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Tariffs: विनिर्माण हब बनेगा भारत, बड़े स्तर पर वैश्विक कंपनियां आएंगी; अमेरिकी टैरिफ देश के लिए आपदा में अवसर

Tariffs: भारत को टैरिफ का लाभ उठाने के लिए फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल्स पर विशेष जोर देना चाहिए। टेक्सटाइल्स को पीएलआई और अन्य योजनाओं के जरिये बढ़ावा

Priyanshi
Priyanshi
2025-04-05
Tariffs: विनिर्माण हब बनेगा भारत, बड़े स्तर पर वैश्विक कंपनियां आएंगी; अमेरिकी टैरिफ देश के लिए आपदा में अवसर
Tariffs: विनिर्माण हब बनेगा भारत, बड़े स्तर पर वैश्विक कंपनियां आएंगी; अमेरिकी टैरिफ देश के लिए आपदा में अवसर

Tariffs: भारत को टैरिफ का लाभ उठाने के लिए फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल्स पर विशेष जोर देना चाहिए। टेक्सटाइल्स को पीएलआई और अन्य योजनाओं के जरिये बढ़ावा देने की जरूरत है। सरकार ने निर्यात बढ़ाने के लिए कई योजनाएं घोषित की हैं, फिर भी और अधिक कार्य की आवश्यकता बनी हुई है। इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए 2.7 अरब डॉलर का पीएलआई है, और इन सेक्टरों की दक्षता और प्रदर्शन को निरंतर सुधारने पर ध्यान देना आवश्यक है।

अमेरिका की टैरिफ नीति से भारत को लाभ

अमेरिका द्वारा 26 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बावजूद भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में शीर्ष पर बना रहेगा। इससे भारत को विनिर्माण क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही, वे वैश्विक कंपनियां भारत की ओर रुख कर सकती हैं जो अमेरिका और चीन सहित वियतनाम में भारी टैरिफ से जूझ रही हैं।

वेंचुरा सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए टैरिफ अन्य वैश्विक व्यापार भागीदारों की तुलना में काफी कम हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत के लिए बातचीत के द्वार खुले हुए हैं। इस नीति से अमेरिका में मांग पर असर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति में वृद्धि होने की संभावना है।

चीन को होगा नुकसान, भारत को मिलेगा लाभ

भारत पर कम टैरिफ से चीन को अधिक नुकसान होगा। चीन और वियतनाम में बड़ी कंपनियों के कांट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर अब भारत का रुख कर सकते हैं, जिससे भारत में विनिर्माण ढांचा मजबूत होगा। ट्रंप से पहले बाइडेन प्रशासन ने भी चीन से बाहर विनिर्माण को बढ़ावा देने की पहल की थी, और यह रुझान अब और तेज हो सकता है। वर्तमान में भारत का निर्यात 750-800 अरब डॉलर है, जबकि चीन का 3.3 लाख करोड़ डॉलर है। ऐसे में भारत के पास अपनी वृद्धि दर को तेज करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

निर्यात बढ़ाने का सुनहरा अवसर

भारत को निर्यात क्षमता बढ़ाने का अवसर मिला है। कोविड-19 संकट ने मांग और आपूर्ति दोनों को प्रभावित किया था, लेकिन मौजूदा स्थिति आपूर्ति संचालित है, जो वैश्विक विनिर्माण में संरचनात्मक बदलावों से उत्पन्न हुई है। संभावित वैश्विक ब्याज दर में कमी से खपत को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था और तेजी से बढ़ेगी।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की प्रमुख भूमिका

विश्व व्यापार परिदृश्य बदल रहा है, और भारत इस बदलाव का लाभ उठाने के लिए एक मजबूत स्थिति में है। मामूली टैरिफ, बढ़ता विनिर्माण आधार और संरचनात्मक लाभों के चलते भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, अमेरिका की कूटनीति को समझना और सतर्क रहना भी आवश्यक है।

भारत को पश्चिमी भागीदारों के साथ मिलकर स्वायत्त प्रणालियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों में निवेश करने की आवश्यकता है, जिससे इसकी प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ सके।

भारतीय टैरिफ में कमी से बढ़ेगी दक्षता

अगर भारत अमेरिका के साथ एक विशेष समझौता कर पाता है, जिससे टैरिफ में कमी हो, तो इससे भारत में दक्षता और उत्पादकता बढ़ेगी। यह न केवल भारत के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद होगा बल्कि वैश्विक व्यापार में भी भारत की स्थिति मजबूत करेगा।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय कंपनियों को आगे लाने की जरूरत

भारत को अपनी कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे लाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। इसे एक मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था के रूप में अन्य लोकतांत्रिक देशों के साथ अधिक जुड़ाव बढ़ाने की जरूरत है।

फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल्स पर विशेष जोर

भारत को टैरिफ से मिलने वाले लाभों का पूरा उपयोग करने के लिए फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल्स जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। टेक्सटाइल्स सेक्टर को पीएलआई और अन्य योजनाओं के जरिए विस्तार देना चाहिए। सरकार ने निर्यात को बढ़ाने के लिए कई योजनाएं घोषित की हैं, लेकिन अभी भी अधिक प्रयासों की आवश्यकता बनी हुई है।

अमेरिका की नीति को समझना जरूरी

भारत को अमेरिका की टैरिफ नीति को गहराई से समझने की जरूरत है। जिन क्षेत्रों में भारत को बांग्लादेश, वियतनाम और चीन से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, उनमें भारत पर लगाए गए टैरिफ कम हैं। उदाहरण के लिए, टेक्सटाइल्स सेक्टर में बांग्लादेश प्रतिस्पर्धी बना हुआ है, जबकि विनिर्माण में वियतनाम और चीन का दबदबा है। इन देशों पर 37 से 154 फीसदी तक का टैरिफ लगाया गया है।

भारत को अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए और इसका पूरा लाभ उठाने के लिए अपनी रणनीति को और मजबूत करना चाहिए। विनिर्माण हब बनने की दिशा में उठाए गए ठोस कदम न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे बल्कि वैश्विक व्यापार में भी इसकी स्थिति को और मजबूत करेंगे।

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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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