी हकीकत बन पाता है।

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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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