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Parliament Special Session: क्या बदल जाएगा भारत का भूगोल? परिसीमन बिल पर छिड़ा भीषण युद्ध, मोदी की ‘गारंटी' और विपक्ष का ‘छलावा' आरोप

Parliament Special Session: भारत के संसदीय इतिहास में कुछ पल ऐसे आते हैं जो सदियों तक याद रखे जाते हैं। वर्तमान में चल रहा संसद का विशेष सत्र (Special Parliamen

Malvika
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2026-04-17
Parliament Special Session: क्या बदल जाएगा भारत का भूगोल? परिसीमन बिल पर छिड़ा भीषण युद्ध, मोदी की ‘गारंटी' और विपक्ष का ‘छलावा' आरोप
Parliament Special Session: क्या बदल जाएगा भारत का भूगोल? परिसीमन बिल पर छिड़ा भीषण युद्ध, मोदी की ‘गारंटी' और विपक्ष का ‘छलावा' आरोप

Parliament Special Session: भारत के संसदीय इतिहास में कुछ पल ऐसे आते हैं जो सदियों तक याद रखे जाते हैं। वर्तमान में चल रहा संसद का विशेष सत्र (Special Parliament Session) कुछ इसी तरह के रोमांच और राजनीतिक दांव-पेंचों से भरा हुआ है। सत्र के दूसरे दिन की शुरुआत जहां गरिमापूर्ण रही, वहीं परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों ने सदन के तापमान को बढ़ा दिया है।

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हरिवंश नारायण सिंह की ‘हैट्रिक’: सदन का भरोसा बरकरार
दिन की शुरुआत राज्यसभा के लिए एक सुखद खबर के साथ हुई। हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) निर्विरोध रूप से तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गए। यह न केवल उनके व्यक्तिगत अनुभव की जीत है, बल्कि सदन की उस कार्यशैली का सम्मान है जिसमें सबको साथ लेकर चलने का प्रयास झलकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह सदन का उनके प्रति गहरा विश्वास है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी उनकी योग्यता की सराहना की, जो भारतीय लोकतंत्र की एक खूबसूरत तस्वीर पेश करता है।

परिसीमन बिल: आखिर क्यों डरा हुआ है विपक्ष?
जैसे ही उपसभापति का चुनाव संपन्न हुआ, सदन की कार्यवाही उस मुद्दे पर मुड़ गई जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है— परिसीमन बिल (Delimitation Bill)। गुरुवार से शुरू हुआ हंगामा शुक्रवार को भी जारी रहा। विपक्ष का सबसे बड़ा आरोप यह है कि सरकार महिला आरक्षण (Women Reservation Bill) की आड़ में ‘बैकडोर’ से परिसीमन लागू करना चाहती है।

विपक्षी दलों का तर्क है कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में तो हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना एक ‘छलावा’ है। उनकी आशंका है कि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ, तो दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है, जो उनके साथ अन्याय होगा।

अमित शाह का डेटा और दक्षिण भारत का गणित
इस पूरे विवाद के बीच गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कमान संभाली। उन्होंने विपक्ष के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक ‘नैरेटिव’ करार दिया। शाह ने स्पष्ट किया कि परिसीमन के बाद दक्षिण के राज्यों की ताकत कम नहीं होगी, बल्कि बढ़ेगी। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि वर्तमान में दक्षिण के राज्यों की जो 129 लोकसभा सीटें हैं, वे परिसीमन के बाद बढ़कर 195 हो जाएंगी। उदाहरण के तौर पर, तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 होने का अनुमान है। गृहमंत्री ने साफ कहा कि जनगणना एक पारदर्शी प्रक्रिया है और इसमें किसी भी तरह का भ्रम फैलाना देश के हित में नहीं है।

प्रियंका गांधी का तीखा हमला: “महिलाएं पहचान लेती हैं…”
सत्र के दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) के बयानों ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाएं उन पुरुषों को पहचान लेती हैं जो बार-बार बहकाने की कोशिश करते हैं। प्रियंका ने सवाल उठाया कि 2011 की जनगणना को आधार बनाकर सरकार दक्षिण के राज्यों का हक छीनना चाहती है, जिसे कांग्रेस कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने संसद के 50% विस्तार के प्रस्ताव पर भी सवाल खड़े किए और नियमों की स्पष्टता की मांग की।

मोदी की गारंटी: “किसी के साथ नहीं होगा भेदभाव”
इन तमाम आरोपों और हंगामे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में अपना पक्ष रखा। उन्होंने बड़े ही भावुक और विश्वास भरे अंदाज में कहा कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसे ‘मोदी की गारंटी’ बताया। पीएम मोदी ने विपक्ष को एक बड़ा ऑफर देते हुए कहा, “मैं क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं, विपक्ष चाहे तो इसका श्रेय ले सकता है, लेकिन देश के विकास और महिलाओं के हक में बाधा न बनें।”

क्या होगा आगे?
संसद का यह विशेष सत्र अब निर्णायक मोड़ पर है। एक तरफ सरकार इसे नए भारत के निर्माण और महिलाओं के सशक्तिकरण का जरिया बता रही है, वहीं विपक्ष इसे क्षेत्रीय असंतुलन का खतरा मान रहा है। क्या महिला आरक्षण और परिसीमन का यह मेल भारत की राजनीति की दिशा बदल देगा? यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा, लेकिन फिलहाल दिल्ली की गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।


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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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