जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पहली बार खुलकर उस खौफनाक रात की हकीकत बयां की जब पहलगाम हमले के बाद पर्यटक कश्मीर छोड़ गए थे। जानिए गुजरात की धरती से उन्होंने क्यों एक भावुक अपील की और अब घाटी के क्या हालात हैं।
Omar Abdullah: जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत वादियों पर हुए गहरे जख्मों की टीस और भविष्य की उम्मीदों को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) गुजरात दौरे पर हैं। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए दिल दहला देने वाले आतंकी हमले (Pahalgam Terrorist Attack) के बाद, गुरुवार (31 जुलाई) को उन्होंने पहली बार खुलकर इस त्रासदी और इसके कश्मीर पर्यटन (Kashmir Tourism) पर पड़े विनाशकारी प्रभाव पर बात की। गुजरात की धरती से उन्होंने एक भावुक स्वीकारोक्ति भी की और देश को एक अहम संदेश भी दिया।
उमर अब्दुल्ला का यह गुजरात दौरा सिर्फ एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि जन्नत-ए-कश्मीर के पर्यटन उद्योग को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने का एक मिशन है। इस दौरान उन्होंने केवड़िया में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ और नर्मदा बांध का दौरा किया और अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर सुबह की सैर करते हुए गुजरात मॉडल की सराहना की।
“एक हमला और सब बदल गया… लोग रातोंरात कश्मीर छोड़ गए”
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला का दर्द साफ छलक आया। उन्होंने इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार किया कि 22 अप्रैल को पहलगाम में पर्यटकों पर हुए क्रूर आतंकी हमले ने राज्य के पर्यटन को एक गहरा और ना भरने वाला जख्म दिया। इस हमले में गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के 26 बेगुनाह पर्यटकों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरी घाटी में डर और दहशत का एक खौफनाक माहौल बन गया था।
उन्होंने कहा, “हम इस सच्चाई से अपनी आंखें नहीं मूंद सकते कि उस एक हमले ने हमारे व्यस्त पर्यटन सीजन की शुरुआत में ही सब कुछ बदल कर रख दिया था। मंजर इतना भयानक था कि लोग रातोंरात कश्मीर छोड़कर चले गए थे। होटलें खाली हो गई थीं, बाजारों में सन्नाटा पसर गया था।”
‘कश्मीर खाली नहीं हुआ है, उम्मीद अभी बाकी है’
इस दर्दनाक सच्चाई को बयां करने के साथ ही, उमर अब्दुल्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि इन चुनौतियों के बावजूद कश्मीर ने हार नहीं मानी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि घाटी पूरी तरह से पर्यटकों से खाली नहीं हुई है और उम्मीद की किरण अभी भी बाकी है। उन्होंने कहा, “पर्यटन उद्योग से जुड़े हमारे लोग निराश होकर नहीं बैठे हैं। हम सब मिलकर राज्य में फिर से पर्यटकों को आकर्षित करने और उनका भरोसा जीतने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।”
उन्होंने इसका उदाहरण देते हुए कहा, “आज भी लाखों श्रद्धालु माँ वैष्णो देवी (Mata Vaishno Devi) और अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंच चुके हैं और उनकी यात्रा पूरी तरह सुरक्षित है। हम गुजरात इसलिए आए हैं ताकि पूरे देश को यह संदेश दे सकें कि कश्मीर आज भी उतना ही सुरक्षित और खूबसूरत पर्यटन स्थल है, जितना वह हमेशा से था। हम डर नहीं, भरोसा चाहते हैं।”
गुजरात मॉडल से लेंगे प्रेरणा, कश्मीर में भी बनेंगे रिवरफ्रंट
अपने गुजरात दौरे की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और साबरमती रिवरफ्रंट जैसे विकास के मॉडल प्रेरणादायक हैं और इन्हें जम्मू-कश्मीर में भी अपनाया जा सकता है। उमर ने दोहराया कि उनका एकमात्र लक्ष्य यह है कि देश के अन्य हिस्सों से लोग बिना किसी डर के, पूरे भरोसे के साथ कश्मीर की वादियों का आनंद लेने आएं। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि पर्यटन सिर्फ एक उद्योग नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की पहचान, संस्कृति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है, और इस रीढ़ को फिर से मजबूत करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
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