Rahul Gandhi: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में हुए चुनावों में बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली का गंभीर आरोप लगाया है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, राहुल गांधी ने दावा किया कि मतदाता सूची (voter list) में हजारों ऐसे नाम मौजूद हैं, जिनके पते या तो फर्जी हैं या फिर अधूरे हैं. उन्होंने इसे लोकतंत्र पर एक सीधा हमला बताते हुए कई चौंकाने वाले उदाहरण पेश किए, जो चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
फर्जी पते और अजीबोगरीब नामों का जाल
राहुल गांधी ने विशेष रूप से कर्नाटक की बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट का जिक्र करते हुए कुछ ऐसे मतदाताओं के नाम स्क्रीन पर दिखाए, जिनके बारे में जानकर कोई भी हैरान रह जाएगा. उन्होंने बताया कि वोटर लिस्ट में ऐसे दर्जनों नाम हैं, जिनके घर का नंबर ‘शून्य’ (zero) दर्ज था. इन मतदाताओं में महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं. इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि इन मतदाताओं के पिता या पति के नाम के कॉलम में अर्थहीन अंग्रेजी के अक्षर (random English letters) लिखे हुए थे, जो किसी भी वास्तविक नाम से मेल नहीं खाते.
एक प्रमुख उदाहरण देते हुए, राहुल गांधी ने टीका कुमारी आचार्य नाम की एक 35 वर्षीय महिला वोटर का मामला सामने रखा. उनका EPIC नंबर SVF8280943 है, और उनके घर का नंबर शून्य है. उनके पति का नाम ‘YTDTR’ लिखा हुआ है, जो स्पष्ट रूप से एक काल्पनिक नाम प्रतीत होता है.
इसी तरह, एक और 40 वर्षीय मतदाता, टेक राज सपकोटा, का EPIC नंबर SVF8249344 है. उनके पिता का नाम ‘DFOGADF’ के रूप में सूचीबद्ध है, और उनका भी घर का नंबर शून्य है. बूथ नंबर 432 की एक 38 वर्षीय मतदाता, सरिता देवी, के पिता का नाम ‘ITSDLHUG’ लिखा है, और उनका घर का पता भी शून्य है.
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि इस तरह की धांधलियां तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित हैं:
- अस्तित्वहीन पते: ऐसे पते जिनका कोई वास्तविक अस्तित्व ही नहीं है.
- शून्य पते: जहां घर का नंबर, गली का नंबर, सब कुछ शून्य है.
- असत्यापित पते: ऐसे पते जिन्हें सत्यापित करना असंभव है.
कांग्रेस नेता के अनुसार, अकेले बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र में ऐसे लगभग 40,000 फर्जी मतदाता (bogus voters) पाए गए हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं.
एक कमरे के घर में 80 वोटर और बीयर क्लब में 68 लोग: हैरान करने वाले खुलासे
मतदाता सूची में गड़बड़ी का आलम यह था कि एक ही पते पर दर्जनों मतदाता पंजीकृत थे. राहुल गांधी ने बूथ नंबर 470 का एक चौंकाने वाला उदाहरण दिया, जहां एक छोटे से एक कमरे के घर में 80 मतदाता रहते हुए दिखाए गए थे. जब कांग्रेस की टीम ने उस पते का दौरा किया, तो वहां ऐसा कुछ भी नहीं मिला जो इस दावे की पुष्टि कर सके.
एक और हैरान करने वाला मामला बूथ नंबर 366 का था, जहां 46 मतदाता, जो अलग-अलग परिवारों से थे, एक ही बेडरूम के घर में पंजीकृत थे. राहुल गांधी ने बताया, “जब हम वहां गए, तो हमें उनमें से किसी का भी कोई निशान नहीं मिला.”
इससे भी आगे बढ़कर, राहुल गांधी ने एक और अविश्वसनीय उदाहरण पेश किया. उन्होंने सवाल किया, “क्या बीयर बनाने की जगह, ‘153 BIERE क्लब’ में 68 लोग रह सकते हैं?” जब उनकी टीम ने इस पते पर जाकर पूछताछ की, तो उन्हें कोई जवाब नहीं मिला कि ये लोग कौन थे और कहां गए. यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि चुनावी सूची में हेरफेर करने के लिए वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों का भी इस्तेमाल किया गया.
अस्पष्ट तस्वीरें और फॉर्म-6 का दुरुपयोग
राहुल गांधी ने यह भी बताया कि 4,132 मतदाताओं की तस्वीरें या तो अस्पष्ट (blurry photos) थीं या फिर इतनी छोटी थीं कि उनकी पहचान करना संभव नहीं था. यह चुनावी कदाचार (electoral malpractice) का एक और गंभीर रूप है, जो प्रॉक्सी वोटिंग को बढ़ावा दे सकता है.
पहली बार बने मतदाताओं (first-time voters) के पंजीकरण में भी भारी गड़बड़ियां पाई गईं. लगभग 33,692 मतदाताओं के नाम पर फॉर्म-6 का गलत इस्तेमाल किया गया, जो नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए होता है. उन्होंने 70 वर्षीय शकुन रानी का उदाहरण दिया, जिनका नाम मतदाता सूची में दो बार दर्ज था. उनके नाम पर फॉर्म-6 का दुरुपयोग करके दो बार वोट डाला गया.
राहुल गांधी ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि यह केवल कुछ उदाहरण हैं, और इस तरह की धांधली एक संगठित पैमाने पर की गई ہے. उन्होंने कहा कि अकेले एक लोकसभा क्षेत्र में 33,000 से अधिक लोगों ने इस तरह के अवैध तरीकों का इस्तेमाल किया, जो भारतीय लोकतंत्र (Indian democracy) की जड़ों को कमजोर करता है. उन्होंने चुनाव आयोग (Election Commission) से इस मामले की गहन जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की.
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