PM : भारत और चीन के रिश्तों में एक बड़े और ऐतिहासिक घटनाक्रम के तहत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की यात्रा करेंगे। यह यात्रा इसलिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 2020 में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुए खूनी संघर्ष के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी का पहला चीन दौरा होगा। इस उच्च-स्तरीय यात्रा पर न केवल भारत और चीन, बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों एशियाई महाशक्तियां अपने तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने और संवाद के माध्यम से मुद्दों को हल करने के प्रयासों में जुटी हैं। सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध और व्यापारिक मतभेदों के बीच, पीएम मोदी की इस यात्रा को दोनों देशों के बीच जमी हुई बर्फ पिघलाने की एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उम्मीद है कि SCO शिखर सम्मेलन के मंच पर दोनों शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुद्दों, खासकर सीमा पर शांति बहाली को लेकर गंभीर चर्चा हो सकती है।
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पिछली द्विपक्षीय मुलाकात अक्टूबर 2024 में रूस में आयोजित हुए ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस मुलाकात के बाद अब एससीओ के मंच पर होने वाली यह संभावित सीधी बातचीत, एशिया और वैश्विक भू-राजनीति की भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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