मस्जिदों की खुदाई ठीक नहीं… मोहन भागवत के बाद संघ के 2 शीर्ष नेताओं ने भी दी यही सलाह
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने एक बार फिर देश में चल रहे मंदिर-मस्जिद विवादों पर अपनी राय स्पष्ट की है। संघ का मानना है कि इतिहास में उलझने के बजाय, समाज को वर्तमान में शांति और सद्भाव पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
संघ का स्पष्ट संदेश
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पहले ही इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त कर दी थी। अब, संघ के दो प्रमुख पदाधिकारियों, दत्तात्रेय होसबाले और भैय्याजी जोशी ने भी इसी बात को दोहराया है। उनका कहना है कि मस्जिदों की खुदाई जैसे कदम समाज में केवल नफरत और तनाव को बढ़ाएंगे।
संघ उन मांगों का भी विरोध कर रहा है, जिनमें उन हजारों मस्जिदों को वापस लेने की बात कही जा रही है, जिनके बारे में दावा किया जाता है कि वे मंदिरों को तोड़कर बनाई गई थीं। आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने इस बारे में बोलते हुए कहा, “अगर हम सभी मस्जिदों और इमारतों की खुदाई शुरू कर देंगे, तो क्या यह समाज के लिए सही होगा? क्या हमें 30,000 मस्जिदों की खुदाई करनी चाहिए?”
अतीत में उलझने से बेहतर है भविष्य पर ध्यान देना
संघ का मानना है कि हमें इतिहास में बहुत पीछे जाने के बजाय एक समाज के रूप में आगे बढ़ना चाहिए। दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि इस तरह के कदमों से समाज में शांति और एकता को नुकसान पहुंचेगा।
मोहन भागवत ने भी इसी बात पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि मस्जिदों के विवादित स्थलों पर कब्ज़ा करने की मांग समाज के लिए हानिकारक हो सकती है। इसके बजाय, हमें छुआछूत को खत्म करने और युवाओं में अच्छे मूल्यों को बढ़ावा देने जैसे अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
मंदिर का सही अर्थ
होसबाले ने यह भी कहा कि हमें यह समझने की जरूरत है कि मंदिर का सही अर्थ क्या है। क्या कोई इमारत, जो कभी मंदिर थी और बाद में मस्जिद में बदल दी गई, अभी भी पवित्र है? क्या हमें हिंदुत्व को केवल पत्थर की इमारतों में खोजना चाहिए, या हमें उन लोगों के दिलों में हिंदुत्व की भावना को जगाने की कोशिश करनी चाहिए जो इससे दूर हो गए हैं?
संघ का मानना है कि अगर हम लोगों और समुदायों के बीच अपनी जड़ों को फिर से मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करें, तो इस तरह के विवाद अपने आप कम हो जाएंगे।
एकता और प्रगति का संदेश
आरएसएस के वरिष्ठ नेता भैय्याजी जोशी ने भी कहा है कि इतिहास को बार-बार खोदने से समाज में केवल तनाव बढ़ेगा। उनका कहना है कि हमें वर्तमान और भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।
कुल मिलाकर, संघ मंदिर-मस्जिद विवादों को बढ़ावा देने के बजाय समाज में एकता, शांति और प्रगति को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। उनका मानना है कि अतीत के झगड़ों में उलझे रहने से बेहतर है कि हम सब मिलकर एक बेहतर भविष्य का निर्माण करें।
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