कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने करीब 25 सांसदों के साथ मंगलवार (21 जुलाई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के बाहर अचानक एक गुप्त धरना प्रदर्शन किया। इस सरप्राइज धरने ने न केवल दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया, बल्कि खुद प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस सांसदों को भी आखिरी क्षण तक इस योजना की भनक नहीं थी। नीट (NEET) पेपर लीक और छात्रों पर सोमवार को हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में आयोजित इस गुप्त प्रदर्शन को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल ने बेहद खुफिया तरीके से अंजाम दिया, जिसके बाद पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया।
मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन को बनाया गया सुरक्षा कवच
असद रहमान की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास के बाहर इस गुप्त धरने की योजना को बेहद खुफिया रखा गया था ताकि दिल्ली पुलिस या खुफिया विभाग को इसकी कोई भनक न लगे। इसके लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अपने ही सांसदों से भी इस योजना को छिपाकर रखा। प्रदर्शन में शामिल करीब 25 सांसदों को केवल यह सूचना दी गई थी कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन के अवसर पर उनके आवास (10, राजाजी मार्ग) पहुंचना है।
खरगे का आवास प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। सांसदों को लगा कि वे केवल जन्मदिन की बधाई देने और केक काटने के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए एकत्र हुए हैं।
‘बिना कोई सवाल पूछे राहुल गांधी के काफिले के पीछे चलें’
एक कांग्रेस सांसद ने बताया, “हमें सिर्फ इतना कहा गया था कि हमें खरगे जी को बधाई देने का मौका मिलेगा और हमें उनके घर पहुंचना चाहिए। जब जन्मदिन का कार्यक्रम समाप्त हो गया, तो हमसे कहा गया कि बिना कोई सवाल पूछे राहुल गांधी के काफिले के पीछे-पीछे अपनी गाड़ियां लगाएं।”
सांसदों ने ठीक वैसा ही किया। वे राहुल गांधी के काफिले के पीछे चलते हुए सीधे 7, लोक कल्याण मार्ग यानी प्रधानमंत्री आवास के बाहर पहुंच गए। वहां पहुंचते ही उन्हें बताया गया कि उन्हें यहीं जमीन पर बैठकर धरना देना है। इस प्रकार गांधी भाई-बहन (राहुल और प्रियंका गांधी) और केसी वेणुगोपाल द्वारा तैयार किए गए इस खुफिया प्लान को पूरी तरह से लागू किया गया।
नीट पेपर लीक विवाद के बीच कांग्रेस का बड़ा राजनीतिक दांव
यह अचानक किया गया गुप्त प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब देश में नीट (NEET-UG) पेपर लीक मामले और सोमवार को प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भारी नाराजगी है। इस गुप्त धरने के जरिए कांग्रेस ने इस मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास किया है।
जंतर-मंतर पर पहले से ही सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले गैर-कांग्रेसी विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं। मंगलवार को ही एनसीपी (सपा) प्रमुख शरद पवार और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की थी। इसी राजनीतिक होड़ के बीच, कांग्रेस ने सीधे प्रधानमंत्री आवास को घेरने का फैसला किया। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले एनसीपी (सपा) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी लोक कल्याण मार्ग पहुंचकर राहुल और प्रियंका गांधी के इस धरने का समर्थन किया।
FAQ:
Q1: राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के बाहर धरने की योजना को कैसे गुप्त रखा?
A1: पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना होने से रोकने के लिए सांसदों को केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन समारोह के लिए 10, राजाजी मार्ग पहुंचने को कहा गया था, जो प्रधानमंत्री आवास से मात्र 500 मीटर दूर है।
Q2: सांसदों को इस गुप्त धरने के बारे में कब पता चला?
A2: खरगे के आवास पर जन्मदिन की बधाई देने का कार्यक्रम खत्म होने के बाद, सांसदों को बिना कोई सवाल पूछे राहुल गांधी के काफिले के पीछे चलने का निर्देश दिया गया। जब वे 7, लोक कल्याण मार्ग पहुंचे, तब उन्हें धरने पर बैठने के लिए कहा गया।
Q3: इस गुप्त धरने को किसने तैयार किया था और इसका मुख्य राजनीतिक संदर्भ क्या था?
A3: इस गुप्त धरने की योजना को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल ने मिलकर तैयार किया था। इसका उद्देश्य नीट (NEET) पेपर लीक और छात्रों पर सोमवार को हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध दर्ज कराना था।
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