Shivraj Singh Chouhan Speech: देश की संसद में एक बार फिर किसानों का मुद्दा गूंजा, लेकिन इस बार बहस केवल सवालों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आंकड़ों और दावों की ऐसी जंग छिड़ी जिसने सदन का तापमान बढ़ा दिया। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान जब किसानों की आय को लेकर सवाल हुआ, तो कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिस अंदाज में जवाब दिया, उसने सत्ता पक्ष में जोश भर दिया और विपक्ष को सोचने पर मजबूर कर दिया।
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“पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं- आय दोगुनी नहीं, तीन गुनी हुई है”
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अनुभवी सांसद प्रोफेसर सौगत रॉय ने जब सरकार को किसानों की आय के मुद्दे पर घेरा, तो कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डंके की चोट पर जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मैं भारत का कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि किसानों की आय दोगुनी हुई है। इतना ही नहीं, देश के कई हिस्सों में किसानों ने अपनी मेहनत और सरकारी योजनाओं के दम पर आय को तीन गुना तक बढ़ाया है।
शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे वहां का किसान अब साल में तीन-तीन फसलें ले रहा है। उन्होंने रेवाड़ी के एक सफल किसान का जिक्र किया और यहाँ तक कह दिया कि वे उनका फोन नंबर भी दे सकते हैं ताकि विपक्ष खुद सच्चाई जान सके। हालांकि, स्पीकर ने उन्हें समय की कमी का हवाला देते हुए टोक दिया।
धर्मेंद्र यादव का वार: स्वामीनाथन कमेटी और 2014 का वादा
सदन में असली रोमांच तब आया जब समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद धर्मेंद्र यादव अपनी सीट से खड़े हुए। उन्होंने कृषि मंत्री के ‘आय दोगुनी’ वाले दावे पर सीधा पलटवार किया। धर्मेंद्र यादव ने सरकार को साल 2014 के चुनावी घोषणापत्र की याद दिलाई। उन्होंने तीखा सवाल दागते हुए पूछा— “सरकार ने वादा किया था कि वे स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें (C2+50% फार्मूला) लागू करेंगे। आप गोल-मोल जवाब न दें, सीधा बताएं कि क्या सरकार स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू करेगी या नहीं?”
धर्मेंद्र यादव के इस सवाल पर सदन में शोर बढ़ गया। विपक्षी सांसद उत्तेजित होकर बोलने लगे, जिस पर लोकसभा अध्यक्ष को दखल देना पड़ा और उन्होंने सांसदों को शांत रहने की हिदायत दी।
UPA सरकार के ‘कैबिनेट नोट’ से शिवराज का पलटवार
विपक्ष के तीखे हमलों का जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने इतिहास के पन्ने पलट दिए। उन्होंने कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए (UPA) सरकार थी, तब उन्होंने खुद एक ‘कैबिनेट नोट’ लिखकर यह स्वीकार किया था कि स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू नहीं की जा सकतीं।
कृषि मंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि आज सरकार केवल गेहूं और धान ही नहीं, बल्कि अंगूर, मिर्च और अन्य फल-सब्जियों पर भी ध्यान दे रही है। उन्होंने एक बड़ा ऐलान भी किया कि अगर किसान आलू, प्याज और टमाटर जैसे उत्पादों को बड़े शहरों में बेचने जाता है, तो उसके ट्रांसपोर्टेशन (परिवहन) का खर्च भी सरकार वहन करने की दिशा में काम कर रही है।
किसान सम्मान निधि: सीधे खाते में मदद
मंत्री ने सदन को याद दिलाया कि पीएम-किसान सम्मान निधि के जरिए सालाना 6000 रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं, जिसने छोटे किसानों को बहुत बड़ा संबल दिया है। कृषि मंत्री के अनुसार, लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने की दोहरी रणनीति से ही किसानों की आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार आया है।
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