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RBI: भारत लाया 100 टन सोना, जानें क्यों उठाया यह बड़ा कदम?

RBI: भारत के आर्थिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला! भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान विदेशी तिजोरियों से 100.32 मीट्रिक टन

Chetan
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2025-06-28
RBI: भारत लाया 100 टन सोना, जानें क्यों उठाया यह बड़ा कदम?
RBI: भारत लाया 100 टन सोना, जानें क्यों उठाया यह बड़ा कदम?

RBI: भारत के आर्थिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला! भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान विदेशी तिजोरियों से 100.32 मीट्रिक टन सोने (100.32 Metric Tons Gold Repatriation) को वापस भारत में मंगाया है। केंद्रीय बैंक का यह अभूतपूर्व कदम देश के कुल सोने के भंडार (India’s Total Gold Reserve) में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है, जो अब बढ़कर 200.06 मीट्रिक टन हो गया है। इस रणनीतिक चाल के बाद, 31 मार्च 2024 तक विदेशों में रखा गया सोने का भंडार (Foreign Gold Holdings) 413.79 मीट्रिक टन से घटकर 31 मार्च 2025 तक 367.60 मीट्रिक टन (Gold Reserves in India) रह गया है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के लिए एक नया सुरक्षा कवच प्रदान करेगा। यह भारत का सोने का भंडार बढ़ाने की दिशा में एक अहम निर्णय है।

यह कदम क्यों उठाया गया? वैश्विक अनिश्चितताओं से सुरक्षा का कवच!

आरबीआई (RBI Latest Update) की तरफ से यह ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण कदम दुनियाभर में बढ़ती अनिश्चितता (Global Economic Uncertainty) के मौजूदा माहौल के जवाब में उठाया गया है। विशेषकर, अमेरिका में होने वाले संभावित राजनीतिक बदलाव (US Political Changes)अंतर्राष्ट्रीय टैरिफ (International Tariffs) पर बहस और आर्थिक मंदी (Economic Slowdown) की आशंका जैसे कारकों ने केंद्रीय बैंकों को अपनी नीतियों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर किया है। ऐसे अस्थिर हालात में, केंद्रीय बैंक (Central Bank Strategy) हमेशा सोने जैसे सुरक्षित निवेश (Gold as Safe Haven Investment) पर ध्यान केंद्रित करते हैं। सोना, अपनी अंतर्राष्ट्रीय तरलता (International Liquidity) और संकट के समय मूल्य बनाए रखने (Value Retention) की क्षमता के कारण, आर्थिक अस्थिरता (Economic Volatility) के खिलाफ एक प्रभावी बचाव (Hedge) के रूप में कार्य करता है। भारतीय रिजर्व बैंक का यह फैसला भारत की आर्थिक सुरक्षा (India’s Economic Security) को और मजबूत करेगा, जिससे भू-राजनीतिक जोखिमों (Geopolitical Risks) का सामना करने की क्षमता बढ़ेगी।

भारतीय सोने का अधिकांश भंडार अब भी बैंक ऑफ इंग्लैंड में

सामान्यतः, आरबीआई (Reserve Bank of India) ज़रूरत पड़ने पर स्थानीय सोने की कीमतें नियंत्रित (Control Local Gold Prices) करने और बाजार में स्थिरता (Market Stability) बनाए रखने के लिए सोने का उपयोग कर सकता है। हालांकि विदेशों में सोना रखना (Gold Holdings Abroad) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार (International Trade) और अंतर्राष्ट्रीय कमाई (International Earnings) के लिए अधिक सुविधाजनक और कुशल होता है, यह भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) या युद्ध जैसी असाधारण परिस्थितियों में सुरक्षा जोखिम (Security Risk) बढ़ा देता है।

फिलहाल, भारत का अधिकांश सोने का भंडार (India’s Major Gold Reserve) उच्च सुरक्षा के बीच बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) में रखा जाता है। इसके अतिरिक्त, कुछ सोने की मात्रा स्विट्जरलैंड के बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (Bank for International Settlements – BIS) और न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक (Federal Reserve Bank, New York) में भी रखी जाती है। विदेशों से सोना भारत लाने (Gold Repatriation) का यह कदम दर्शाता है कि भारत सरकार अपनी राष्ट्रीय संपत्ति को देश के भीतर सुरक्षित रखना चाहती है, खासकर जब वैश्विक अस्थिरता (Global Instability) का माहौल हो।

मार्च 2025 तक आरबीआई के पास कुल 879.58 मीट्रिक टन सोना!

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2024 को भारत के सोने के भंडार का मूल्य ₹2,74,714.27 करोड़ रुपये था। एक वर्ष के भीतर, 31 मार्च 2025 तक, इस सोने के भंडार का मूल्य (Gold Reserve Value) उल्लेखनीय रूप से बढ़कर ₹4,31,624.80 करोड़ रुपये हो गया है। यह 57.12% की भारी वृद्धि (Significant Increase) है, जो न केवल सोने की बढ़ी हुई मात्रा, बल्कि इसके मूल्य में भी तेज बढ़ोतरी को दर्शाती है।

इस प्रभावशाली मूल्य वृद्धि (Value Increase) के कई कारण हैं। पहला प्रमुख कारण 54.13 मीट्रिक टन अतिरिक्त गोल्‍ड का अधिग्रहण (Additional Gold Acquisition) है, जिसने कुल भंडार में वृद्धि की है। दूसरा कारण सोने की अंतर्राष्ट्रीय कीमत में इजाफा (Gold Price Hike) है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर सोने के भाव काफी बढ़े हैं। तीसरा महत्वपूर्ण कारक भारतीय रुपये का अवमूल्यन (Indian Rupee Devaluation) है, जिसने रुपये के मुकाबले सोने के मूल्य को और बढ़ा दिया है। 31 मार्च 2025 तक, भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के पास कुल 879.58 मीट्रिक टन सोना (Total Gold Reserves of RBI) था, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 822.10 मीट्रिक टन था।

इस कुल सोने के भंडार (Total Gold Stock) को दो प्रमुख विभागों में विभाजित किया गया है:

  • 311.38 मीट्रिक टन सोना इश्यू डिपार्टमेंट (Issue Department) के पास रखा गया है (जो पिछले साल 308.03 मीट्रिक टन था)।
  • जबकि 568.20 मीट्रिक टन सोना बैंकिंग डिपार्टमेंट (Banking Department) के पास है (जो पिछले साल 514.07 मीट्रिक टन था)।

रिजर्व बैंक की तरफ से उठाया गया यह दूरदर्शी कदम भारत की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत (Strengthening India’s Economic Security) करता है। सोने का भंडार बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता (Economic Stability) मिलेगी और यह ग्लोबल अन‍िश्‍च‍ितताओं (Global Uncertainties) और वैश्विक आर्थिक मंदी (Global Economic Downturn) से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद करेगा, जिससे भारतीय रुपया (Indian Rupee) और वित्तीय प्रणाली (Financial System) को एक मजबूत आधार मिलेगा। यह सोने की कीमत पर भी अप्रत्यक्ष रूप से असर डालेगा।


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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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