Yogi Adityanath: पश्चिम बंगाल की राजनीति में रविवार का दिन किसी बड़े भूकंप से कम नहीं था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब सोनामुखी की धरती पर उतरे, तो उनके तेवर और शब्दों की धार ने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी। मुख्यमंत्री योगी ने सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC), कांग्रेस और वामपंथी दलों को निशाने पर लेते हुए कहा कि बंगाल में अब अराजकता का अंत समय आ गया है।
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“कार्यकर्ताओं का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा”
योगी आदित्यनाथ ने सोनामुखी की विशाल जनसभा में उन कार्यकर्ताओं का जिक्र किया जिन्होंने राजनीतिक हिंसा में अपनी जान गंवाई या गंभीर रूप से घायल हुए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “तृणमूल के शासन में यहाँ जो तांडव हुआ है, उसकी मिसाल कहीं नहीं मिलती। हमारे कार्यकर्ता सुमन को गोली मार दी गई, स्वरूप घोष और पलाश घोष जैसे लोगों के घर उजाड़ दिए गए। सुशोभन का हाथ काट दिया गया।” योगी ने स्पष्ट संदेश दिया कि भाजपा इन गुंडागर्दी के खिलाफ डटकर खड़ी है और इसका हिसाब जनता वोट की चोट से लेगी।
बांग्लादेशी हिंदुओं पर ममता की चुप्पी पर कड़ा प्रहार
योगी आदित्यनाथ ने ममता बनर्जी सरकार पर ‘तुष्टिकरण’ का सबसे गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हाल ही में बांग्लादेश में एक दलित हिंदू की निर्मम हत्या हुई, जिसके खिलाफ भाजपा ने आवाज उठाई, लेकिन बंगाल की मुख्यमंत्री मौन रहीं। योगी ने पूछा, “आखिर ममता दीदी चुप क्यों हैं? क्या उन्हें डर है कि बोलने से उनका मुस्लिम वोट बैंक खिसक जाएगा?” उन्होंने आगाह किया कि वोट बैंक के सौदागर बंगाल की डेमोग्राफी को बदलने की साजिश रच रहे हैं, जिसे रोकना अब अनिवार्य है।
“यूपी में सब चंगा, तो बंगाल में क्यों है दंगा?”
उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि 9 साल पहले यूपी की स्थिति भी बंगाल जैसी ही थी—दंगे, कर्फ्यू और माफियाओं का राज। लेकिन 2017 में डबल इंजन सरकार बनने के बाद आज यूपी में ‘नो कर्फ्यू, नो दंगा’ की स्थिति है। योगी ने गरजते हुए कहा, “यूपी के सभी गुंडे-माफिया अब जहन्नुम की यात्रा पर चले गए हैं। अगर बंगाल में भी डबल इंजन सरकार आती है, तो यहाँ के दंगाइयों का इलाज भी बुलेट की रफ्तार से होगा।”
किसानों की बदहाली और आर्थिक तंगी का सच
योगी आदित्यनाथ ने बंगाल के किसानों की तुलना यूपी के किसानों से करते हुए टीएमसी सरकार की पोल खोली। उन्होंने बताया कि जहाँ यूपी में आलू किसान को 15-16 रुपये किलो का दाम मिल रहा है, वहीं बंगाल का किसान महज 1-2 रुपये में अपनी उपज बेचने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के ‘आनंदमठ’ में जिस अकाल और त्रासदी का जिक्र था, आज टीएमसी के गुंडे वही हालात पैदा कर रहे हैं।
सांस्कृतिक विरासत और 1905 का संकल्प
गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को याद करते हुए योगी ने कहा कि बंगाल ने ‘वंदे मातरम’ जैसा अमर मंत्र दिया जिसने पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोया। उन्होंने 1905 के बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन की याद दिलाते हुए कहा कि जिस तरह तब बंगाल नहीं झुका था, आज भी बंगाल को तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार के आगे झुकना नहीं है। योगी आदित्यनाथ ने जनता से अपील की कि सोनामुखी से दिबाकर घरामी, इंडास से निर्मल धारा और बरजोड़ा से बिलेश्वर सिंघा को भारी बहुमत से जिताकर बंगाल में परिवर्तन की नई इबारत लिखें।
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