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Welcome To The Jungle Review: अक्षय कुमार की तोतली जुबान और 34 सितारों का पागलपन, सिनेमाघरों में रिलीज हुई अहमद खान की फिल्म

बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार यानी अक्षय कुमार की मोस्ट अवेटेड मल्टी-स्टारर कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ (Welcome To The Jungle) शुक्रवार, 26 जून 2026

Malvika
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2026-06-26
Welcome To The Jungle Review: अक्षय कुमार की तोतली जुबान और 34 सितारों का पागलपन, सिनेमाघरों में रिलीज हुई अहमद खान की फिल्म
Welcome To The Jungle Review: अक्षय कुमार की तोतली जुबान और 34 सितारों का पागलपन, सिनेमाघरों में रिलीज हुई अहमद खान की फिल्म

बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार यानी अक्षय कुमार की मोस्ट अवेटेड मल्टी-स्टारर कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ (Welcome To The Jungle) शुक्रवार, 26 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह सुपरहिट ‘वेलकम’ सीरीज की तीसरी किस्त है, जिसमें एक-दो नहीं बल्कि लगभग 34 एक्टर्स की भारी-भरकम फौज एक साथ कॉमेडी का तड़का लगाते हुए नजर आ रही है। अहमद खान के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी दिवंगत लेखक नीरज वोरा ने लिखी है। यदि आप भी इस सप्ताहांत सिनेमाघरों का रुख करने की सोच रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि अक्षय कुमार और उनकी पलटन दर्शकों को हंसाने में कितनी कामयाब रही है।

टैक्स चोरी से लेकर 2000 करोड़ के बजट तक की कहानी

फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ की कहानी की शुरुआत टैक्स चोरी से बचने के लिए एक फ्लॉप फिल्म बनाने की अजीबोगरीब साजिश के साथ होती है। दिलचस्प बात यह है कि इस फ्लॉप फिल्म को बनाने के लिए देवदास (राजपाल यादव) और परेश रावल को चुना जाता है। वे मात्र 20 हजार रुपये के बजट में फिल्म बनाने की योजना बना रहे होते हैं, लेकिन तभी उन्हें अचानक 2,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट मिल जाता है।

अब इतनी महंगी फिल्म के लिए एक फ्लॉप हीरो की तलाश शुरू होती है, जहां एंट्री होती है अक्षय कुमार की। फिल्म में अक्षय एक ऐसे मजबूर अभिनेता का रोल निभा रहे हैं, जो जीवनयापन के लिए भोजपुरी सिनेमा में आइटम सॉन्ग करने पर मजबूर है। उन्हें इस फिल्म का मुख्य हीरो बना दिया जाता है। इसके बाद कहानी में मजनू भाई के भाई ‘रोमियो’ (अरशद वारसी) और उदय भाई के भाई ‘येड़ा अन्ना’ (सुनील शेट्टी) की एंट्री होती है, जो फिल्म के अन्य हीरो बनते हैं। फिल्म की कहानी में अक्षय कुमार के पिता की बैक स्टोरी और राजपाल यादव के कर्ज लेने की उलझनों को भी पिरोया गया है।

आर्म ट्रेनिंग और शूटिंग का असली आतंकवाद से घालमेल

फिल्म की शूटिंग को असली और वास्तविक दिखाने के लिए सभी कलाकारों को एक बेहद मजेदार आर्मी ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। यह आर्मी ट्रेनिंग सीक्वेंस दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर देता है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब मेकर्स को फिल्म की पूरी शूटिंग महज एक दिन के भीतर खत्म करनी होती है।

इसके लिए एक ऐसे गांव का चयन किया जाता है जो आतंकवादियों के निशाने पर है। इसके बाद फिल्म की शूटिंग और गांव की असल जिंदगी की आतंकवादी घटनाओं के बीच ऐसा घालमेल होता है कि सेट पर सब कुछ अस्त-व्यस्त हो जाता है। फिल्म की पटकथा में बहुत ज्यादा तार्किक गहराई तलाशने की कोशिश करना बेकार है, क्योंकि इसकी कहानी पूरी तरह से बिना सोचे-समझे हंसी-मजाक करने के उद्देश्य से लिखी गई है।

अहमद खान का डायरेक्शन और कलाकारों की एक्टिंग

डायरेक्टर अहमद खान ने फिल्म में 34 सितारों की इतनी बड़ी फौज को एक साथ पर्दे पर उतारा है कि दर्शकों को अपना दिमाग बिल्कुल भी खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ता। फिल्म में पैपराजी का मजाक उड़ाने से लेकर अक्षय कुमार के खुद के फ्लॉप हीरो वाले टैग पर व्यंग्य किया गया है। अहमद खान का निर्देशन फिल्म को काफी रॉ और हल्का-फुल्का रखता है, हालांकि संपादन (Editing) के मोर्चे पर फिल्म में थोड़ी हड़बड़ाहट और जल्दबाजी साफ महसूस होती है। कई दृश्य देखकर लगता है कि उन्हें बेहद रॉ छोड़ दिया गया है।

एक्टिंग की बात करें तो अक्षय कुमार पूरी फिल्म की जान बनकर उभरे हैं। तोतली जुबान और डबल रोल में अक्षय ने अपने बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है। उनके अलावा, राजपाल यादव (देवदास) और परेश रावल की जुगलबंदी एक बार फिर कमाल का जादू बिखेरती है। फिल्म में वरिष्ठ कलाकार फरीदा जलाल और किरण कुमार की जोड़ी भी एक नए और अनोखे अंदाज में दिखाई देती है। जैकी श्रॉफ, रवीना टंडन, दिशा पाटनी और अन्य सहायक कलाकार भी अपनी भूमिकाओं में ठीक-ठाक नजर आए हैं।

यह फिल्म विशुद्ध रूप से बॉलीवुड स्टाइल की उन कॉमेडी फिल्मों के प्रशंसकों के लिए है, जहां कहानी की जगह सितारों के वन-लाइनर्स और फनी पंच मायने रखते हैं। यदि आप बिना दिमाग लगाए विशुद्ध रूप से हंसना चाहते हैं और अक्षय कुमार को उनके पुराने कॉमेडी फॉर्म में देखना चाहते हैं, तो ‘वेलकम टू द जंगल’ एक बार देखने लायक मनोरंजन प्रदान करती है।

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Author of Bolbindas

Contributor and Lead Editor. Writing deep insights and analytical commentaries.

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