Samrat Choudhary CM Bihar: बिहार की राजनीति में कभी कुछ भी स्थिर नहीं रहता, लेकिन 18 अप्रैल 2026 की तारीख ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में जो हलचल मचाई है, उसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) के मुख्यमंत्री बनने के फैसले ने न केवल उनके समर्थकों को चौंकाया है, बल्कि उनके धुर विरोधियों को भी एक ही पाले में लाकर खड़ा कर दिया है। सबसे हैरान करने वाली प्रतिक्रिया आई है पूर्णिया के बाहुबली सांसद पप्पू यादव (Pappu Yadav) की ओर से, जिन्होंने कभी सम्राट के खिलाफ मोर्चा खोला था, लेकिन आज वे उनके सबसे बड़े ढाल बनकर उभरे हैं।
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पप्पू यादव का तीखा प्रहार: “हमाम में सब नंगे हैं!”
शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान पप्पू यादव का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। उन्होंने बीजेपी के उन नेताओं को निशाने पर लिया जो सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने पर दबी जुबान में विरोध कर रहे हैं। पप्पू यादव ने दो टूक शब्दों में कहा, “अगर एक गरीब और ओबीसी (OBC) परिवार के लड़के को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिल गई है, तो अब उसे कुछ दिन बख्श दीजिए।
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पप्पू यादव का गुस्सा यहीं नहीं थमा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज जो लोग सम्राट चौधरी को ‘अपराधी’ बता रहे हैं, वे खुद कितने दूध के धुले हैं? उन्होंने साफ कहा कि राजनीति के इस हमाम में सब नंगे हैं। पप्पू यादव के मुताबिक, सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पसंद थे, लेकिन अब बीजेपी के ही कुछ लोगों को यह बात पच नहीं रही है कि एक पिछड़ी जाति का नेता राज्य की कमान कैसे संभाल रहा है।
सम्राट की ‘चौधराहट’ और शराबबंदी पर बड़ा फैसला
सिर्फ विपक्षी सांसद ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के पुराने सहयोगी जेडीयू (JDU) भी सम्राट चौधरी के मुरीद होते दिख रहे हैं। बिहार के ज्वलंत मुद्दे यानी शराबबंदी (Liquor Ban) को लेकर सम्राट चौधरी ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार में शराबबंदी कानून न केवल जारी रहेगा, बल्कि इसे और सख्ती से लागू किया जाएगा।
इस बयान के बाद जेडीयू नेता और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने सम्राट चौधरी की जमकर तारीफ की। नीरज कुमार ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि सम्राट चौधरी ने शराबबंदी पर अपने संकल्प की ‘चौधराहट’ दिखा दी है। उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान, दलितों, पिछड़ों और युवाओं के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया।
क्या है बिहार का नया सियासी संदेश?
सम्राट चौधरी के नेतृत्व को लेकर पप्पू यादव का समर्थन और जेडीयू की प्रशंसा यह संकेत दे रही है कि बिहार में पिछड़ी और अति-पिछड़ी जातियों की गोलबंदी एक नए स्तर पर पहुँच गई है। जहाँ एक तरफ बीजेपी के अंदरूनी मतभेदों की खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सम्राट चौधरी ने अपनी नीतियों से जेडीयू के कोर वोट बैंक में सेंध लगानी शुरू कर दी है।
क्या सम्राट चौधरी बिहार की इस ‘कांटों भरी कुर्सी’ पर अपनी साख बचा पाएंगे? क्या बीजेपी के अंदर उठ रहे विरोध के सुर शांत होंगे? फिलहाल, पप्पू यादव के इस बयान ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या अब बिहार में अपराधी और साफ-सुथरी छवि की परिभाषा सिर्फ जाति और सुविधा के आधार पर तय होगी?
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