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Russian oil sanctions: क्या अब भारत में लगेगा पेट्रोल-डीजल का अकाल? अमेरिका के एक फैसले से मचा हड़कंप

Russian oil sanctions: दुनिया के नक्शे पर जब भी युद्ध या तनाव की स्थिति पैदा होती है, उसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। हाल ही में मिडिल ईस्ट (Middle Eas

Malvika
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2026-04-17
Russian oil sanctions: क्या अब भारत में लगेगा पेट्रोल-डीजल का अकाल? अमेरिका के एक फैसले से मचा हड़कंप
Russian oil sanctions: क्या अब भारत में लगेगा पेट्रोल-डीजल का अकाल? अमेरिका के एक फैसले से मचा हड़कंप

Russian oil sanctions: दुनिया के नक्शे पर जब भी युद्ध या तनाव की स्थिति पैदा होती है, उसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। हाल ही में मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया था। उस दौरान, अमेरिका ने चतुराई दिखाते हुए रूसी और ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में कुछ ढील दी थी। भारत जैसे देशों ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जी-जान से खरीदारी की। लेकिन अब खबर आ रही है कि खुशियों के ये दिन खत्म होने वाले हैं।

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अमेरिका का वो फैसला, जिसने उड़ा दी नींद
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) ने हाल ही में एक ऐसी घोषणा की है, जिसने ग्लोबल ऑयल मार्केट में खलबली मचा दी है। बेसेंट ने साफ कर दिया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका अब रूसी और ईरानी तेल आयात पर दी गई प्रतिबंधों की छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा। व्हाइट हाउस में हुई एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने दो टूक कहा, “हम रूसी और ईरानी तेल पर लागू सामान्य लाइसेंस को रिन्यू नहीं करेंगे।” इसका सीधा मतलब यह है कि जो राहत भारत और अन्य देशों को मिल रही थी, उसका दरवाजा अब बंद होने जा रहा है।

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समय सीमा समाप्त: अब क्या होगा?
नियमों के मुताबिक, 12 मार्च से पहले लोड किए गए रूसी कार्गो के लिए जो 30 दिनों का लाइसेंस मिला था, वह अब खत्म हो चुका है। वहीं, ईरानी तेल के लिए मिली विशेष छूट भी 19 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी। यह भारत के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि मार्च 2026 (अनुमानित डेटा) में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात नौ महीनों के उच्चतम स्तर (करीब 1.96 मिलियन बैरल प्रति दिन) पर पहुंच गया था। फरवरी के मुकाबले इसमें 53% की भारी बढ़त देखी गई थी, जिसका मुख्य कारण यही अमेरिकी छूट थी।

क्या भारत के पास है ‘प्लान-बी’?
अब सवाल उठता है कि अगर रूस और ईरान से सस्ता तेल आना बंद हो गया, तो क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की किल्लत हो जाएगी? भारत सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय इस स्थिति को लेकर पहले से ही सतर्क हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, भारत ने अपनी तेल आपूर्ति की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। भारत अब केवल एक या दो देशों पर निर्भर नहीं है, बल्कि उसने दुनिया के 40 से अधिक देशों से तेल आयात करने की व्यवस्था कर ली है।

भारत के नए ‘संकटमोचक’ देश
रूस और ईरान का विकल्प ढूंढने के लिए भारत अब लैटिन अमेरिका (Latin America) की ओर देख रहा है। इस लिस्ट में ये देश सबसे ऊपर हैं:

  1. ब्राजील, कोलंबिया और इक्वाडोर: ये देश भारतीय रिफाइनरियों के लिए महत्वपूर्ण सप्लायर बनकर उभरे हैं।

  2. गुयाना: यह दुनिया का सबसे तेजी से उभरता हुआ तेल निर्यातक है, जिस पर भारत की पैनी नजर है।

  3. अफ्रीकी देश: नाइजीरिया और अंगोला जैसे देशों से स्थिर मात्रा में तेल मिलने की उम्मीद है, जो खाड़ी देशों का एक मजबूत विकल्प पेश करते हैं।

  4. अमेरिका: भारत अब अमेरिका से ‘शेल ऑयल’ (Shale Oil) की खरीदारी भी बढ़ा सकता है, जो मात्रा और भरोसे, दोनों के मामले में खरा उतरता है।

आम आदमी पर क्या होगा असर?
हालांकि भारत ने अपने पास विकल्पों की लंबी फेहरिस्त तैयार कर रखी है, लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि रूस से मिलने वाला ‘डिस्काउंटेड’ यानी रियायती तेल अब मिलना मुश्किल होगा। नए विकल्पों से तेल मंगाने पर भारत की आयात लागत (Import Cost) बढ़ सकती है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें इसी तरह चढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। भारत की ‘ऊर्जा सुरक्षा’ (Energy Security) फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन चुनौती अब कीमतों को काबू में रखने की होगी।


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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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