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UP Panch:ayat Election: पंचायत चुनाव की तारीख पर मुहर और गंगा के बीच ‘इफ्तार' पर क्यों भड़के शंकराचार्य?

UP Panch:ayat Election : उत्तर प्रदेश की सियासी फिजाओं में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। एक तरफ जहाँ गाँव की सरकार यानी यूपी पंचायत चुनाव (UP Panch

Chetan
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2026-03-20
UP Panch:ayat Election: पंचायत चुनाव की तारीख पर मुहर और गंगा के बीच ‘इफ्तार' पर क्यों भड़के शंकराचार्य?
UP Panch:ayat Election: पंचायत चुनाव की तारीख पर मुहर और गंगा के बीच ‘इफ्तार' पर क्यों भड़के शंकराचार्य?

UP Panch:ayat Election : उत्तर प्रदेश की सियासी फिजाओं में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। एक तरफ जहाँ गाँव की सरकार यानी यूपी पंचायत चुनाव (UP Panchayat Election) का बिगुल बजता हुआ दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ मोक्षदायिनी गंगा की लहरों के बीच हुए एक आयोजन ने धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में ‘आग’ लगा दी है। ओम प्रकाश राजभर के दावों और शंकराचार्य के कड़े रुख ने सूबे की राजनीति को एक नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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1. पंचायत चुनाव: 25 मार्च से शुरू होगा निर्णायक अध्याय

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ जमाने के लिए बेताब राजनीतिक दलों के लिए बड़ी खबर है। कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पंचायत चुनावों की राह में आने वाली कानूनी बाधाएं अब लगभग खत्म हो चुकी हैं।

अहम तारीखें और रणनीतियाँ:

  • 25 मार्च का हाई कोर्ट धमाका: सरकार 25 मार्च को हाई कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी। माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट चुनाव की तारीखों का आधार बनेगी।

  • कैबिनेट की बैठक और OBC आरक्षण: 24 मार्च को होने वाली कैबिनेट बैठक बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें ‘पिछड़ा वर्ग आयोग’ के गठन पर अंतिम फैसला हो सकता है। यह आयोग अगले 3 से 4 हफ्तों में अपनी रिपोर्ट देगा, जिससे रोटेशनल आरक्षण (Rotational Reservation) का रास्ता साफ होगा।

  • 15 अप्रैल तक वोटर लिस्ट: राजभर ने भरोसा दिलाया है कि मतदाता सूची और मतपत्रों की तैयारी युद्धस्तर पर है। 15 अप्रैल तक फाइनल वोटर लिस्ट जनता के सामने होगी। चूंकि यह सर्वे 2011 की जनगणना पर आधारित है, इसलिए सरकार का दावा है कि इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।

2. वाराणसी ‘इफ्तार’ विवाद: जब गंगा की लहरों पर छिड़ा संग्राम

वाराणसी, जिसे धर्म और संस्कृति की राजधानी कहा जाता है, वहां से आए एक वीडियो ने पूरे प्रदेश में तनाव पैदा कर दिया है। गंगा के बीचों-बीच चलती नाव पर मुस्लिम युवकों द्वारा इफ्तार करने और कथित तौर पर मांसाहार (Non-Veg) का सेवन करने की खबरों ने तूल पकड़ लिया है।

इस घटना पर राजनीति भी जमकर हो रही है। जहाँ अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने इसे सामान्य बताते हुए सरकार पर निशाना साधा कि गंगा में चलने वाले क्रूज से होने वाली गंदगी पर चुप्पी क्यों है? वहीं कांग्रेस ने भी इस आयोजन का बचाव किया है। लेकिन, हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों में इसे लेकर भारी आक्रोश है।

3. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा प्रहार: “कमाई के चक्कर में मर्यादा भूली सरकार”

इस पूरे विवाद में सबसे शक्तिशाली आवाज बनकर उभरे हैं ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद। उन्होंने इस घटना के लिए सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

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शंकराचार्य ने भावुक और कड़े शब्दों में कहा कि जब सरकार ने खुद गंगा को ‘कमाई का अड्डा’ बना दिया है, तो ऐसी घटनाएं रुकेंगी कैसे? उन्होंने तर्क दिया कि गंगा में क्रूज, तैरते हुए रेस्टोरेंट और होटलों की अनुमति देकर सरकार ने पवित्रता से समझौता किया है। नाविक अब चंद रुपयों के लिए किसी भी मर्यादा को लांघने को तैयार हैं। शंकराचार्य का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे आस्था और पर्यटन के बीच के संघर्ष के रूप में देख रहे हैं।

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क्या होगा यूपी का अगला सियासी कदम?

एक तरफ चुनाव की तैयारी है और दूसरी तरफ धार्मिक भावनाओं का उबाल। ओम प्रकाश राजभर के लिए जहाँ पंचायत चुनाव उनकी साख का सवाल हैं, वहीं योगी सरकार के लिए गंगा की मर्यादा और विपक्ष के हमलों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी। क्या 15 अप्रैल तक वाकई चुनावी बिगुल बज जाएगा? और क्या गंगा में होने वाली इन गतिविधियों पर कोई सख्त कानून आएगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।


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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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